नितिन गडकरी का संन्यास वाला बयान संगठन के बाद सरकार में पीढ़ी परिवर्तन का संकेत?

नितिन गडकरी का संन्यास वाला बयान संगठन के बाद सरकार में पीढ़ी परिवर्तन का संकेत?

Nitin Gadkari

दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी और जेन-जी के बड़े विरोध प्रदर्शन के बाद पहली बार जिस तरह से मोदी सरकार बैकफुट पर दिखाई दे रही है, उससे अब मोदी सरकार में बड़े बदलाव की अटकलें लगाई जा रही है।  संसद से मानसून सत्र के बाद अब कभी मोदी कैबिनेट का विस्तार हो सकता है।

सियासी गलियारों में इस बात की अटकलें लगाई जा रही है कि मोदी कैबिनेट के इस विस्तार में कई सीनियर मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता  है। इन अटकलों को मंगलवार को उस वक्त और हवा मिल गई जब मोदी कैबिनेट में शामिल सीनियर मंत्री नितिन गडकरी ने इशारों ही इशारों  में राजनीति  से संन्यास के संकेत दे दिए है। हलांकि नितिन गडकरी के बयान के बाद जिस तरह नागपुर से लेकर दिल्ली तक सियासी हलचल दिखाई दी उसके बाद गडकरी के दफ्तर से सफाई भी आई।
 
पहले बयान, फिर सफाई- रविवार को नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि वे तीन दशकों से ज्यादा समय से सक्रिय सार्वजनिक जीवन में हैं और अपने राजनीतिक सफ़र के दौरान उन्होंने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं, कई जिम्मेदारियां निभाई हैं और कई सम्मान हासिल किए हैं। लेकिन अब मैं ज्यादा काम नहीं कर सकता. नई पीढ़ी को काम करने का मौका मिलना चाहिए।
 
गडकरी के इस बयान को उनके राजनीति के संन्यास के नजरिए से देखा जाने लगा और इस पर कई तरह की प्रतिक्रिया आने लगी। इसके बाद गडकरी के दफ्तर से बयान पर स्पष्टीकरण आया कि
उनकी इस टिप्पणी का गलत मतलब निकाला गया कि युवा पीढ़ी को ज्यादा जिम्मेदारी दी जानी चाहिए।  उनकी बात साफ तौर पर ट्रस्ट के कामकाज और भविष्य के नेतृत्व से जुड़ी थी। हालांकि, कुछ टेलीविजन चैनल इस बयान को राजनीतिक टिप्पणी के तौर पर पेश कर रहे हैं और इसे इसके असली संदर्भ से अलग दिखा रहे हैं।
 
भाजपा में पीढी परिवर्तन का दौर- भाजपा अब पीढी परिवर्त के दौर से गुजर रही है। नितिन नबीन के रूप में सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने  के बाद पिछले दिनों पार्टी की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी में कई नए  चेहरों को जगह दी गई। इसमें स्मृति ईरानी, कवित पाटीदार, राममाधव, वीडी शर्मा जैसे नाम है जिनको भाजपा में युवा पीढ़ी का प्रतिनिधित्व माना जाता है। ऐसे में जब भाजपा का झुकाव अब जेन-जी वोटर्स की तरफ तेजी से  हो रहा है तब 2029 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए मोदी कैबिनेट में कई नए चेहरों को जगह मिल सकती है।
 
दरअसल केंद्र और राज्यों की भाजपा सरकारों को जिस तरह से सरकारी परीक्षा प्रणाली में भ्रष्टाचार और सरकारी स्कूलों की खराब हालत को लेकर छात्रों के भारी गुस्से का सामना करना पड़ा उससे पार्टी बैकफुट पर दिखाई दे रही है। इसलिए अब भाजपा युवा वर्ग (जेन-जी) को साधन के लिए सरकार और संगठन स्तर पर बड़े बदलाव की तरफ आगे बढ़ रही है।