
शिक्षा है सबका अधिकार, यह स्लोगन अक्सर सुनाई पड़ता है, इस अधिकार को पाने के लिए एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसको देखकर हर कोई हैरत में पड़ गया। क्योंकि जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें और उज्ज्वल भविष्य के सपने होने चाहिए, उस उम्र में जेन अल्फा अपने सुरक्षित भविष्य के लिए स्कूल की बिल्डिंग मांग रहें है।
कानपुर के समुही भटपुरवा गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय का भवन जर्जर और कमरों की कमी को झेल रहा है। जिसके चलते प्राथमिक स्कूल के यह छात्र अपनी आवाज प्रशासन और शासन तक पहुंचने के लिए प्रदर्शन करतज नजर आयें, जेन अल्फा ने तिरंगा हाथ में लेकर अपने सुरक्षित जीवन और शिक्षा पाने के लिए आवाज उठाई हैं। विद्यालय के बाहर प्रदर्शन और नारेबाजी कर रहें छात्रों ने क्लास रूम में जाने से इनकार कर दिया और विद्यालय के बाहर करीब चार घंटे तक नारेबाजी करते रहे। इन छात्रों ने बदहाली की बात करते हुए सिस्टम से सीधा प्रश्न किया कि जब जर्जर भवन गिर चुका है, तो नया भवन कब बनेगा?
घाटमपुर तहसील क्षेत्र के भटपुरवा स्थित प्राथमिक विद्यालय में कभी जर्जर भवन का कुछ हिस्सा गिरने से एक बच्ची घायल हुई थी। हादसे के बाद भवन के जर्जर हिस्से को शिक्षा विभाग की अनुमति से ढहा दिया गया और उसकी नीलामी भी कर दी गई। मगर इसके बाद जो खाली जगह बनी, वह आज भी बच्चों के लिए अधूरी व्यवस्था की कहानी कह रही है। तीन साल गुजर गए, लेकिन नया विद्यालय भवन अभी तक जमीन हकीकत में सामने नहीं आया है।
दो कमरों में 122 बच्चों का भविष्य
वर्तमान में यह विद्यालय मात्र दो कमरों के अंदर सिमटा हुआ है। इस प्राथमिक विद्यालय के अंदर 122 छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। प्रिंसिपल प्रियंका तिवारी के साथ दो सहायक अध्यापक और दो शिक्षामित्र तैनात हैं। बच्चों की संख्या और कमरों की कमी के बीच पढ़ाई कराना शिक्षकों के लिए एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि एक कमरे में दो या तीन क्लास चलाने पर पढ़ाई में दिक्कत आती है, बच्चों के लिए यह रोजमर्रा की असुविधा हो गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि नए भवन की मांग को लेकर वे करीब तीन वर्षों से अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के दरवाजे खटखटा रहे हैं। हर बार आश्वासन मिला, लेकिन भवन निर्माण की शुरुआत अभी तक नहीं हो पाई है। विद्यालय परिसर में चलने वाला आंगनबाड़ी केंद्र भी भवन के अभाव में एक ग्रामीण के घर में संचालित हो रहा है। यानी समस्या सिर्फ स्कूल की चारदीवारी तक सीमित नहीं, बल्कि गांव के बच्चों की बुनियादी शैक्षिक व्यवस्था से जुड़ी है।
बच्चों ने खुद उठाई आवाज
जेन अल्फा छात्रों का सब्र अब जवाब देने लगा है। जिसके चलते वह विद्यालय पहुंचने के बाद छात्र-छात्राओं ने कक्षाओं में जाने के बजाय बाहर बैठकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। उनकी आवाज में गुस्सा और अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर भी दिखाई दिये। शनिवार में वह करीब चार घंटे तक बच्चे अपनी मांग दोहराते रहे। बारिश शुरू हुई तो प्रदर्शन समाप्त कर उन्हें घर लौटना पड़ा।
बच्चों के इस विरोध ने उस सवाल को फिर सामने ला दिया, जिसे पिछले तीन वर्षों से ग्रामीण उठाते आ रहे हैं, क्या सुरक्षित और पर्याप्त भवन में पढ़ना बच्चों का अधिकार नहीं है?
एक माह में शुरू हो सकता है निर्माण
मामले की जानकारी मिलने पर खंड शिक्षा अधिकारी दीपक अवस्थी विद्यालय पहुंचे। उन्होंने शिक्षकों और ग्रामीणों से बातचीत कर स्थिति की जानकारी ली। उनका कहना है कि विद्यालय भवन निर्माण के लिए केंद्र स्तर से धनराशि स्वीकृत हो चुकी है। अब प्रदेश स्तर से स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार है। स्वीकृति मिलने के बाद आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर करीब एक माह में समय लग जायेगा और उसके बाद विद्यालय के नये भवन का निर्माण शुरू कराने का प्रयास किया जाएगा।
अब देखना यह है कि बच्चों की यह नारेबाजी व्यवस्था के लिए कितनी बड़ी चेतावनी साबित होती है। तीन वर्षों से विद्यालय का निर्माण कागजों और आश्वासनों के बीच अटका रहा है। शिक्षा अधिकारी यानी बीईओ का आश्वासन एक माह बाद आकार लेता नजर आता है, तो यह सिर्फ एक इमारत का निर्माण नहीं होगा, बल्कि उन 122 बच्चों के भरोसे की जी होगी, जो शिक्षा पाने के साथ अपने भविष्य की मांग कर रहे हैं।


