इथेनॉल मिश्रित डीजल सुरक्षा परीक्षणों में फेल : फ्लैश प्वाइंट बना बड़ी वजह, क्या अब भी इस्तेमाल करेगी सरकार?

Ethanol  Blended Diesel

Ethanol  Blended Diesel: भारत में हरित ऊर्जा और कार्बन उत्सर्जन घटाने के अभियानों के बीच एक बड़ी तकनीकी चुनौती सामने आई है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMCs), वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं और वाहन निर्माताओं द्वारा किए गए संयुक्त मूल्यांकन में इथेनॉल-मिश्रित डीजल (Ethanol-Blended Diesel) सुरक्षा मापदंडों पर खरा उतरने में विफल रहा है।

 

संसद में जानकारी देते हुए केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने स्पष्ट किया कि जब तक इस गंभीर तकनीकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं खोज लिया जाता, तब तक इथेनॉल-मिश्रित डीजल के कमर्शियल या व्यापक इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी जा सकती।  ALSO READ: ATF में इथेनॉल मिलाएगी सरकार! केजरीवाल के दावे पर क्या बोले उड्डयन मंत्री किंजरापु?

सुरक्षा परीक्षण में क्यों फेल हुआ इथेनॉल डीजल?

वैज्ञानिक परीक्षणों और लैब असेसमेंट के दौरान पाया गया कि डीजल में इथेनॉल मिलाने से ईंधन का फ्लैश प्वाइंट (Flash Point) अत्यधिक कम हो जाता है।

 

क्या होता है फ्लैश प्वाइंट? फ्लैश प्वाइंट वह न्यूनतम तापमान होता है जिस पर किसी तरल ईंधन का वाष्प (Vapor) हवा के संपर्क में आकर आग पकड़ सकता है।

 

सुरक्षा जोखिम : डीजल का प्राकृतिक फ्लैश प्वाइंट अपेक्षाकृत अधिक (सुरक्षित) होता है, जिससे इसे ढोने, स्टोर करने और वाहनों में उपयोग करने के दौरान आग लगने का जोखिम न्यूनतम रहता है। लेकिन इथेनॉल मिलते ही इसका फ्लैश प्वाइंट अचानक गिर जाता है, जिससे परिवहन, ईंधन भरने और वाहन संचालन के दौरान आग लगने या विस्फोट होने का भारी सुरक्षा खतरा पैदा हो जाता है। ALSO READ: दूसरे देशों में इथेनॉल की वजह से क्यों नहीं होते वाहन खराब?

आइसोबुटानॉल और E20 से अधिक सम्मिश्रण पर स्थिति

संसद में दिए गए बयान के अनुसार, सरकार ने अन्य वैकल्पिक और उच्च-प्रतिशत सम्मिश्रणों पर भी अपना रुख स्पष्ट किया है:

  • आइसोबुटानॉल (Isobutanol) सम्मिश्रण : डीजल में आइसोबुटानॉल मिलाने के प्रस्ताव पर फिलहाल कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
  • 20% से अधिक इथेनॉल सम्मिश्रण (E20+) : पेट्रोल में इथेनॉल के मिश्रण को 20% से आगे बढ़ाने को लेकर भी फिलहाल कोई नई नीति या निर्णय नहीं लिया गया है। सरकार का प्राथमिक ध्यान 20% इथेनॉल सम्मिश्रण (E20 Petrol) के लक्ष्य को सुरक्षित रूप से बनाए रखने पर है।

घरेलू इथेनॉल उत्पादन और भविष्य की योजनाएं

सुरक्षा संबंधी इन तकनीकी चुनौतियों के बावजूद, सरकार देश में इथेनॉल के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। पीटीआई (PTI) की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025-26 के लिए तेल कंपनियों ने 10.485 अरब लीटर इथेनॉल का आवंटन किया है।

 

इथेनॉल उत्पादन क्षमता और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए सरकार निम्नलिखित कदम उठा रही है:

  • ब्याज सब्सिडी योजना (Interest Subvention) : नई डिस्टिलरी स्थापित करने और मौजूदा इकाइयों के विस्तार के लिए वित्तीय सहायता।
  • डिस्टिलरी अपग्रेडेशन : आधुनिक तकनीक के जरिए एथेनॉल निष्कर्षण क्षमता बढ़ाना।
  • दीर्घकालिक खरीद समझौते (Long-term Offtake Agreements) : इथेनॉल उत्पादकों को सुनिश्चित बाजार और मूल्य स्थिरता प्रदान करना।

एलपीजी (LPG) के विकल्प के रूप में इथेनॉल

भारत वर्तमान में अपनी एलपीजी (LPG) जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है। इस आयात निर्भरता को कम करने के लिए सरकार अब इथेनॉल को खाना पकाने के लिए स्वच्छ और वैकल्पिक ईंधन (Clean Cooking Fuel) के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर भी गंभीरता से विचार कर रही है।