मध्यप्रदेश में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के भंवर में खाकी, कटनी के बाद इंदौर में पुलिस कर्मियों पर केस दर्ज

मध्यप्रदेश में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के भंवर में खाकी, कटनी के बाद इंदौर में पुलिस कर्मियों पर केस दर्ज

मध्यप्रदेश में कानून-व्यवस्था संभालने वाली खाकी इन दिनों सवालों के घेरे में है। पहले कटनी में सीएसपी के भष्टाचार के मामले में फंसने के बाद अब इंदौर में रिश्वत के मामले में क्राइम ब्रांच के पूर्व इंस्पेक्टर सहित चार पुलिस कर्मियों पर FIRदर्ज की गई है। दरअसल प्रदेश में  हाल के दिनों में भ्रष्टाचार और पुलिस कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। कटनी में सीएसपी समेत पुलिसकर्मियों पर रिश्वत और जांच में लापरवाही के आरोप हों या इंदौर या भोपाल में पुलिस विभाग के ही कर्मचारियों का रिश्वत लेते पकड़ा जाना, इन घटनाओं ने खाकी को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। 

 

इंदौर में खाकी पर रिश्वतखोरी का आरोप- इंदौर में केस दर्ज न करने के एवज में एक लाख 20 हजार की रिश्वत मांगने के मामले में लोकायुक्त ने क्राइम ब्रांच के तत्कालीन इंस्पेक्टर सुमित श्रीवास्तव,आरक्षक विकास सेठ समेत चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया। पुलिस कर्मियों पर आरोप है कि शिकायतकर्ता के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने के बदले उससे 1.20 लाख रुपए की रिश्वत मांगी गई थी। इसमें से 50,800 रुपए यूपीआई के माध्यम से और बाकी 70 हजार रुपए नकद लेने का आरोप है। लोकायुक्त पुलिस के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उसके खिलाफ चल रही कार्रवाई को रोकने और मामले में राहत देने के बदले रिश्वत की मांग की गई थी। जांच में आरोप सहीं पाए जाने में पर लोकायुक्त ने मामला दर्ज कर लिया है।

 

कटनी में भ्रष्टाचार के मामले में निलंबित सीएसपी फरार- कटनी में करोड़ों की जमीनी खरीदे मामले में सीएसपी नेहा पच्चीसिया निलंबन और केस दर्ज होने के बाद से अब तक फरार चल रही है। कटनी की सीएसपी नेहा पच्चीसिया पर एक करोड़ रुपये से अधिक कीमत की जमीन को दबाव बनाकर करीब 18 लाख रुपये में खरीदने का आरोप है। पूरे मामला सामने आने के बाद मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव के दखल के बाद नेहा पच्चीसिया को निलंबित कर दिया गया और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। निलंबन और FIR दर्ज होने के बाद नेहा पच्चीसिया फरार  है। 

 

इससे पहले भोपाल में खाकी के भ्रष्टाचार का एक अलग चेहरा सामने आया। पुलिस विभाग के एक कांस्टेबल और एफआरवी ड्राइवर को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किए जाने की रिपोर्ट सामने आई। खास बात यह रही कि कार्रवाई करने वाली टीम भी पुलिस विभाग की ही थी। यानी विभाग के भीतर ही भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की तस्वीर दिखाई दी।

 

सवाल सिर्फ रिश्वत का नहीं, सिस्टम पर भरोसे का है- प्रदेश में लगातार पुलिस अधिकारियों औऱ कर्मियों के रिश्वत के मामले में फंसने के बाद सवाल लोगों के खाकी पर भरोसे का  है। लोगों  की रक्षा करने वाली खाकी ही इस तरह दागदार होती गई तो जनता का सिस्टम पर से भरोसा ही उठ जाएगा। मध्यप्रदेश पुलिस के सामने इस चुनौती दोहरी है, एक तरफ अपराधियों पर कार्रवाई और दूसरी तरफ अपने ही तंत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती। हाल के मामलों ने साफ कर दिया है कि खाकी की साख सिर्फ अपराधियों पर कार्रवाई से नहीं, बल्कि अपने भीतर के दागों पर कार्रवाई से भी तय होगी।