
राजधानी भोपाल में रहवासी क्षेत्रों में कर्मिशयल एक्टिविटी के विरोध में सर्वोच्च न्यायलय के निर्देश के बाद भी कोई कार्यवाही नही होने के विरोध में रहवासियों टॉर्च लाइट मार्च निकाल कर अपना विरोध दर्ज कराया। भरत नगर त्रिलंगा क्षेत्र में संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति के आव्हान पर भोपाल की अनेको आवासीय कॉलोनी के निवासियों ने एकत्रित हो कर नगर निगम की पक्षपातपूर्ण सीलिंग कार्यवाही के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए टौर्च लाइट मार्च निकला।
रहवासियों ने आरोप लगाया की जब सर्वोच्च न्यायलय द्वारा आदेश दिया है की आवासीय भूउपयोग पर हो अवैध संस्थानों पर सीलिंग की कार्यवाही सुनिश्चित की जाये तो नगर निगम आब तक सिर्फ सर्वे और नोटिस का ढोंग क्यों रच रही है।
रहवासियों ने सवाल उठाया की जब नगर निगम एक बार सर्वे करवा चूका है जिसमे हजारो की संख्या में अवैध निर्माण पाया गया है जिसकी जानकारी न्यायलय को दी जा चुकी है तो उस पर कार्यवाही करने की बजाये दूसरी बार सर्वे करवा कर समय क्यों ख़राब किया जा रहा है क्या निगम इन रसूखदार भूमाफियाओ को बचाना चाहता है|
संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार से जल्द मास्टर प्लान लागु करने की मांग की, जिसमे रहवासी क्षेत्रो में व्यवसाई गतिविधियों पर पुर्णतः प्रतिबंध हो। संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने कहा कि टॉर्च लाइट मार्च केवल विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि भोपाल के नागरिकों की जागरूकता और अपने शहर भोपाल को भूमाफियाओ से बचाने का संकल्प है। आवासीय क्षेत्रों को अनियंत्रित व्यावसायिक गतिविधियों और अवैध निर्माणों से बचाना प्रशासन की जिम्मेदारी है परन्तु जिला प्रशासन मूक दर्शक बना बेठा है जिसके चलते भूमाफिया भोपाल की खूबसूरती पर प्रहार कर रहा है।
समिति ने आरोप लगाया कि पहले ही बड़ा तालाब छोटा तालाब और कलियासौत डेम ,केरवा ,चंदनपुरा,गोरा बिसनखेड़ा क्षेत्र अतिक्रमण से ग्रसित है। अब रहवासी क्षेत्रो को ख़त्म करने की प्लानिग है जिसको रहवासी सफल नहीं होने देंगे जिन्होंने एक जुट हो कर प्रशासन से अवैध गतिविधिया हटाने की मांग की और चेतवानी दी की अगर सर्वोच्च न्यायलय के आदेश का पालन नहीं किया जाता है तो हम न्यायलय में अवमानना याचिका दायर करने के लिए बाध्य होंगे|
समिति ने प्रशासन और नगर निगम से मांग की कि आवासीय क्षेत्रों में अवैध निर्माण, अतिक्रमण और अवैध भू-उपयोग के खिलाफ बिना भेदभाव प्रभावी कार्रवाई की जाए तथा आवासीय कॉलोनियों के मूल स्वरूप को संरक्षित किया जाए।


