परिसीमन विधेयक पर संसद में सस्पेंस, क्या अगले 10 दिनों में अमित शाह चलने वाले हैं मास्टर स्ट्रोक?

Delimitation Bill Home Minister Amit Shah

Delimitation Bill Home Minister Amit Shah: संसद के मानसून सत्र के समापन चरण में गृहमंत्री अमित शाह की प्रशासनिक व राजनीतिक गतिविधियां और कांग्रेस द्वारा अपने सांसदों को जारी 11, 12 और 13 अगस्त का तीन-दिवसीय व्हिप विधायी हलचलों के गहराने का संकेत दे रहे हैं। चर्चा इस बात की है कि क्या केंद्र सरकार परिसीमन प्रक्रिया और महिला आरक्षण के क्रियान्वयन से जुड़े प्रावधानों पर सदन के पटल पर कोई नया विधायी ढांचा पेश कर सकती है या फिर यह रणनीतिक मोर्चेबंदी का हिस्सा है।

1. क्या  है परिसीमन विधेयक 2026 और संसदीय सीटों का नया पुनर्संतुलन

संसद में पेश परिसीमन विधेयक 2026 (Delimitation Bill, 2026) और 131वें संविधान संशोधन विधेयक का मुख्य उद्देश्य देश में लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्गठन करना है।

  • सीटों की संख्या में संभावित वृद्धि : नए प्रस्तावों के तहत लोकसभा की कुल सदस्य संख्या को 543 से बढ़ाकर 850 तक करने का खाका तैयार किया गया है।
  • आबादी के अनुपात में प्रतिनिधित्व : परिसीमन का मूल संवैधानिक सिद्धांत यह है कि प्रत्येक राज्य को उसकी जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व मिले।
  • उत्तरी बनाम दक्षिणी राज्यों का संतुलन : उत्तर भारतीय राज्यों में जनसंख्या वृद्धि के कारण संसदीय सीटों में अधिक वृद्धि का अनुमान है। हालांकि, गृह मंत्री अमित शाह ने पहले भी स्पष्ट किया है कि परिसीमन प्रक्रिया के दौरान दक्षिणी राज्यों (जैसे तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक) का आनुपातिक प्रतिनिधित्व कम नहीं होने दिया जाएगा और उनकी सीटें भी आनुपातिक रूप से बढ़ेंगी।

2. महिला आरक्षण कानून (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) और परिसीमन का संवैधानिक पेच

2023 में पारित 106वें संविधान संशोधन अधिनियम (महिला आरक्षण कानून) के अनुसार, संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण तभी लागू होगा जब जनगणना और उसके बाद परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होगी।

  • जंतर-मंतर पर महिला संगठनों का विरोध: 'नेशनल कोएलिशन फॉर वीमेंस रिजर्वेशन' सहित विभिन्न नागरिक समूहों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर मांग की है कि महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन की पूर्व-शर्त से अलग किया जाए ताकि इसे बिना किसी प्रक्रियात्मक देरी के तत्काल प्रभाव से लागू किया जा सके।
  • संसदीय सर्वसम्मति की कोशिश : संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बीच हुई वार्ता का मुख्य विषय परिसीमन प्रक्रिया के समय और महिला आरक्षण के त्वरित क्रियान्वयन पर राजनीतिक सहमति बनाना माना जा रहा है।

3. अमित शाह की पर्दे के पीछे की बिसात : ओम बिरला से मुलाकात और मुंबई दौरा

संसद में जारी गहमागहमी के बीच गृह मंत्री की हालिया व्यस्तता को तीन प्रमुख रणनीतिक बिंदुओं के संदर्भ में देखा जा रहा है:

  1. संसदीय कार्यप्रणाली और विधायी एजेंडा : लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के साथ अमित शाह की लगभग एक घंटे चली बैठक में आगामी दिनों में सदन में पेश होने वाले संभावित विधेयकों, चर्चा के समय और सदन के संचालन के नियमों पर विचार-विमर्श की संभावना है।
  2. सहयोगियों के साथ क्षेत्रीय समन्वय : मुंबई यात्रा के दौरान राजनीतिक बैठकों का उद्देश्य महाराष्ट्र में एनडीए के सहयोगियों (शिवसेना शिंदे गुट, एनसीपी) को परिसीमन के बाद बनने वाले नए राज्य स्तरीय व केंद्रीय निर्वाचन क्षेत्रों के गणित पर आश्वस्त करना है।
  3. विपक्षी मोर्चेबंदी का जवाब : तमिलनाडु में डीएमके और महाराष्ट्र में विपक्षी महाविकास अघाड़ी (MVA) परिसीमन को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। सरकार की कोशिश है कि किसी भी विधेयक को पारित कराने से पहले एनडीए के भीतर पूर्ण एकता रहे।

4. कांग्रेस का 3-दिवसीय व्हिप और संसद के अंतिम पड़ाव की स्थिति

कांग्रेस पार्टी द्वारा 11, 12 और 13 अगस्त को अपने सभी लोकसभा और राज्यसभा सांसदों को सदन में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का निर्देश देना इस बात का प्रमाण है कि विपक्ष सरकार की ओर से किसी भी अंतिम समय के 'सरप्राइज बिल' (Surprise Bill) या महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधन के लिए तैयार रहना चाहता है।

Delimitation Bill

क्या सरकार सत्र के अंतिम तीन दिनों में परिसीमन आयोग के गठन या जनगणना की समय-सीमा को लेकर कोई बड़ी घोषणा करेगी या फिर संसद हंगामे के बीच स्थगित होगी? इसका सटीक उत्तर अगले 72 घंटों की विधायी कार्रवाइयों से ही स्पष्ट होगा।