Satya Niketan building collapse : दिल्ली में 5 मंजिला इमारत भरभराकर गिरी, 7 मौतें, हाईकोर्ट ने पूछा- किसकी थी जिम्मेदारी?

Satya Niketan building collapse : दिल्ली में 5 मंजिला इमारत भरभराकर गिरी, 7 मौतें, हाईकोर्ट ने पूछा- किसकी थी जिम्मेदारी?

delhi building collapse

दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना को दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया। इस हादसे में 7 लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए हैं। पुलिस ने बताया कि हादसे में सात लोगों की मौत हुई है। कोर्ट ने कहा कि इस हादसे की जिम्मेदारी केवल इमारत मालिकों तक सीमित नहीं हो सकती, बल्कि दिल्ली नगर निगम (MCD) और दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) की भूमिका पर भी सवाल उठते हैं।

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सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे ने राजधानी में इमारतों की सुरक्षा, अवैध या असुरक्षित निर्माण और छात्रों के लिए सुरक्षित आवास की व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए अधिकारियों को राहत और बचाव अभियान तेज करने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने कहा कि मलबे में अभी भी कोई व्यक्ति फंसा हो सकता है, इसलिए संभावित लोगों को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाने चाहिए। हाईकोर्ट ने कहा कि इस त्रासदी की जिम्मेदारी सिर्फ उस इमारत के मालिकों की नहीं है जो ढह गई। अदालत ने MCD और DU की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाया।  कोर्ट के मुताबिक, दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले दूसरे शहरों से आने वाले कई छात्र निजी पेइंग गेस्ट (PG) सुविधाओं पर निर्भर रहते हैं।

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अदालत ने कहा कि ऐसे छात्रों के लिए पर्याप्त आवास उपलब्ध कराने में व्यवस्था की ओर से कमी रही है।

 दिल्ली हाईकोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बचाव अभियान में तेजी लाई जाए और मलबे के नीचे किसी व्यक्ति के फंसे होने की आशंका को देखते हुए पूरी गंभीरता से अभियान चलाया जाए। अदालत की टिप्पणी के बाद अब मामले में सिर्फ बिल्डिंग मालिकों की जिम्मेदारी ही नहीं, बल्कि MCD की निगरानी व्यवस्था और DU की छात्र आवास व्यवस्था भी जांच के दायरे में आ गई है।

 

 

एनडीआरएफ ने कहा- बचाव अभियान अभी भी जारी 

एनडीआरएफ  ने सोमवार को बताया कि दक्षिणी दिल्ली के सत्य निकेतन में एक दिन पहले इमारत ढहने की घटना के बाद बचाव एजेंसियों ने अब तक मलबे से 12 लोगों को बाहर निकाला है, जबकि मलबे के नीचे फंसे लोगों की सटीक संख्या का अभी पता नहीं चल पाया है। यह बचाव अभियान सोमवार को भी दिनभर जारी रहने की उम्मीद है।

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एनडीआरएफ के महानिरीक्षक (आईजी) नरेंद्र बुंदेला ने कहा कि केंद्रीय आपदा मोचन बल के पास मलबे के नीचे फंसे लोगों की संख्या को लेकर 'कोई निश्चित आंकड़ा' नहीं है। उन्होंने बताया कि एनडीआरएफ घटनास्थल पर लोगों के जिंदा होने के संकेतों की तलाश के लिए कटर, हाइड्रोलिक जैक और प्रशिक्षित श्वान दलों का इस्तेमाल कर रहा है। रविवार से ही एनडीआरएफ की दो तकनीकी टीम घटनास्थल पर तैनात हैं।