क्या हम फफूंद के खतरे को अब तक कम आंकते रहे हैं?

Mold at house

स्तुति लाल

दीवारों के काले धब्बे, बाथरूम की सीलन और घर की बासी गंध, ये सिर्फ सफाई की समस्याएं हैं या सेहत के लिए बड़ा खतरा? एक नए अध्ययन ने चेतावनी दी है कि फफूंद से जुड़ी बीमारियां डॉक्टरों के अनुमान से ज्यादा जानलेवा हो सकती हैं। ALSO READ: फ्रांस में पहली बार दिखा आग का बादल आखिर है क्या?

 

यूएस सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के एक ताजा और अपनी तरह के पहले अध्ययन में पाया गया है कि इनवेसिव मोल्ड डिजीज डॉक्टरों के अनुमान से कहीं अधिक जानलेवा है।

 

सीडीसी से प्रकाशित यह नई रिसर्च रिपोर्ट इनवेसिव मोल्ड के संक्रमण के व्यापक स्वरूप को समझने की पहली बड़ी कोशिशों में से एक है। इस रिसर्च रिपोर्ट के प्रमुख लेखक डॉ जेरेमी गोल्ड ने कहा, “यह पहली बार है जब हमारे पास इस तरह का कोई अनुमान है।” उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में यह समस्या और गंभीर हो सकती है। रिसर्चरों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से बढ़ने वाले तूफान, बाढ़ और दूसरी प्राकृतिक आपदाओं के बाद फफूंद के संपर्क में आने का खतरा बार-बार देखा गया है। ALSO READ: अमेरिका-चीन के बीच तनाव, अमेरिका ने लगाया चीनी रोबोट पर प्रतिबंध
 

क्या है इनवेसिव मोल्ड डिजीज?

इनवेसिव मोल्ड डिजीज एक गंभीर फंगल (फफूंद) संक्रमणहै। हमारे आसपास हवा, मिट्टी और धूल में फफूंद (मोल्ड) के बहुत छोटे-छोटे कण होते हैं, जो दिखाई भी नहीं देते। सामान्य तौर पर स्वस्थ व्यक्ति का शरीर इन्हें रोक देता है। लेकिन जिन लोगों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) बहुत कम होती है, जैसे जिनका कैंसर का इलाज चल रहा हो, अंग प्रत्यारोपण हुआ हो, या कुछ गंभीर बीमारियां हों, तो उनमें यह फफूंद शरीर के अंदर जाकर बढ़ सकती है। जब यह फेफड़ों, साइनस, दिमाग या शरीर के अन्य अंगों में फैल जाती है, तो इसे इनवेसिव मोल्ड डिजीज कहा जाता है।

 

इस नई रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के अटलांटा क्षेत्र के अस्पतालों में पांच वर्षों में लगभग 450 मामले दर्ज किए गए और हर तीन में से एक मरीज की मौत अस्पताल में हुई।  विशेषज्ञों का मानना है कि ये संक्रमण पहले की तुलना में कहीं अधिक व्यापक और खतरनाक हो सकते हैं।

 

क्या हैं इस बीमारी के लक्षण और किसे है ज्यादा खतरा?

सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल के मुताबिक, फफूंद का संक्रमण हर किसी के लिए बड़ा खतरा नहीं होता, लेकिन कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को इससे ज्यादा सावधान रहने की जरूरत होती है। अंग प्रत्यारोपण, स्टेम सेल ट्रांसप्लांट, कैंसर, कीमोथेरेपी और कुछ विशेष दवाएं शरीर की इम्यूनिटी को कमजोर कर सकती हैं, जिससे संक्रमण का जोखिम बढ़ जाता है। अगर ऐसे लोग फफूंद से प्रभावित वातावरण के संपर्क में आते हैं, तो उनके बीमार पड़ने की संभावना अधिक हो सकती है।

 

