
- अस्पतालों में सर्दी खांसी के मरीजों से इंदौर में दहशत।
- उज्जैन के खाचरौद में 100 घरों का सर्वे, 500 लोगों की स्क्रीनिंग।
- उज्जैन में 10 बेड का आइसालेशन वार्ड बनाया गया।
- करीब 200 बच्चे रोजाना इलाज के लिए पहुंच रहे अस्पताल।
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मध्य प्रदेश में मानसून के मौसम के बीच स्वाइन फ्लू (H1N1 वायरस) ने अपने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। इंदौर और उज्जैन समेत कई जिलों में इसके मामले सामने आ रहे हैं। इसी कड़ी में इंदौर के एक निजी अस्पताल में इलाज कराकर लौटी उज्जैन की एक महिला की मौत हो गई थी। इंदौर में 2 और मरीज मिले हैं। इसके साथ ही उज्जैन में रोजाना 200 बच्चे सर्दी-खांसी के इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। जबकि इंदौर में लगातार बढते सर्दी खांसी और बुखार के मरीजों ने स्वाइन फ्लू की दहशत बढा दी है। जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।
इंदौर में बच्चों की ओपीडी में 10 प्रतिशत इजाफा : चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ प्रवीण जडिया ने बताया कि सर्दी खांसी के मरीज तो बढ़े हैं लेकिन अब तक स्वाइन फ्लू के लक्षण सामने नहीं आए हैं। हालांकि सामान्य दिनों की तुलना में इस वक्त बच्चों की ओपीडी में 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
उज्जैन में रोज 200 से ज्यादा बच्चे पहुंच रहे : उज्जैन में सबसे ज्यादा असर बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। चरक अस्पताल में प्रतिदिन 200 से अधिक बच्चे उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें अधिकांश बच्चे सर्दी, खांसी और बुखार से पीड़ित हैं। सामान्य उपचार से ठीक नहीं होने और हालत अधिक खराब होने पर बच्चों को शिशु वार्ड में भर्ती किया जा रहा है। वार्ड के सभी 75 बेड भर चुके हैं। इसके बावजूद बच्चों को लेकर स्वजन अस्पताल पहुंचते रहे। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था तैयार रखी है। सीएमएचओ डॉ. अशोक पटेल ने बताया कि चरक अस्पताल की दूसरी मंजिल पर अतिरिक्त वार्ड उपलब्ध हैं। जरूरत पड़ने पर बच्चों को वहां शिफ्ट कर उपचार दिया जाएगा।
100 घरों का सर्वे, 500 लोगों की स्क्रीनिंग : स्वाइन फ्लू के मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने खाचरौद में सर्वे और स्क्रीनिंग अभियान शुरू किया है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने करीब 100 घरों में पहुंचकर लगभग 500 लोगों की स्क्रीनिंग की। इस दौरान स्वाइन फ्लू के साथ मलेरिया की भी जांच की गई। टीम को आवश्यक दवाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। विभाग के अधिकारियों के अनुसार जिन क्षेत्रों में स्वाइन फ्लू के मरीज मिल रहे हैं, वहां लगातार निगरानी रखी जा रही है। टीमों को घर-घर भेजकर लोगों की स्वास्थ्य जांच और स्क्रीनिंग कराई जा रही है।
उज्जैन की वृद्धा की मौत : हाल के दिनों में उज्जैन निवासी करीब 60-62 वर्षीय महिला की H1N1 जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। उनका इंदौर के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में इलाज चल रहा था। लगभग 16 दिन तक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद 18 अगस्त को परिजन उन्हें लामा यानी मेडिकल सलाह के विरुद्ध छुट्टी लेकर उज्जैन ले गए थे। वहां अगले ही दिन उनकी मृत्यु हो गई। इस दुखद घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित अस्पताल से संपूर्ण मेडिकल रिकॉर्ड और दस्तावेज तलब किए हैं। पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए विशेषज्ञों की एक विशेष टीम गठित कर दी गई है।
अस्पताल पर लापरवाही का आरोप: इलाज के दौरान महिला में स्वाइन फ्लू (H1N1) की पुष्टि हुई थी। आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने इसकी जानकारी समय पर स्वास्थ्य विभाग को नहीं दी। परिजन 18 अगस्त को महिला को बिना डॉक्टर की पूरी सलाह के डिस्चार्ज कराकर उज्जैन ले गए थे, जहां 19 अगस्त को उसकी घर पर मौत हो गई।
स्वास्थ्य विभाग ने दिया शो कॉज नोटिस : इस मामले में संज्ञान लेते हुए इंदौर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हसनानी ने अस्पताल को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। साथ ही, पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक उच्चस्तरीय टीम का गठन किया गया है जो मेडिकल दस्तावेजों की जांच कर रही है।
अस्पतालों में बढ़े सर्दी-खांसी के मरीज: इस समय मौसम बदलाव और मानसूनी असर के चलते इंदौर के सरकारी (जैसे एम.वाय. अस्पताल) और निजी अस्पतालों की ओपीडी में सर्दी, खांसी, जुकाम और वायरल फीवर (Influenza-Like Illness) के मरीजों की संख्या में खासी बढ़ोतरी देखी जा रही है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग द्वारा संदिग्ध स्वाइन फ्लू के लक्षणों वाले मरीजों की सैंपलिंग और जांच बढ़ाई गई है।
स्वाइन फ्लू (H1N1) से बचाव के सुरक्षा उपाय: बार-बार हाथ धोएं: अपने हाथों को साबुन और साफ पानी से लगातार कम से कम 20 सेकंड तक धोएं या अल्कोहल बेस्ड सैनिटाइज़र का उपयोग करें।
खांसते या छींकते वक्त सावधानी रखें: खांसते या छींकते समय अपने मुंह और नाक को रूमाल या टिशू पेपर से अच्छी तरह ढकें।
भीड़भाड़ से बचें: यदि संभव हो तो अत्यधिक भीड़भाड़ वाले और बंद स्थानों पर जाने से बचें। जरूरत पड़ने पर मास्क का इस्तेमाल करें।
चेहरे को छूने से बचें: गंदे हाथों से अपनी आंख, नाक और मुंह को छूने से परहेज करें, क्योंकि वायरस इसी रास्ते शरीर में प्रवेश करता है।
पर्याप्त पानी और पोषण लें: शरीर में पानी की कमी न होने दें और इम्युनिटी बढ़ाने के लिए पौष्टिक आहार, फल और गुनगुना पानी लें।लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें: यदि तेज बुखार, लगातार खांसी, गले में खराश या सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण महसूस हों, तो खुद से दवा न लें और तुरंत डॉक्टर से सलाह लेकर जांच करवाएं।


