
Khyber Pakhtunkhwa Bajaur protests: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) और बलूचिस्तान में जारी भारी जनाक्रोश के बाद अब खैबर पख्तूनख्वा (KPK) में भी पाकिस्तानी सेना और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के खिलाफ बगावत के सुर तेज हो गए हैं। बाजौर समेत राज्य के विभिन्न हिस्सों में सड़कों पर उतरे लोगों ने पाकिस्तानी सेना के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और सैन्य अधिकारियों को 'वर्दी वाले दहशतगर्द' करार दिया।
असीम मुनीर के खिलाफ लगे तीखे नारे पाकिस्तान में हालात दिन-ब-दिन बेकाबू होते जा रहे हैं। सेना के बढ़ते हस्तक्षेप, मानवाधिकार उल्लंघनों और जबरन गुमशुदगी की घटनाओं से त्रस्त आम जनता का गुस्सा अब सड़कों पर खुलकर सामने आ रहा है। खैबर पख्तूनख्वा के बाजौर में हुए एक विशाल प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने सीधे तौर पर पाकिस्तानी सेना के शीर्ष अधिकारियों और सेना प्रमुख (फील्ड मार्शल/जनरल) आसिम मुनीर को निशाने पर लिया है। ALSO READ: पाकिस्तान ने धोखे से हड़पा था बलूचिस्तान, क्यों कभी पाक सेना के आगे नहीं झुके धुरंधर बलोच? जानिए बलोच संघर्ष की पूरी कहानी
सड़कों पर गूंजे तीखे नारे
बाजौर में प्रदर्शन के दौरान आम जनता का गुस्सा इस कदर फूटा कि उन्होंने सेना की वर्दी और अधिकारियों के खिलाफ सीधी बयानबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने चिल्ला-चिल्लाकर नारे लगाए— ये वर्दी वाले दहशतगर्द, ये कैप्टन-कर्नल दहशतगर्द, ये मेजर जनरल दहशतगर्द। प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना है कि सुरक्षा के नाम पर स्थानीय निवासियों का उत्पीड़न किया जा रहा है। ALSO READ: PoK का सच दिखाया तो भड़का पाकिस्तान! 'अल जजीरा' पर कसा शिकंजा, जानिए क्या है PoK की हकीकत
क्यों हो रहा है मुनीर का विरोध?
खैबर पख्तूनख्वा में पश्तून समुदाय और स्थानीय निवासियों द्वारा पाकिस्तानी सेना और आसिम मुनीर का कड़ा विरोध करने के पीछे कई कारण हैं। पाकिस्तानी सेना आतंकवाद के खात्मे के नाम पर खैबर पख्तूनख्वा में लगातार सैन्य ऑपरेशन चलाती है, जिसमें निर्दोष पश्तून नागरिकों, महिलाओं और बच्चों को निशाना बनाया जाता है। बलूचिस्तान की तर्ज पर खैबर पख्तूनख्वा से भी पश्तून युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्रों को सेना द्वारा बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के उठाए जाने और गायब कर दिए जाने के गंभीर आरोप हैं।
संसाधनों का दोहन और स्थानीय लोगों की उपेक्षा
इस प्रांत के प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग तो पूरे पाकिस्तान में किया जाता है, लेकिन स्थानीय लोगों को बुनियादी सुविधाएं, रोजगार और विकास के अवसर नहीं दिए जाते। गौर करने वाली बात यह है कि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी PTI का खैबर पख्तूनख्वा में मजबूत जनाधार है। पाकिस्तान सेना प्रमुख आसिम मुनीर द्वारा इमरान खान और उनके समर्थकों पर की गई सख्त कार्रवाई से भी स्थानीय लोगों में सेना के प्रति गहरा असंतोष और गुस्सा है।
पश्तून अधिकारों के लिए लड़ने वाला संगठन पश्तून तहफुज मूवमेंट (PTM) लंबे समय से सेना की ज्यादतियों, फर्जी मुठभेड़ों और चेकपोस्टों पर होने वाले उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाता रहा है, जिससे आम जनता में अपनी जमीन और सम्मान की रक्षा की भावना मजबूत हुई है।
पीओके और मुजफ्फराबाद में भी बगावत
दूसरी ओर, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के रावलाकोट और मुजफ्फराबाद में भी विरोध प्रदर्शन लगातार जारी हैं। जम्मू-कश्मीर ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेता सरदार अमन खान ने पाकिस्तान सरकार और उसकी सेना पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पाकिस्तान प्रशासन वहां के लोगों के मौलिक अधिकारों का हनन कर रहा है।


