
दिल्ली सरकार ने अपनी नई Electric Vehicle (EV) Policy 2.0 (2026-2030) को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दे दी है। यह नीति 1 जुलाई 2026 से लागू हो रही है। सोशल मीडिया और खबरों में 'पेट्रोल बाइक बैन' को लेकर कई तरह की अफवाहें चल रही हैं। आइए सीधा फैक्ट-चेक करते हैं कि असलियत क्या है।
Fact Check: क्या है नया नियम और कब से लागू होगा?
इंटरनेट पर चल रहे दावों और सरकार के आधिकारिक नोटिफिकेशन के बीच का सच नीचे दी गई तालिका से समझिए:
| अफवाह (Myth) | सच (Fact) | लागू होने की तारीख |
|---|---|---|
| दिल्ली में पुरानी पेट्रोल बाइक चलाना तुरंत बंद हो जाएगा। | गलत। यह नियम सिर्फ नए वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर लागू होगा। आपकी मौजूदा बाइक सुरक्षित है। | कोई बैन नहीं (पुरानी गाड़ियां वैध रहेंगी) |
| अब दिल्ली में कभी पेट्रोल-सीएनजी ऑटो नहीं मिलेंगे। | सच (सिर्फ नए रजिस्ट्रेशन के लिए)। नए पेट्रोल/CNG थ्री-व्हीलर्स का रजिस्ट्रेशन पूरी तरह बंद होगा। | 1 जनवरी, 2027 |
| दिल्ली में नई पेट्रोल बाइक और स्कूटर की बिक्री पर पूरी तरह रोक। | सच। इस तारीख के बाद दिल्ली में सिर्फ इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स का ही नया रजिस्ट्रेशन (RTO) होगा। | 1 अप्रैल, 2028 |
दिल्ली कैबिनेट (मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में) और परिवहन विभाग द्वारा साझा की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार:

- पुरानी गाड़ियों का क्या होगा?: आपके पास जो पेट्रोल बाइक या स्कूटर पहले से मौजूद है, उसे आप उसकी पूरी वैध लाइफ (15 साल) तक दिल्ली की सड़कों पर कानूनी रूप से चला सकते हैं। यह बैन सिर्फ 1 अप्रैल 2028 या उसके बाद खरीदी जाने वाली नई गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन पर लागू है।
- हाइब्रिड कारों को झटका: नई नीति में स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड (Strong Hybrid) कारों को टैक्स में छूट देने का प्रस्ताव खारिज कर दिया गया है। सरकार का पूरा ध्यान सिर्फ प्योर (Pure) इलेक्ट्रिक वाहनों पर है।
- बड़ा बजट और सब्सिडी: दिल्ली सरकार इस बदलाव के लिए 15,000 करोड़ खर्च कर रही है। नीति के पहले साल में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर खरीदने पर 30,000 तक की सीधी सब्सिडी और रोड टैक्स/रजिस्ट्रेशन फीस में 100% की छूट मिलेगी।
नोट: यदि आप अपनी पुरानी BS-IV या उससे पुरानी पेट्रोल बाइक को स्क्रैप (Scrap) करते हैं, तो सरकार आपको 10,000 का अतिरिक्त स्क्रैपेज इंसेंटिव (Incentive) भी देगी।
क्या आप अगले दो सालों में दिल्ली में नई बाइक खरीदने की योजना बना रहे हैं, या इस नीति को लेकर आपके मन में कोई और उलझन है?

