8.7 करोड़ युवा ‘NEET’ श्रेणी में दर्ज! जानिए क्यों 15 से 29 साल के युवाओं पर नीति आयोग ने जारी किया रेड अलर्ट

8.7 करोड़ युवा 'NEET' श्रेणी में दर्ज! जानिए क्यों 15 से 29 साल के युवाओं पर नीति आयोग ने जारी किया रेड अलर्ट

Indian youth employment crisis

8.7 crore NEET youth India: भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी 'डेमोग्राफिक डिविडेंड' (जनसांख्यिकीय लाभांश) यानी युवा आबादी मानी जाती है। लेकिन नीति आयोग (NITI Aayog) की हालिया रिपोर्ट ‘Reimagining Skilling for Viksit Bharat@2047’ ने देश के सामने एक कड़वी सच्चाई रखी है। रिपोर्ट के अनुसार, 15 से 29 वर्ष की आयु के लगभग 8.7 करोड़ भारतीय युवा 'NEET' (Not in Education, Employment, or Training) श्रेणी में हैं—यानी वे न तो पढ़ाई कर रहे हैं, न नौकरी में हैं और न ही किसी प्रकार का कौशल प्रशिक्षण ले रहे हैं।

यह आंकड़ा केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि भारत के आर्थिक और सामाजिक ताने-बाने पर एक गंभीर सवालिया निशान भी खड़ा करता है। ALSO READ: शिक्षा को लेकर क्यों सड़क पर उतरने को मजबूर है Gen-Alfa 8 साल में 84 हजार स्कूल बंद!

नीति आयोग की रिपोर्ट : मुख्य बिंदु और आंकड़े

राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (NSS) के 78वें दौर के आंकड़ों पर आधारित इस रिपोर्ट में देश के कार्यबल और शिक्षा परिदृश्य को 5 प्रमुख वर्गों में बांटकर विश्लेषित किया गया है:

  1. स्कूली शिक्षा (School Education)
  2. उच्च शिक्षा (Higher/Tertiary Education)
  3. औपचारिक और अनौपचारिक कार्यबल (Formal & Informal Workforce)
  4. NEET युवा (Youth Not in Education, Employment, or Training)
  5. महिलाएं (Women Workforce)

युवा 'NEET' वर्ग में क्यों जा रहे हैं? (प्रमुख कारण)

रिपोर्ट के मुताबिक, युवाओं के इस वर्ग में धकेले जाने के पीछे सबसे बड़ी वजह आर्थिक तंगी और रोजगार योग्य कौशल (Employability Skills) की कमी है:

  • वित्तीय तंगी और महंगाई : निम्न-आय वाले परिवारों के युवा पहले से ही कॉलेज फीस और पढ़ाई के खर्चों के बोझ तले दबे होते हैं। ऐसे में किसी अतिरिक्त सशुल्क (Paid) स्किल ट्रेनिंग प्रोग्राम का खर्च उठाना उनके लिए लगभग असंभव हो जाता है।
  • कम वेतन वाली नौकरियों की मजबूरी : वित्तीय प्रतिबद्धताओं के कारण स्नातक (Graduation) पूरा करते ही कई युवा परिवार की मदद के लिए किसी भी तरह की कम वेतन वाली असंगठित नौकरी करने को मजबूर हो जाते हैं, जबकि लाखों युवा कोई अवसर न मिलने के कारण सीधे 'NEET' वर्ग में चले जाते हैं।
  • स्नातकों में हुनर की कमी : रिपोर्ट में एक चिंताजनक आंकड़ा सामने आया है कि केवल 8.25% स्नातकों को ही उनकी योग्यता और डिग्री के अनुसार रोजगार मिल पाता है। पारंपरिक शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद व्यावहारिक ज्ञान और उद्योग-आधारित (Industry-relevant) स्किल न होने से युवाओं की एम्प्लॉयबिलिटी बहुत कम रह जाती है।

 

Indian youth employment crisis

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अब तक के प्रयास और आगे की राह

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2014-15 से अब तक 7.67 करोड़ से अधिक लोगों को विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत प्रशिक्षित किया जा चुका है। हालांकि, 8.7 करोड़ युवाओं का NEET वर्ग में होना यह दर्शाता है कि कौशल विकास के प्रयासों की गति और गुणवत्ता दोनों को और बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता है।
जब तक देश की इस विशाल युवा शक्ति को सही दिशा, गुणवत्तापूर्ण हुनर और रोजगार के बेहतर अवसर नहीं मिलेंगे, तब तक 'डेमोग्राफिक डिविडेंड' का पूरा फायदा उठा पाना एक कठिन चुनौती बना रहेगा।