
नेपाल में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचाई है। शनिवार तक मृतकों की संख्या बढ़कर 675 हो गई, जबकि राहत और बचाव दल लगातार मलबे से शव बरामद कर रहे हैं। इस बीच नई बारिश और बढ़ते जलस्तर ने भोटेकोशी नदी बेसिन में फिर से बाढ़ आने की आशंका बढ़ा दी है।
नेपाल पुलिस के अनुसार अब तक लगभग 2,400 लोग लापता हैं, जिनमें कम से कम 320 विदेशी नागरिक शामिल हैं। वहीं 4,400 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। सड़कें और पुल बह जाने के कारण कई दूरदराज के गांवों तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया है।
अधिकारियों ने बताया कि बचाए गए लोगों में 261 विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं, जिनसे संपर्क टूट गया था। इनमें 167 भारतीय, 40 चीनी, 8 यूक्रेनी, 4-4 जर्मनी और माल्टा के नागरिक तथा अमेरिका, तुर्किये, पुर्तगाल, रूस, स्पेन, स्विट्जरलैंड, इटली, ओमान, बेल्जियम और बुल्गारिया के नागरिक शामिल हैं।
नेपाल पुलिस के मुताबिक, भोटेकोशी बाढ़ से प्रभावित आठ जिलों से अब तक 675 शव बरामद किए जा चुके हैं। इनमें सबसे अधिक शव चितवन और नवलपरासी जिलों से मिले हैं।
15 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी राहत कार्य में जुटे
सरकार ने खोज और बचाव अभियान के लिए 15,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया है। हेलीकॉप्टरों के जरिए फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और राहत सामग्री वितरित करने का काम लगातार जारी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हिमालयी क्षेत्र में बर्फ और चट्टानों के धंसने या हिमस्खलन के कारण यह आपदा आई। इसके बाद पानी, कीचड़ और मलबे का विशाल सैलाब मध्य नेपाल के कई जिलों में फैल गया, जिससे घर, वाहन, सड़कें, पुल और जलविद्युत परियोजनाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं।
चीन में भी असर, 7 की मौत
चीनी अधिकारियों के अनुसार सीमा के दूसरी ओर चीन में भी सात लोगों की मौत हुई है, जबकि 550 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं।
हाईअलर्ट पर नेपाल सरकार
नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने कहा कि सरकार बाढ़ प्रभावित नागरिकों के साथ खड़ी है और हर नागरिक की जान बचाना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बताया कि राहत दल, चिकित्सा टीमें और आपदा प्रतिक्रिया बल प्रभावित क्षेत्रों में संयुक्त रूप से काम कर रहे हैं। लापता विदेशी नागरिकों के परिवारों से संपर्क बनाए रखने के लिए राजनयिक स्तर पर भी प्रयास किए जा रहे हैं।
नए खतरे की आशंका
भारी बारिश और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के कारण राहत कार्य प्रभावित हो रहे हैं। कई इलाके ऐसे हैं जहां केवल हेलीकॉप्टर के जरिए ही पहुंचा जा सकता है। प्रारंभिक बाढ़ के बाद आपदा क्षेत्र के ऊपरी हिस्से में एक नई झील बनने की भी जानकारी मिली है, जिससे एक और बड़े जलप्रवाह की आशंका बनी हुई है।
सुरंगों में फंसे 100 से ज्यादा मजदूर
शनिवार देर रात नेपाली सेना ने त्रिशूली 3A जलविद्युत परियोजना की सुरंग में एक पाइप डालने में सफलता हासिल की, जहां कई मजदूरों के फंसे होने की आशंका है। गृह मंत्री सुदन गुरूंग ने बताया कि सुरंग के भीतर हवा पहुंचाने का काम शुरू कर दिया गया है और जल्द ही बचाव दल अंदर भेजा जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि 100 से अधिक मजदूर अभी भी जीवित अवस्था में सुरंगों में फंसे हो सकते हैं। बचाव अभियान मुख्य रूप से त्रिशूली 3A और 3B परियोजनाओं पर केंद्रित है।
भारत की मदद जारी
भारत ने नेपाल में राहत और बचाव कार्यों के लिए 11 सदस्यीय एक्सपर्ट्स सुरंग-राहत दल भेजा है। यह टीम प्रभावित जलविद्युत परियोजनाओं में फंसे मजदूरों को निकालने में तकनीकी सहायता प्रदान कर रही है। इसके अलावा भारत बुधवार से अब तक नेपाल को 57.6 टन राहत सामग्री भेज चुका है।


