
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को वेनेजुएला के साथ एक बड़े समझौते का एलान किया है। इसके तहत अमेरिका वेनेजुएला के 65 अरब बैरल तेल भंडार पर नियंत्रण हासिल करेगा। ALSO READ: सीआईए और रूसी एजेंसी के दो देशों में तख्तापलट के ‘सीक्रेट मिशन’ से खलबली..!
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि इसे विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने बातचीत के बाद तैयार किया है। उन्होंने लिखा कि अमेरिका ने अभी वेनेजुएला के साथ दुनिया के इतिहास का सबसे बड़ा तेल समझौता किया है। इस समझौते की घोषणा करीब नौ महीने बाद हुई है।
President Trump just posted breaking news: he says the United States has reached a historic oil agreement with Venezuela.
Trump claims America now has majority control of more than 65 billion barrels of proven reserves — at no cost to taxpayers. He says the deal more than… pic.twitter.com/5Gz7NiW4c9
— Commentary Donald J. Trump Posts From Truth Social (@TrumpDailyPosts) August 28, 2026
अमेरिका को मिलेगी बड़ी राहत
ट्रंप पर गैस की बढ़ती कीमतों को लेकर दबाव बढ़ रहा है। वहीं, ईरान में युद्ध को छह महीने पूरे हो चुके हैं। अभी इसके खत्म होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। अमेरिका ने अपने रणनीतिक तेल भंडार का इस्तेमाल भी किया है। अगस्त की शुरुआत में इसमें तेल की मात्रा 30 करोड़ बैरल से नीचे चली गई थी। 2026 की शुरुआत से इसमें 10 करोड़ बैरल से ज्यादा की कमी आई है।
वेनेजुएला के तेल पर थी ट्रंप की नजर
इससे पहले ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के लिए एक अभियान चलाया था। उन्हें अमेरिका ले जाया गया था। वहां उन पर संघीय स्तर पर नार्को-आतंकवाद और नशीली दवाओं की तस्करी के आरोपों में मुकदमा चलाया जाना था। जनवरी में मादुरो को सत्ता से हटाए जाने के बाद के दिनों में ट्रंप ने अमेरिकी तेल कंपनियों के वेनेजुएला लौटने की बात कही थी। इन कंपनियों को वहां के तेल भंडार से तेल निकालने की अनुमति देने की बात कही गई थी।
ट्रंप का कहना है कि वेनेजुएला ने अमेरिका का तेल चुराया था। उनका तर्क है कि वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज ने कई दशक पहले सैकड़ों विदेशी कंपनियों की संपत्तियों का राष्ट्रीयकरण कर दिया था। इनमें अमेरिकी तेल कंपनियों की संपत्तियां भी शामिल थीं।