मोल्ड संक्रमण के लक्षण सभी लोगों में एक जैसे नहीं होते। इसकी गंभीरता व्यक्ति की पहले से मौजूद स्वास्थ्यसमस्याओं, फफूंद के संपर्क के तरीके, प्रभावित अंग और फफूंद की मात्रा पर निर्भर करती है। इसके संपर्क में आने के आम लक्षणों में लगातार खांसी, आंखों में जलन, सिरदर्द, नाक और साइनस में सूजन या जकड़न, त्वचा पर चकत्ते, गले में खराश और धुंधली दृष्टि शामिल हैं।

 

नेशनल टॉक्सिकोलॉजी प्रोग्राम के अध्ययन से पता चला है कि मोल्ड केवल सांस की बीमारी ही नहीं देता। इसके महीन कण नाक के जरिए सीधे दिमाग की नसों तक पहुंचकर ब्रेन फॉग, याददाश्त में कमी, तनाव और गंभीर एंजायटी (घबराहट) पैदा कर सकते हैं। ALSO READ: नेपाल: बालेन शाह के खिलाफ जेन-जी में क्यों है उबाल

 

कैसे पनपती है फफूंद?

घरों में फफूंद का बढ़ना एक छिपी हुई समस्या है, जो आमतौर पर सीलन भरे इलाकों और कम दिखाई देने वाली जगहों में पनपती है। इंडियन हेल्थ सर्विस के पर्यावरण स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक फफूंद प्रजनन की प्रक्रिया के दौरान बेहद छोटे बीजाणु (स्पोर्स) बनाती है, जो आसानी से हवा में फैल जाते हैं। पर्याप्त नमी मिलने पर यह स्पोर्स तेजी से बढ़ने लगते हैं और फफूंद का रूप ले लेते हैं। घरों में सीलन, पानी का रिसाव या ज्यादा नमी होने पर फफूंद आसानी से फैल सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, फफूंद को पूरी तरह खत्म करना लगभग असंभव है, लेकिन नमी पर नियंत्रण रखकर इसके फैलाव को काफी हद तक रोका जा सकता है।

 

घरों में फफूंद के बढ़ने के कई आम कारण हो सकते हैं जैसे टपकती हुई छत, टूटी हुई पानी की पाइपें, लंबे समय तक गर्म पानी से नहाना या खाना पकाने के दौरान उबलता पानी।  बिना वेंटिलेशन वाले बाथरूम और कम हवा आने-जाने वाली बंद जगहों में नमी आसानी से जमा हो जाती है, जिससे फफूंद के पनपने का खतरा बढ़ जाता है। यह नमी ठंडी सतहों पर जमकर सीलन का कारण बनती है।

 

घरों में इस्तेमाल होने वाली कई सामान्य निर्माण सामग्री, जैसे ड्राईवॉल, लकड़ी, वॉलपेपर, कार्पेट और धूल, फफूंद के लिए भोजन का काम करती हैं। बाढ़ और तूफान के बाद बढ़ने वाली सीलन और फफूंद इसी कारण स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए चिंता का विषय बन जाती है।

 

कैसे करें बचाव?

सीडीसी के मुताबिक घर में फफूंद को पनपने से रोकने के लिए कई सावधानियां अपनाई जा सकती हैं।  उदाहरण के तौर पर, गीले कपड़ों को बंद कमरों के भीतर नहीं सुखाना चाहिए। खाना बनाते समय या पानी उबालते समय घर में पर्याप्त वेंटिलेशन बनाए रखना जरूरी है ताकि भाप और नमी बाहर निकल सके। यदि घर में अत्यधिक नमी या भाप जमा हो रही हो, तो एग्जॉस्ट फैन और डीह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं, बाढ़ के बाद घर की अच्छी तरह सफाई और उसे पूरी तरह सुखाना भी बेहद जरूरी है।

 

फफूंद का यह अनदेखा खतरा ना सिर्फ हमारे स्वास्थ्य बल्कि हमारे घरों की संरचना के लिए हानिकारक है। इसलिए नियमित रूप से घरों की सफाई और फफूंद को रोकना जरुरी है। इसके संपर्क में आने के बाद स्वास्थ्य से जुड़ी दिक्कत होने लगे, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।