NEET छात्रों पर पेलेट गन के इस्तेमाल पर राहुल गांधी सख्त, FIR दर्ज कराने के लिए पुलिस थाने में धरने पर बैठे

NEET छात्रों पर पेलेट गन के इस्तेमाल पर राहुल गांधी सख्त, FIR दर्ज कराने के लिए पुलिस थाने में धरने पर बैठे

Rahul Gandhi Dharana: संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज और पेलेट गन के इस्तेमाल को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच घमासान तेज हो गया है। इसी कड़ी में कांग्रेस नेता राहुल गांधी पीड़ित छात्र साहिल लोचव को न्याय दिलाने के लिए खुद संसद मार्ग थाने पहुंचे। जब पुलिस ने पीड़ित की एफआईआर (FIR) दर्ज करने से इनकार कर दिया, तो राहुल गांधी अपने वकील और कांग्रेस नेताओं के साथ थाने के भीतर ही धरने पर बैठ गए।

FIR पर अड़े राहुल गांधी

जानकारी के मुताबिक, हरियाणा के रहने वाले पीड़ित छात्र साहिल लोचव 14 अगस्त को वकीलों के साथ पुलिस शिकायत दर्ज कराने गए थे, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद साहिल ने राहुल गांधी से संपर्क किया। साहिल पहले भी राहुल गांधी के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पेलेट गन से लगे अपने जख्म मीडिया को दिखा चुके हैं। ALSO READ: UGC-NET रद्द होने पर राहुल गांधी का NTA पर हमला, बोले- गलती एजेंसी की, सजा छात्रों को क्यों?

 

मामले की गंभीरता को देखते हुए राहुल गांधी खुद साहिल और उनके परिवार के साथ थाने पहुंचे। उन्होंने जॉइंट सीपी नूपुर सिंह और डीसीपी से मुलाकात कर तत्काल केस दर्ज करने को कहा। केस दर्ज न होने पर राहुल गांधी थाने में ही धरने पर बैठ गए और स्पष्ट किया कि जब तक एफआईआर दर्ज नहीं होती, वह वहां से नहीं हटेंगे। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी इस मामले में मीडिया से भी बात कर सकते हैं। 

क्या कहा कांग्रेस ने?

कांग्रेस ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा- अमित शाह ने देश के बच्चों पर पैलेट गन के इस्तेमाल का आदेश दिया, जिसमें साहिल की आंख में पैलेट लगने से गंभीर चोट आई। साहिल और उसकी मां FIR दर्ज कराने की मांग को लेकर पुलिस के पास जाते रहे, लेकिन पुलिस इसे नज़रअंदाज़ करती रही। ALSO READ: पीएम रात में नहीं सोते, अमित शाह संसद से भाग गए…राहुल गांधी ने दिखाए तेवर, कहा- हम इनको पागल कर देंगे!

 

इसलिए, आज विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने साहिल और उसकी मां के साथ पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की और जांच के बारे में जानकारी मांगी। साहिल की शिकायत पर कोई 'इन्वेस्टिगेशन नंबर' भी नहीं दिया गया है, जिसके बिना FIR दर्ज की जा सकती है।  AIIMS की ओर से साहिल की MLC (मेडिको-लीगल केस) रिपोर्ट भी नहीं दी गई है, जिसे शिकायत और FIR के साथ जोड़ा जा सकता था। यह सरासर अन्याय है।  अमित शाह और दिल्ली पुलिस, कान खोलकर सुन लें—यह तानाशाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। छात्रों को न्याय दिलाने के लिए हम पूरी ताक़त से लड़ते रहेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने गठित की उच्च स्तरीय जांच समिति

दूसरी ओर, इस पूरे मामले पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पांच सदस्यीय उच्च-स्तरीय जांच समिति (HPEC) का गठन किया है। यह समिति 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में छात्र प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई के आरोपों की जांच करेगी। इस जांच समिति में पूर्व जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी, पूर्व जस्टिस रवि शंकर झा (पूर्व मुख्य न्यायाधीश, पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट), पूर्व जस्टिस शालिंदर कौर (पूर्व न्यायाधीश, दिल्ली उच्च न्यायालय), ऋषि कुमार शुक्ला (पूर्व निदेशक, सीबीआई), एलआर बिश्नोई (पूर्व डीजीपी, मेघालय) शामिल हैं।