
उत्तर प्रदेेश में महोबा के रैपुरा कला गांव में सड़क की बदहाली को लेकर जेन अल्फा की उठी आवाज अब प्रशासन के कानों तक पहुंच चुकी है। जिस सड़क निर्माण के लिए गांव के छात्रों ने झांसी-मिर्जापुर हाईवे यानी NH-35 तक जाम लगा दिया था। जेन अल्फा के विरोध से यातायात प्रभावित हुआ, जिसके चलते जिलाधिकारी गजल भारद्वाज आज गांव में खुद छात्रों के बीच पहुंच गई। जब डीएम साहिबा छात्रों से मिली तो वातावरण बदला हुआ नजर आया, इस बार न तो नारों की गूंज थी और न पुलिस से टकराव।
महोबा डीएम ने बच्चों को अपनत्व दिखाते हुए उनके मध्य बैठ गई, उनकी बातें सुनीं और उन्हें भरोसा दिलाया कि उनकी सड़क की समस्या का जल्दी ही समाधान कराया जाएगा। गौरतलब है कि रैपुरा कला गांव की क्षतिग्रस्त सड़क लंबे समय से ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। सड़क की हालत खराब होने के कारण छात्रों को विद्यालय आने जाने में परेशानी होती है।
गांव की उपेक्षा से नाराज जेन अल्फा ने बीते रोज अपनी आवाज प्रशासन तक पहुंचाने के लिए झांसी-मिर्जापुर हाईवे को जाम कर दिया था। हाईवे पर यातायात रुकने के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच जमकर विवाद भी हुआ। पुलिस और छात्रों के साथ विवाद का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ। विपक्ष ने इसे लेकर राजनीतिक मुद्दा बनाने लगा है।
इसी कड़ी में महोबा की डीएम गजल भारद्वाज ने मामले की गंभीरता को समझते हुए गांव पहुंचीं। उन्होंने बच्चों और उनके अभिभावकों के साथ बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं। बच्चों ने सड़क की बदहाली से होने वाली परेशानियां डीएम के सामने रखीं। डीएम ने उनकी बातों को ध्यान से सुना और भरोसा दिलाया कि क्षतिग्रस्त सड़क के निर्माण के लिए जल्द कार्रवाई की जाएगी।
छात्रों से इस मुलाकात में सिर्फ सड़क की बात नहीं हुई। डीएम ने बच्चों को अपने जीवन से जुड़ा एक अनुभव भी सुनाया।
उन्होंने बताया कि एक बार वह अपने पिता को लेकर एंबुलेंस से जा रही थीं। रास्ते में हाईवे पर जाम लगा था और एंबुलेंस भी उसी जाम में फंस गई। उस घटना को याद करते हुए उन्होंने बच्चों को समझाया कि अपनी समस्या के लिए आवाज उठाना जरूरी है, लेकिन ऐसा रास्ता नहीं अपनाना चाहिए जिससे किसी दूसरे की जिंदगी खतरे में पड़ जाए या किसी जरूरतमंद को परेशानी उठानी पड़े।
डीएम ने छात्रों से कहा कि उनकी समस्या प्रशासन की जिम्मेदारी है और अपनी बात रखने के लिए हाईवे जाम करना जरूरी नहीं। उन्होंने बच्चों को भरोसा दिलाया कि उनकी मांग को गंभीरता से लिया जा रहा है और सड़क निर्माण के लिए जल्द कदम उठाए जाएंगे।
डीएम और बच्चों के बीच यह मुलाकात इसलिए भी खास रही क्योंकि एक दिन पहले जहां सड़क के मुद्दे पर बच्चे पुलिस के सामने खड़े थे, वहीं अगले दिन जिले की सबसे बड़ी प्रशासनिक अधिकारी उन्हीं बच्चों के बीच बैठकर उनकी बात सुन रही थीं।
इस दौरान पुलिस अधीक्षक समेत जिले के तमाम प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। अब ग्रामीणों और बच्चों को इंतजार उस भरोसे के पूरा होने का है, जो उन्हें डीएम ने दिया है।
हंगामे से शुरू हुई कहानी अब उम्मीद पर आकर ठहरी है। बच्चों ने सड़क के लिए आवाज उठाई है, अब उन्हें इंतजार है कि रैपुरा गांव की बदहाल सड़क कब राहगीरों के पक्की सड़क में बदलती दिखाई देगी।


