जिन्ना की नापाक चाल और 77 साल का दर्द… 14 अगस्त को क्यों रोता है PoK? जानिए पाकिस्तान की आजादी के दिन ‘काले दिवस’ का पूरा सच

जिन्ना की नापाक चाल और 77 साल का दर्द... 14 अगस्त को क्यों रोता है PoK? जानिए पाकिस्तान की आजादी के दिन 'काले दिवस' का पूरा सच

14 August Black Day in PoK

14 August Black Day in PoK: एक तरफ जहां पाकिस्तान 14 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारियों में जुटा है, वहीं पाकिस्तान के गैर-कानूनी कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के लोगों ने इस दिन को 'ब्लैक डे' यानी 'काला दिवस' के रूप में मनाने का ऐलान किया है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के नागरिकों और स्थानीय राजनीतिक संगठनों का कहना है कि 13 और 14 अगस्त को वह काला दिवस के रूप में मनाएंगे। उनके लिए यह आजादी का नहीं, बल्कि पाकिस्तान के जबरन कब्जे और शोषण का दिन है।

 

पीओके में में अवामी एक्शन कमेटी ने पाकिस्तान की आजादी के दिन से पहले विरोध-प्रदर्शनों के एक नए दौर की घोषणा की है। उन्होंने 13 और 14 अगस्त को 'काला दिन' करार दिया है। संगठन ने दुनिया भर के कश्मीरियों से अपील की है कि वे पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा किए जा रहे कथित अत्याचारों के खिलाफ़ प्रदर्शन करें। इस समूह ने 13 अगस्त को पाकिस्तान सरकार और पाकिस्तानी सेना के खिलाफ औपचारिक विरोध-प्रदर्शन का आह्वान किया है। ALSO READ: PoK का सच दिखाया तो भड़का पाकिस्तान! 'अल जजीरा' पर कसा शिकंजा, जानिए क्या है PoK की हकीकत

पाक सेना की फायरिंग में 100 की मौत का दावा

अवामी एक्शन कमेटी के नेता उमर नजीर कश्मीरी ने विदेशों में रह रहे कश्मीरियों से अपील की है कि वे 13 अगस्त को रैलियां करें और PoK में पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा बल प्रयोग और दमन की बात को दुनिया के सामने लाएं। उमर ने दावा किया है कि PoK में हाल ही में पाकिस्तानी सेना की फायरिंग में लगभग 100 कश्मीरी मारे गए। इस कदम का मकसद पाकिस्तान के आजादी के दिन और उससे पहले के दिन को इस इलाके पर इस्लामाबाद के कंट्रोल का विरोध करने के मंच के तौर पर इस्तेमाल करना है। 

 

जम्मू-कश्मीर के इस हिस्से में लंबे समय से पाकिस्तान की हुकूमत और उसकी सेना के खिलाफ गुस्सा सुलग रहा है। आइए समझते हैं आखिर क्या है PoK से जुड़ा पूरा मामला, क्यों वहां के नागरिक पाकिस्तान से सख्त नाराज हैं और क्या है इसका इतिहास? ALSO READ: 'हम पाकिस्तान का हिस्सा नहीं', PoK में प्रदर्शनकारियों का ऐलान, आखिरी अल्टीमेटम से उड़ी शाहबाज और मुनीर की नींद

पाकिस्तान से क्यों नाराज हैं PoK के निवासी?

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के लोग लंबे समय से इस्लामाबाद और पाकिस्तानी सेना के खिलाफ सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन कर रहे हैं। इस नाराजगी की एक नहीं कई वजहें हैं। 

