
नीट पेपर लीक मामले में सीबीआई की जांच में खुलासा हु्आ है कि पेपर सेट करने वाले राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NTA) के अधिकारियों ने ही पेपर लीक किए थे। CBI का आरोप है कि आरोपियों का मकसद पैसे कमाना और कुछ खास कैंडिडेट्स की मदद करना था। ALSO READ: Mohan Bhagwat : Gen Z पर आंख मूंदकर भरोसा करूंगा, छात्रों के प्रदर्शन को राष्ट्रविरोधी न बताएं, RSS प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान
CBI ने 13 आरोपियों को नामजद किया है जिनमें NTA के तीन विषय विशेषज्ञ भी शामिल हैं। जांच एजेंसी ने दावा किया कि यह कोई साधारण पेपर लीक नहीं, बल्कि कई राज्यों में फैला सुनियोजित नेटवर्क था। इसमें परीक्षा से जुड़े लोगों के साथ ही कोचिंग संचालक, बिचौलिए और दलाल शामिल थे।
कई महीने पहले शुरू हो गया था खेल
जांच एजेंसी के अनुसार, पेपर लीक का पूरा खेल परीक्षा से कई महीने पहले ही शुरू हो गया था। कुछ लोगों ने पहले से योजना बनाकर ऐसा नेटवर्क तैयार किया जिसके जरिए गोपनीय प्रश्नपत्र बाहर तक पहुंचाए गए। यह एक संगठित आपराधिक साजिश थी जिसमें अलग-अलग राज्यों के कई लोग जुड़े हुए थे। ALSO READ: Meta पर 567 मिलियन डॉलर का जुर्माना, बच्चों की मानसिक सेहत पर कोर्ट का बड़ा फैसला
NTA के 3 विषय विशेषज्ञों को बनाया आरोपी
CBI ने अपनी चार्जशीट में NTA द्वारा नियुक्त तीन विषय विशेषज्ञों को भी आरोपी बनाया है। इनमें बॉटनी, केमिस्ट्री और फिजिक्स के विशेषज्ञ शामिल हैं। इन विशेषज्ञों ने अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग करते हुए गोपनीय प्रश्नपत्रों तक पहुंच बनाई।
कैसे लीक हुए पेपर?
जांच में पता चला कि लीक हुए प्रश्नपत्र WhatsApp, Telegram पर PDF फाइल और फोटो के जरिए शेयर किए गए। लीक हुए प्रश्न पहले NTA के विषय विशेषज्ञों से निजी ऑपरेटरों और बिचौलियों तक पहुंचे। इसके बाद इन्हें अलग-अलग माध्यमों से अभ्यर्थियों तक पहुंचाया गया। जब्त किए गए मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच में कई अहम डिजिटल सबूत मिले। जांच के दौरान मोबाइल में NEET 2026 नाम का एक WhatsApp ग्रुप भी मिला।

