
US President Donald Trump: डॉनल्ड ट्रंप दुनिया के एक सबसे धनी और शक्तिशाली देश अमेरिका के राष्ट्रपति अवश्य हैं, पर बोलचाल और व्यवहार में इतने निर्लज्ज और घटिया हैं, कि सामने वाले का सिर शर्म से भले ही झुक जाए, उन्हें कोई फ़र्क नहीं पड़ता। उनके बड़बोलेपन और तुच्छतापूर्ण व्यवहार के उदाहरणों की कोई कमी नहीं है; पर अब एक ऐसा किस्सा सामने आया है, जो बेमिसाल है।
तुर्की की राजधानी अंकारा में 7 से 8 जुलाई तक चले नाटो सैन्य संगठन वाले देशों का जो शिखर सम्मेलन हुआ, उसके अंत के तुरंत बाद, ट्रंप को जिस आपा-धापी में वहाँ से छिपते-छिपाते भागना पड़ा, अपने विमान बदलने पड़े, उनमें से एक विमान उन्होंने क़तर के शाही अल थानी परिवार से “उपहार” में माँगा था!
शाही परिवार पड़ा धर्मसंकट में
अमेरिकी गुप्तचर सेवा CIA के एक जासूस रह चुके जॉन किरियाकोउ ने, अपने एक पॉडकास्ट में दावा किया है कि उन्हें डॉनाल्ड ट्रंप को कथित तौर पर “उपहार” में मिले नए “प्रेसिडेंशियल एयरक्राफ्ट” बोइंग 747 के पीछे के असली तथ्यों की सीधी जानकारी है। किरियाकोउ का कहना है कि ट्रंप को यह आलीशान विमान मिला नहीं है, उन्होंने इसे क़तर से माँगा था। उनकी माँग ने क़तर के शाही परिवार को वास्तव में बड़े धर्मसंकट में डाल दिया था।
अपने पॉडकास्ट “ब्रीफिंग रूम” के दसवें एपिसोड में, CIA के इस पूर्व एजेंट ने मई 2025 में ही, क़तर के शाही परिवार की ओर से ट्रंप को मिलने वाले इस नए “प्रेसिडेंशियल एयरक्राफ्ट” की पृष्ठभूमि से जुड़ी जानकारी उजागर कर दी थी। उसका कहना है कि फारस की खाड़ी वाले क्षेत्र के छह शाही परिवारों में से पांच के साथ उसके बहुत अच्छे संबंध हैं। उसे भली भाँति मालूम है कि क़तर के शाही परिवार ने ट्रंप को बोइंग 747 कथित “उपहार” में कैसे दिया।
क्या वे बोइंग 747 मुफ़्त में देंगे?
किरियाकोउ के अनुसार, ट्रंप ने क़तर के अल थानी परिवार से खुलकर पूछा था कि क्या वे उन्हें अपना बोइंग 747 मुफ़्त में देंगे? परिवार के एक सदस्य ने किरियाकोउ को बताया कि वे लोग इस मांग से कतई ख़ुश नहीं थे। अरब संस्कृति में, सत्कार के अधिकारी किसी अतिथि के अनुरोध को अस्वीकार करना असभ्य माना जाता है; इसलिए “उनके अनुरोध को ठुकराना तो संभव ही नहीं था।” अतः शाही परिवार ने बाद में घोषणा की कि उसका यह विमान “अमेरिकी जनता के लिए उपहार है”, ताकि यह प्रदर्शित किया जा सके कि वह ट्रम्प को व्यक्तिगत रूप से दिय़ा जा रहा उपहार नहीं है।
हालांकि, खबरों के अनुसार, ट्रम्प ने क़तर के अल थानी परिवार को बताया कि वर्तमान कार्यकाल पूरा हो जाने पर अपना पद छोड़ने के बाद वे इस विमान को “अपने पास” ही रखेंगे। 2029 में जब उनका कार्यकाल पूरा हो जाएगा और वे अपना पद छोड़ देंगे, तो उस के बाद, उन्हें मिला विमान उनके फाउंडेशन — डोनाल्ड जे. ट्रम्प प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी — को सौंप दिया जाएगा और सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए रखा जाएगा।
दस महीनों में रिकॉर्ड-तोड़ बदलाव
राष्ट्रपति ट्रंप के “प्रेसिडेंशियल एयरलिफ़्ट ग्रुप” ने 19 जून को ही जॉइंट बेस एंड्रयूज़ में अल थानी परिवार के विमान की डिलीवरी ले ली। यह विमान बोइंग 747-8I है, पूरी तरह से नया नहीं है, बल्कि नवंबर 2023 तक क़तर के सरकारी बेड़े का हिस्सा रहा है। उसमें आवश्यक बदलाव आदि करने में 10 महीने लगे। यह काम जल्द से जल्द पूरा करने के लिए तीन-शिफ्टों में चौबीसों घंटे काम हुआ। कहा जाता है कि विमान में शुरुआती बदलावों पर ही लगभग 40 करोड़ डॉलर का ख़र्च आया था। ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति हैं। ठीक इस समय — यानी 2026 में — स्वयं भी 5 अरब 50 करोड़ डॉलर के बराबर संपत्तियों के मालिक हैं, पर क़तर के अल थानी परिवार के सामने हाथ पसारने में उन्हें रत्ती भर भी शर्म नहीं आई!
किरियाकोउ ने अपने पॉडकास्ट में अंकारा के नाटो शिखर सम्मेलन के बाद ट्रंप द्वारा विमान बदलने की आपाधापी का भी वर्णन किया है। 8 जुलाई को, ट्रंप पहले तो कैमरों के सामने अपने सरकारी विमान “एयर फ़ोर्स वन” में सवार हुए थे, लेकिन बाद में अमेरिकी सेना के एक दूसरे विमान तक जाने के लिए कैटरिंग ट्रक में छिप गए थे।
CBS न्यूज़ (जो BBC का US पार्टनर नेटवर्क है) के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों को पहले ही पता चल गया था कि ईरान की ओर से ट्रंप के विमान को मिसाइल प्रहार का निशाना बनाए जाने का विश्वसनीय ख़तरा है। किंतु, जॉन किरियाकोउ का मानना है कि राष्ट्रपति की जान को कोई असली या विश्वसनीय खतरा नहीं था। यानी, 8 जुलाई को अंकारा में जो कुछ हुआ वह एक दिखावा अधिक, वास्तविकता कम था।


