
जब पूरा भारत 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस उत्साहपूर्वक मना रहा था, उसी समय अफ्रीका की धरती पर भी भारतीय संस्कृति और योग की गूंज सुनाई दे रही थी। ह्रिम योगशाला, संतरामपुर की संस्थापक राजवी शैलेष मेहता (युवा योगिनी) एवं सह-संस्थापक राज शैलेष मेहता (युवा उद्यमी, संस्कृति प्रचारक एवं विश्व के सबसे युवा ऑटोमोबाइल कंपनी के संस्थापक) ने केन्या में विशाल योग सत्र आयोजित कर भारत का गौरव बढ़ाया।
योग दिवस के अवसर पर आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में केन्या गणराज्य के राष्ट्रपति माननीय डॉ. विलियम रूटो के नेतृत्व में केन्या पुलिस सेवा द्वारा प्रथम सत्र में लगभग 4000 पुलिस अधिकारियों को लगातार 72 मिनट तक योग कराया गया। इसके बाद दूसरे सत्र में 260 वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों (नैरोबी सिटी काउंटी अधिकारी) को 150 मिनट तक योगाभ्यास करवाकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत भारतीय संस्कृति की झलक प्रस्तुत करते हुए भरतनाट्यम की मनमोहक प्रस्तुति से हुई। इसके साथ ही योग के माध्यम से भारतीय परंपरा और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस अवसर पर राज शैलेष मेहता ने भारतीय पारंपरिक परिधान धोती धारण कर भारतीय संस्कृति एवं वेशभूषा का भी प्रचार-प्रसार किया।
राजवी शैलेष मेहता और राज शैलेष मेहता सगे भाई-बहन हैं। दोनों मूल रूप से गुजरात के छोटे से कस्बे संतरामपुर के निवासी हैं। उच्य शिक्षा के लिए वे अहमदाबाद में बस गए, लेकिन अपनी भारतीय संस्कृति और योग की परंपरा को विश्वभर में पहुँचाने का संकल्प निरंतर निभा रहे हैं।

राज शैलेष मेहता ने बताया कि जैसा की आदरणीय मोदी जी ने लगातार 12 वर्षो से अधिक भारतवर्ष मे योगा के प्रति अलख जगाई उसी प्रकार हमने उन पुलिस अधिकारियों को योग कराया जो दिन-रात समाज की सुरक्षा के लिए अनेक मानसिक तनाव और चुनौतियों का सामना करते हैं। योग उनके मानसिक तनाव को कम करने और उन्हें शारीरिक एवं मानसिक रूप से सशक्त बनाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। इसी उद्देश्य से हमने अफ्रीका की धरती पर लगभग 3,27,000 मिनट के सामूहिक योग अभ्यास का यह ऐतिहासिक आयोजन किया, जिसमें सभी अधिकारी अपनी आधिकारिक यूनिफॉर्म में शामिल हुए। ओर इस तरीके के आयोजनो से दोनों देशो के मध्य रिश्ते ओर मजबूत होंगे ओर हमारा लक्ष्य है की वैश्विक स्तर पर रक्षा दलो को कुल 60 लाख मिनिट का योग समर्पित करना है।
इस आयोजन ने न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग की महत्ता को नई पहचान दिलाई, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और “योग से विश्व कल्याण” के संदेश को भी पूरी दुनिया तक पहुँचाने का कार्य किया। भाई-बहन की इस उपलब्धि पर भारत और गुजरात के लोगों में गर्व और हर्ष का वातावरण है।