  • मानवाधिकारों का हनन : PoK में पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी (ISI) का कड़ा नियंत्रण है। सरकार या सेना के खिलाफ आवाज उठाने वाले कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और आम लोगों को अवैध रूप से हिरासत में लिया जाता है या उन्हें गायब कर दिया जाता है।
  • आर्थिक शोषण और संसाधनों की लूट : नीलम-झेलम और अन्य जलविद्युत परियोजनाओं से पाकिस्तान भारी मुनाफा कमाता है, लेकिन PoK के लोगों को अत्यधिक महंगे दामों पर बिजली बेची जाती है। स्थानीय संसाधनों का इस्तेमाल कर पाकिस्तान अपना खजाना भरता है, जबकि स्थानीय नागरिक बुनियादी सुविधाओं के लिए भी तरसते हैं। 
  • महंगाई और चीजों की किल्लत : क्षेत्र में आटा, बिजली, दवाइयां और साफ पानी जैसी बुनियादी चीजों की भारी किल्लत है। सरकार सब्सिडी खत्म कर रही है, जिससे आम जनता का जीना मुहाल हो गया है।
  • राजनीतिक स्वतंत्रता की कमी : कहने को PoK का अपना 'राष्ट्रपति' और 'प्रधानमंत्री' होता है, लेकिन असली सत्ता इस्लामाबाद के 'कश्मीर काउंसिल' और पाकिस्तानी थल सेना के हाथ में होती है। PoK के नेता केवल कठपुतली बनकर काम करते हैं।

क्या है PoK का इतिहास? (1947 से अब तक)

PoK (Pakistan Occupied Kashmir) भारत के जम्मू और कश्मीर राज्य का वह हिस्सा है, जिस पर पाकिस्तान ने 1947 में अवैध रूप से कब्जा कर लिया था।

  • 1947 का पाकिस्तानी हमला : 15 अगस्त 1947 को भारत की आजादी के समय जम्मू-कश्मीर एक स्वतंत्र रियासत थी, जिसके महाराजा हरि सिंह थे। 22 अक्टूबर 1947 को पाकिस्तानी सेना ने कबायली लड़ाकों के भेष में कश्मीर पर आक्रमण कर दिया।
  • भारत में विलय : जब पाकिस्तानी हमलावर श्रीनगर के करीब पहुंच गए, तब महाराजा हरि सिंह ने 26 अक्टूबर 1947 को भारत के साथ 'इन्स्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेसिबिलिटी' (विलय पत्र) पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद भारतीय सेना ने कश्मीर पहुंचकर पाकिस्तानी घुसपैठियों को पीछे खदेड़ना शुरू किया।
  • सीजफायर और बंटवारा : जब भारतीय सेना कब्जाए गए इलाकों को वापस छुड़ा रही थी, तब यह मामला संयुक्त राष्ट्र (UN) में चला गया। 1 जनवरी 1949 को युद्धविराम (Ceasefire) लागू हुआ। इसके नतीजे में जम्मू-कश्मीर का लगभग एक-तिहाई हिस्सा पाकिस्तान के अवैध कब्जे में ही रह गया, जिसे आज PoK कहा जाता है।

दो हिस्सों में बंटा है पीओके

पाकिस्तान ने कब्जे वाले कश्मीर को दो हिस्सों में बांट रखा है। आजाद जम्मू और कश्मीर, जिसे आमतौर पर PoK कहा जाता है। इसकी राजदानी मुजफ्फराबाद है। दूसरी ओर, गिलगित-बाल्टिस्तान को पाकिस्तान ने 2009 में अलग प्रशासनिक इकाई का दर्जा दे दिया था।

14 अगस्त को क्यों चुना 'ब्लैक डे'?

PoK के स्थानीय नागरिक आंदोलनों (जैसे 'अवामी एक्शन कमेटी') और मानवाधिकार संगठनों का मानना है कि 14 अगस्त 1947 के बाद से ही उनके क्षेत्र की तबाही की नींव पड़ी थी। पाकिस्तान खुद को स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाता दिखाता है, लेकिन PoK की जनता के लिए यह दिन एक दमनकारी शासन की शुरुआत का प्रतीक है। यही वजह है कि इस दिन विरोध प्रदर्शन, रैलियां और काली पट्टियां बांधकर पाकिस्तानी झंडे और सेना के खिलाफ 'ब्लैक डे' मनाया जाता है।