
Peter Navarro on India: अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक रिश्तों में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेहद करीबी और वाइट हाउस के व्यापार एवं विनिर्माण सलाहकार पीटर नवारो ने भारत को लेकर अत्यंत तीखा और सनसनीखेज बयान दिया है। नवारो का दावा है कि भारत एक अंतरराष्ट्रीय 'गुप्त शिपमेंट नेटवर्क' का हिस्सा बन चुका है, जिसके जरिए चीनी सामानों की री-पैकेजिंग कर उन्हें भारी अमेरिकी टैरिफ (आयात शुल्क) से बचाया जा रहा है। नवारो ने चेतावनी देते हुए साफ शब्दों में कहा है— 'भारत पूरी तरह से हमारे रडार पर है'।
क्या है 'द ग्रेट ट्रांस-शिपमेंट स्कैम'?
पीटर नवारो द्वारा तैयार की गई एक चौंकाने वाली रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस विशाल व्यापारिक घोटाले के कारण अमेरिका को हर साल 19 अरब डॉलर से लेकर 26 अरब डॉलर (करीब 2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा) के टैरिफ राजस्व का भारी चूना लग रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2018 के बाद से कम्युनिस्ट चीन अपनी चालाकी से 40 से ज्यादा देशों के रास्ते अपने सामान का निर्यात (लॉन्ड्रिंग) कर रहा है। इस 'शैडो नेटवर्क' में भारत के अलावा मैक्सिको, कनाडा, यूरोपीय संघ (EU), जापान और दक्षिण कोरिया जैसे अमेरिका के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों का नाम शामिल होने का सनसनीखेज दावा किया गया है। ALSO READ: जब ईरानी हमले के डर से ट्रंप ने बदले 3 प्लेन : तुर्की में ईरान के निशाने पर थे अमेरिकी राष्ट्रपति? कैटरिंग ट्रक के पीछे छिपे सबसे बड़े सीक्रेट ऑपरेशन की पूरी कहानी
कैसे खेला जा रहा है यह खतरनाक खेल?
अमेरिकी रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि चीन इन मध्यस्थ देशों में अपना सामान भेजता है, जहां केवल नाममात्र की प्रोसेसिंग, री-लेबलिंग या नई पैकेजिंग की जाती है। सामान पर 'मेड इन चाइना' का ठप्पा हटाकर नया ओरिजिन (मूल देश) दिखा दिया जाता है। इसके बाद इस माल को बेझिझक अमेरिकी बाजारों में खपाया जाता है, जिससे चीनी सामानों पर लगने वाला भारी-भरकम अमेरिकी टैरिफ पूरी तरह से शून्य हो जाता है।
रूसी तेल पर भी घेरा : लग सकता है 100% तक टैरिफ!
नवारो ने केवल चीनी सामानों के खेल पर ही निशाना नहीं साधा, बल्कि भारत द्वारा खरीदे जा रहे रूसी तेल को लेकर भी गंभीर चेतावनी दी है। उनका आरोप है कि 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से भारत ने रूसी तेल का व्यापार बेतहाशा बढ़ाया है। प्रस्तावित नए प्रतिबंध विधेयक के तहत लगातार रूसी तेल खरीदने के कारण भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान जैसे देशों को 100% तक के दंडात्मक टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है। ALSO READ: ट्रंप का बड़ा फैसला! जेनेरिक दवाओं पर 200% टैरिफ से भारत की फार्मा इंडस्ट्री को कितना होगा नुकसान?
आलोचकों पर भड़के नवारो
भारत को पहले भी 'टैरिफ का महाराजा' कह चुके पीटर नवारो को अपने इन विवादित बयानों की वजह से सोशल मीडिया पर भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। भारतीय इंटरनेट यूजर्स की ओर से मिली कड़ी प्रतिक्रियाओं पर वाइट हाउस में बात करते हुए नवारो ने कहा कि इंटरनेट पर भारतीय उपमहाद्वीप की ओर से मुझ पर कई भद्दे हमले किए गए। मैं उन आलोचकों से कहना चाहता हूं— ऐसा न करें। अमेरिका में हम समस्याओं को इस तरह से नहीं सुलझाते हैं।
नवारो के इस आक्रामक रुख से स्पष्ट है कि ट्रंप प्रशासन के नए व्यापार ढांचे में भारत जैसे बड़े व्यापारिक साझेदारों के खिलाफ कड़े दंडात्मक प्रावधान शामिल किए जा रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों में भारी तल्खी आ सकती है।


