
Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 को बुधवार को लोकसभा ने 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेज दिया। विधेयक को लेकर विपक्षी दलों ने सदन में जोरदार विरोध किया। विपक्ष का आरोप है कि प्रस्तावित कानून अल्पसंख्यकों और गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) को निशाना बनाने वाला है। विपक्ष ने सरकार से विधेयक वापस लेने की मांग भी की। सरकार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए चुनौती दी कि वह विधेयक का एक भी ऐसा प्रावधान बताए, जो किसी अल्पसंख्यक समुदाय के साथ भेदभाव करता हो।
विपक्ष के विरोध के बीच JPC को भेजा गया बिल
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने खुद इस विधेयक को विस्तृत जांच के लिए सदन की समिति के पास भेजने की मांग की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ समुदायों को गुमराह करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है।
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने का प्रस्ताव रखा। इस दौरान विपक्षी सांसद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सदन में मौजूदगी की मांग करते हुए नारेबाजी करते रहे। JPC को 2026 के संसद के शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के अंतिम दिन तक लोकसभा में अपनी रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है।
NGOs और विदेशी फंडिंग पर बढ़ेगी सरकारी निगरानी
यह विधेयक 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था। इसका उद्देश्य देश में गैर-सरकारी संगठनों और विदेशी फंडिंग पर सरकार की निगरानी को और मजबूत करना है।
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि यह कानून अच्छे काम करने वाले NGOs और अल्पसंख्यक संस्थानों को निशाना बनाने के लिए लाया गया है।
उन्होंने कहा कि एक तरफ RSS को विदेशी देशों से चंदा मिल रहा है, जबकि दूसरी तरफ सरकार अल्पसंख्यकों और NGOs को निशाना बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने विधेयक वापस लेने की मांग की।
किरेन रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों को किया खारिज
केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यदि किसी को विधेयक के प्रावधानों को लेकर आपत्ति है तो वह संयुक्त संसदीय समिति के सामने अपनी बात रख सकता है। रिजिजू ने कहा कि यह विधेयक किसी भी अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाकर नहीं लाया गया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने खुद विधेयक को विस्तृत जांच के लिए समिति के पास भेजने की मांग की थी।
अखिलेश यादव को रिजिजू की चुनौती
समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव द्वारा विधेयक को अल्पसंख्यक विरोधी बताए जाने पर रिजिजू ने उन्हें चुनौती दी। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव प्रस्तावित कानून का ऐसा एक प्रावधान बताएं, जो अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो। रिजिजू ने कहा कि देश में झूठ फैलाया जा रहा है और संविधान की भावना के अनुरूप नियम-कायदे होने चाहिए। उन्होंने दावा किया कि प्रस्तावित FCRA विधेयक में किसी भी अल्पसंख्यक संस्था को निशाना बनाने वाला एक भी प्रावधान नहीं है।
उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि विधेयक का कोई भी प्रावधान किसी अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ न हो। सरकार के मुताबिक, इसका उद्देश्य भारत के हर समुदाय के कल्याण और सुरक्षा को सुनिश्चित करना है।
31 सदस्यीय समिति करेगी विधेयक की जांच
बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल, जो उस समय पीठासीन थे, ने कहा कि सरकार ने विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने की मांग स्वीकार कर ली है। समिति में विधेयक पर विस्तृत और गहन चर्चा होगी। 31 सदस्यीय JPC में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य होंगे। लोकसभा सदस्यों को स्पीकर ओम बिरला और राज्यसभा सदस्यों को सभापति सीपी राधाकृष्णन नामित करेंगे।
विधेयक में क्या है खास?
प्रस्तावित FCRA संशोधन विधेयक में ऐसा प्रावधान है जिसके तहत यदि किसी संगठन का FCRA लाइसेंस रद्द हो जाता है तो उसकी संपत्तियों के प्रबंधन और निपटारे के लिए एक नामित प्राधिकरण बनाया जा सकेगा। विपक्षी दलों का कहना है कि विधेयक के कुछ प्रावधान ईसाई NGOs और अल्पसंख्यक समुदायों द्वारा संचालित सामाजिक कल्याण एवं शैक्षणिक संस्थानों को मिलने वाली वैध विदेशी फंडिंग को प्रभावित कर सकते हैं।
वहीं, केंद्र सरकार का कहना है कि प्रस्तावित कानून किसी धर्म विशेष को ध्यान में रखकर नहीं बनाया गया है। इसका उद्देश्य देश में विदेशी योगदान को नियंत्रित और विनियमित करना है।
पूर्वोत्तर के मुख्यमंत्रियों ने भी उठाई थी चिंता
नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो और मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा पहले ही केंद्र से विधेयक को विस्तृत जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने की मांग कर चुके हैं। मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने भी विधेयक के कुछ प्रावधानों को लेकर केंद्र के सामने चिंता जताई थी।
विधेयक की कुछ अमेरिकी सांसदों ने भी आलोचना की थी और ईसाई संगठनों तथा सिविल सोसाइटी समूहों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जताई थी। भारत ने इस आलोचना को खारिज करते हुए इसे देश का आंतरिक विधायी मामला बताया था।
राज्यसभा में भी JPC को भेजने का प्रस्ताव मंजूर
राज्यसभा ने भी विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने का प्रस्ताव मंजूर कर लिया। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय द्वारा पेश प्रस्ताव को उच्च सदन में ध्वनिमत से पारित किया गया।


