
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में करीब 100 से 125 साल पुराने हिन्दू मंदिर को कथित तौर पर गिराए जाने के मामले में भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है। भारत ने इसे अल्पसंख्यक समुदाय के पूजा स्थल के खिलाफ “निंदनीय तोड़फोड़ की कार्रवाई” करार दिया है।
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विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा कि नारोवाल स्थित मंदिर की सुरक्षा सुनिश्चित करने में पाकिस्तानी अधिकारियों की कथित उदासीनता और विफलता बेहद चिंताजनक है। भारत ने मामले की तत्काल और पारदर्शी जांच कराने तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
भारत ने पाकिस्तान से मंदिर की स्थिति बहाल करने के लिए तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की अपील भी की। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान की प्राथमिक जिम्मेदारी है कि वह अपने देश में रहने वाले अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करे।
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क्यों चर्चा में आया 100 साल पुराना हिंदू मंदिर?
यह मंदिर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के नारोवाल जिले के सिराज गांव में स्थित था। लाहौर से करीब 130 किलोमीटर दूर स्थित इस मंदिर का निर्माण लगभग 100 से 125 साल पहले हुआ था और यह करीब 1,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला हुआ था।
Official Spokesperson’s response to media queries regarding reported demolition of a century-old Hindu temple in Pakistan
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— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) September 2, 2026
स्थानीय निवासियों, अल्पसंख्यक संगठनों और एक राजनीतिक दल ने आरोप लगाया कि 21 अगस्त को धार्मिक कट्टरपंथियों के एक समूह ने मंदिर को गिरा दिया, ताकि मंदिर की जमीन को पास स्थित एक मदरसे में शामिल किया जा सके।
पाकिस्तान मसीहा मिल्लत पार्टी (PMMP) ने इस कथित घटना के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। पार्टी ने मंदिर को दोबारा बनाए जाने की भी मांग की है। PMMP के परवेज सहोत्रा ने आरोप लगाया कि मंदिर गिराने वाले लोग तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) से जुड़े थे। TLP पाकिस्तान की एक प्रतिबंधित दक्षिणपंथी इस्लामिक राजनीतिक पार्टी है।
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पाकिस्तान सरकार ने क्या कहा?
हालांकि, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार ने मंदिर को गिराए जाने के आरोप से इनकार किया है। सरकार के मुताबिक मंदिर को तोड़ा नहीं गया, बल्कि भारी बारिश के कारण उसका एक हिस्सा ढह गया।
पंजाब सरकार ने कहा कि अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री सरदार रमेश सिंह अरोड़ा ने मंदिर स्थल का दौरा किया और पाया कि मूसलाधार बारिश के कारण मंदिर के साइन/संरचना का केवल एक हिस्सा गिरा था। सरकार ने यह भी कहा कि वह क्षतिग्रस्त हिस्से को दोबारा बहाल करेगी। ऐसे में मंदिर के कथित विध्वंस को लेकर भारत की आपत्ति और पाकिस्तान सरकार के स्पष्टीकरण के बीच मामला अब जांच के केंद्र में है।


