‘बेजान कॉन्फ्रेंस सेंटर’, नए संसद भवन पर शशि थरूर का बड़ा बयान; सेंट्रल हॉल पर भी जताई चिंता

‘बेजान कॉन्फ्रेंस सेंटर’, नए संसद भवन पर शशि थरूर का बड़ा बयान; सेंट्रल हॉल पर भी जताई चिंता

shashi tharoor

Shashi Tharoor New Parliament Building: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने नए संसद भवन की डिजाइन और वहां के माहौल पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने नए संसद भवन को 'बेजान कॉन्फ्रेंस सेंटर' बताते हुए कहा कि इसमें पुराने संसद भवन जैसा अपनापन और सहज बातचीत का माहौल नहीं है। ALSO READ: Sugar Price : चीनी के दाम क्यों बढ़ रहे हैं? 15 दिन में 20 रुपए महंगी हुई, सरकार ने उठाया बड़ा कदम, जानें आपके लिए क्या बदलेगा

 

थरूर ने पत्रकार और लेखिका शोभना के. नायर की नई किताब 'हाउसिंग द रिपब्लिक: ए बायोग्राफी ऑफ द इंडियन पार्लियामेंट' के विमोचन के दौरान कहा कि ये दूरियां हमारी राजनीति के ध्रुवीकरण को दर्शाती हैं।

 

दूर-दूर बैठने की व्यवस्था पर सवाल

थरूर ने कहा कि नए संसद भवन की छत काफी ऊंची है। इससे सदस्यों के बीच सहज बातचीत और एक-दूसरे से जुड़ने की संभावना कम होती है। पुराने संसद भवन के कक्षों में एक तरह का अपनापन था, जो सांसदों के बीच बातचीत और विचारों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देता था। उन्होंने नए भवन में सांसदों के बैठने की पंखे जैसी व्यवस्था का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, यहां सदस्यों के बीच एक तरह की दूरी दिखाई देती है। ALSO READ: तमिलनाडु CM विजय के यू-टर्न पर भड़के CJP नेता अभिजीत दीपके, कहा डर लग रहा है तो सुधारो व्यवस्था

 

सेंट्रल हॉल पर क्या बोले थरूर?

चार बार के तिरुवनंतपुरम सांसद थरूर ने नए संसद भवन में सेंट्रल हॉल नहीं होने को भी महत्वपूर्ण कमी बताया। उन्होंने कहा कि पुराने संसद भवन का सेंट्रल हॉल सांसदों के बीच अनौपचारिक बातचीत का अहम स्थान था। उनके मुताबिक, वहां मौजूदा और पूर्व सांसदों के साथ-साथ पर्यवेक्षकों और मीडिया के लोगों के बीच भी अनौपचारिक बातचीत होती थी। इससे अलग-अलग दलों के नेताओं के बीच संबंध और आपसी संवाद मजबूत होता था। थरूर ने कहा कि नए भवन में ऐसे अनौपचारिक संवाद की जगह कम हो गई है।

 

सांसदों की संख्या बढ़ाने पर क्या कहा?

थरूर ने प्रस्तावित लोकसभा विस्तार पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अगर लोकसभा में सांसदों की संख्या बढ़ाकर 850 की जाती है तो भले ही नए भवन में इसके लिए जगह हो, लेकिन इससे सार्थक संसदीय बहस और चर्चा प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में सांसद होने पर सदस्य एक-दूसरे के लिए अजनबी जैसे हो सकते हैं। उन्होंने चीन की संसद जैसी स्थिति का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर सांसद केवल नेता की घोषणाओं पर एक साथ मेज थपथपाने तक सीमित रह जाएं, तो यह संसद के वास्तविक उद्देश्य के अनुरूप नहीं होगा।

 

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2023 में नए संसद भवन का उद्घाटन किया था। यह भवन सरकार के महत्वाकांक्षी ‘सेंट्रल विस्टा कॉम्प्लेक्स’ का हिस्सा है। इसकी परिकल्पना औपनिवेशिक दौर की सरकारी इमारतों की जगह लेने के लिए की गई।