
NEET paper leak CBI investigation: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG के पेपर लीक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, चौंकाने वाले सच सामने आ रहे हैं। अदालत में दाखिल की गई सीबीआई की चार्जशीट और स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार, पेपर चोरी करने के लिए किसी डिजिटल हैकिंग या पारंपरिक तरीके का इस्तेमाल नहीं हुआ था, बल्कि बेहद सुनियोजित और लीक से हटकर अपनाए गए पैंतरों से प्रश्नपत्र के कंटेंट को बाहर भेजा गया था।
आइए जानते हैं कि सीबीआई की जांच में अब तक क्या-क्या बड़े खुलासे हुए हैं और इस पूरे रैकेट को कैसे अंजाम दिया गया। अब तक क्या-क्या पता चला है? ALSO READ: NEET पेपर लीक में बड़ा खुलासा! CBI का दावा- NTA के अधिकारियों ने ही लीक किए थे प्रश्नपत्र
1. विषय विशेषज्ञों का इस्तेमाल और NTA दफ्तर से डेटा की चोरी
सीबीआई की चार्जशीट के मुताबिक, इस साजिश में कुछ विषय विशेषज्ञों और सॉल्वर गिरोह का सीधा हाथ था।
- पर्चियों और याददाश्त का खेल : प्रश्नपत्र तैयार करने या उनकी समीक्षा प्रक्रिया से जुड़े संदिग्धों ने मोबाइल या इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के बजाय छोटे कागज के टुकड़ों (पर्चियों) का इस्तेमाल किया।
- प्रश्नों के मुख्य कीवर्ड्स और विकल्पों को कोड वर्ड में लिखकर या याद रखकर बाहर पहुंचाया गया, ताकि सुरक्षा जांच और सीसीटीवी कैमरों की नजर से बचा जा सके। ALSO READ: NEET विवाद के बीच प्रह्लाद जोशी बने नए शिक्षा मंत्री, पदभार संभालते ही कही बड़ी बात
2. ट्रंक और ट्रंक बॉक्स की डिजिटल लॉकिंग से छेड़छाड़
- हजारीबाग (झारखंड) और पटना के केंद्रों से जुड़े तार खंगालने पर सीबीआई ने पाया कि परीक्षा से कुछ घंटे पहले प्रश्नपत्रों के बक्सों (Trunk Boxes) के साथ सुनियोजित ढंग से छेड़छाड़ की गई थी।
- बक्सों की सील को इस तरह से निकाला गया कि बाहर से देखने पर डिब्बा पूरी तरह सुरक्षित लगे।
- प्रश्नपत्रों की तस्वीरें निकालकर उन्हें तुरंत सॉल्वर गैंग के पास 'सेफ हाउस' भेजा गया।
3. 'सेफ हाउस' में सॉल्वर गैंग की तैनाती
- पटना और आसपास के इलाकों में किराए पर लिए गए हॉस्टल/रिजॉर्ट्स में एमबीबीएस छात्रों और विषय विशेषज्ञों की टीम (सॉल्वर गैंग) को बैठाया गया था।
- जैसे ही लीक हुए सवालों के इनपुट पहुंचे, महज 2 से 3 घंटे के भीतर पूरे पेपर को हल कर लिया गया।
- जिन छात्रों ने पैसे दिए थे, उन्हें रातभर उत्तर रटाए गए और सुबह सीधे परीक्षा केंद्रों पर भेजा गया।
4. वित्तीय लेनदेन और शेल खातों का जाल
- सीबीआई ने जांच में पाया कि प्रत्येक अभ्यर्थी से ₹30 लाख से ₹50 लाख तक की रकम तय की गई थी।
- रकम का बड़ा हिस्सा नकद और हवाला नेटवर्क के माध्यम से ट्रांसफर किया गया।
- सीबीआई ने इस मामले में मास्टरमाइंड्स, ट्रंक से छेड़छाड़ करने वाले बिचौलियों और सॉल्वरों समेत कई मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है।
क्या कहा शीर्ष अदालत ने?
सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच की प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा करते हुए स्पष्ट किया है कि भविष्य में ऐसी परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के ढांचे और परीक्षा संचालन प्रक्रिया में सुधार के लिए बनाई गई उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों को सख्ती से लागू किया जाए।

