
ईरान और इजराइल के बीच संघर्ष विराम (सीजफायर) को लेकर एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। क्षेत्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि इजराइल सीजफायर को ऐसी स्थिति के रूप में देखता है, जहां उसके सैनिकों पर हमला न हो, लेकिन वह कब्जे वाले इलाकों पर अपना नियंत्रण बनाए रखे।
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विश्लेषकों के अनुसार, यह नीति गाजा, लेबनान और सीरिया में देखने को मिली है। गाजा में सैन्य कार्रवाई के बाद इजराइल ने सुरक्षा क्षेत्रों (Security Zones) की अवधारणा को आगे बढ़ाया, जबकि लेबनान और दक्षिणी सीरिया के कुछ हिस्सों में भी वह इसी रणनीति का पालन कर रहा है।
रिपोर्टों के मुताबिक, इजराइल लेबनान में कुछ इलाकों को पूरी तरह खाली क्षेत्र के रूप में बनाए रखना चाहता है। इजराइली नीति-निर्माताओं को आशंका है कि यदि लेबनान में कब्जे वाले क्षेत्रों से पीछे हटना पड़ा तो सीरिया में भी ऐसा ही दबाव बन सकता है, जिसे वर्तमान सरकार स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है।
इस बीच, ईरान और अमेरिका के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) में सभी मोर्चों पर सैन्य गतिविधियों को तत्काल और स्थायी रूप से रोकने की बात कही गई थी। समझौते के तहत दोनों देशों ने एक-दूसरे के खिलाफ युद्ध या सैन्य कार्रवाई शुरू नहीं करने की प्रतिबद्धता जताई थी।
समझौते में यह भी प्रावधान था कि अमेरिका ईरानी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर राहत देने के लिए आवश्यक छूट प्रदान करेगा। साथ ही ईरान की जमी हुई संपत्तियों और फंड के उपयोग को लेकर भी दोनों पक्ष बातचीत के जरिए प्रक्रिया तय करेंगे।
हालांकि, ईरानी सेना ने दावा किया है कि इजराइल ने समझौते के पहले अनुच्छेद यानी संघर्ष विराम का उल्लंघन किया है। इसके जवाब में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जुड़े अपने समुद्री क्षेत्र में प्रतिबंधात्मक कदम उठाने की घोषणा की है।
जानकारों का कहना है कि ईरान ने पूरी तरह से जलडमरूमध्य बंद नहीं किया है, क्योंकि जहाज अब भी ओमान के क्षेत्रीय जलमार्ग से गुजर रहे हैं। इसके बावजूद इस कदम को वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान इस कदम के जरिए अमेरिका को यह संदेश देना चाहता है कि उसके पास अभी भी रणनीतिक दबाव बनाने की क्षमता मौजूद है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है और इसके संचालन पर किसी भी प्रकार का असर वैश्विक बाजारों को प्रभावित कर सकता है। Edited by : Sudhir Sharma

