
एयर इंडिया ने 4 अगस्त को संचालित फुकेट-दिल्ली उड़ान के पायलट-इन-कमांड (PIC) की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं। इस विमान को उड़ान के दौरान अचानक ऊंचाई में बदलाव का सामना करना पड़ा था, जिसमें 20 यात्री और 4 क्रू सदस्य घायल हुए थे। एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की शुक्रवार को जारी प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक, पायलट के कन्फर्मेटरी टेस्ट में साइकोएक्टिव पदार्थ के लिए नतीजा ‘नॉन-नेगेटिव’ आया।
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एयर इंडिया के प्रवक्ता ने कहा कि सुरक्षा कंपनी की सर्वोच्च प्राथमिकता है। कंपनी ने विमानन सुरक्षा, फिटनेस या नियामकीय आवश्यकताओं के उल्लंघन को लेकर अपनी जीरो-टॉलरेंस नीति के तहत पायलट की नौकरी तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी है।
372 फुट ऊपर गया, फिर 292 फीट नीचे आया विमान
AAIB के मुताबिक, इस दौरान विमान को अचानक altitude upset का सामना करना पड़ा। घटना के दौरान विमान अपनी निर्धारित FL360 ऊंचाई से पहले करीब 372 फीट ऊपर गया और फिर 292 फीट नीचे आया।
रिपोर्ट के अनुसार, करीब 9:32 बजे ब्लू हाइड्रोलिक सिस्टम को बहाल कर दिया गया। इसके कुछ सेकंड बाद येलो और ग्रीन हाइड्रोलिक सिस्टम भी बहाल हो गए। इससे फ्लाइट-कंट्रोल सरफेस का नियंत्रण वापस आया और विमान सामान्य परिचालन स्थिति में लौट सका। AAIB ने कहा है कि घटना के तकनीकी और अन्य पहलुओं की विस्तृत जांच अभी जारी है।
AAIB रिपोर्ट में क्या कहा गया?
AAIB की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, घटना के समय PIC विमान को सीधे नियंत्रित नहीं कर रहे थे, बल्कि वे पायलट मॉनिटरिंग की भूमिका में थे। दो पायलटों वाले विमान में पायलट मॉनिटरिंग वह क्रू सदस्य होता है जो उस समय प्राथमिक नियंत्रण नहीं संभाल रहा होता।
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वहीं, को-पायलट के दोनों टेस्ट नेगेटिव आए।
AAIB ने अपनी रिपोर्ट में यह नहीं कहा है कि पायलट के शरीर में साइकोएक्टिव पदार्थ पाए जाने और विमान की ऊंचाई में अचानक बदलाव के बीच कोई संबंध था। रिपोर्ट में कहा गया है कि विमान के तकनीकी और अन्य पहलुओं की विस्तृत जांच अभी जारी है।
AAIB ने विमानन नियामक डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) को साइकोएक्टिव पदार्थों के दुरुपयोग को रोकने के लिए उचित कार्रवाई करने की सलाह दी है। रिपोर्ट में ऐसे पदार्थों के इस्तेमाल को गंभीर चिंता का विषय बताया गया है।
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उड़ान के दौरान हाइड्रोलिक सिस्टम में आई खराबी
फुकेट से यह उड़ान सुबह 7:11 बजे IST रवाना हुई थी। शुरुआत में विमान ने किसी समस्या की सूचना नहीं दी। सुबह करीब 9:10 बजे विमान कोलकाता फ्लाइट इंफॉर्मेशन रीजन में दाखिल हुआ। इसके करीब 22 मिनट बाद, सुबह 9:32 बजे, विमान के फ्लाइट-कंट्रोल सिस्टम ने सबसे पहले ग्रीन हाइड्रोलिक सिस्टम के काम नहीं करने का संकेत दिया। इसके चार सेकंड बाद ब्लू और येलो हाइड्रोलिक सिस्टम के भी बंद होने का पता चला।
विमान में हाइड्रोलिक सिस्टम कई महत्वपूर्ण हिस्सों को संचालित करने में मदद करते हैं। इनमें व्हील ब्रेक, नोज-व्हील स्टीयरिंग, लैंडिंग गियर, फ्लाइट-कंट्रोल सरफेस, विंडशील्ड वाइपर और प्रोपेलर पिच कंट्रोल जैसे सिस्टम शामिल हैं। इसके बाद विमान का ऑटोपायलट डिस्कनेक्ट हो गया और लगातार दोहराने वाली चेतावनी की आवाज आने लगी। तीन सेकंड बाद करीब दो सेकंड के लिए स्टॉल वार्निंग भी सक्रिय हुई।


