
भोपाल। मध्यप्रदेश में करीब नौ साल बाद छात्रसंघ चुनाव कराने की तैयारी और इसकी प्रक्रिया और चुनाव प्रणाली को लेकर सियासत तेज हो गई है। मध्यप्रदेश कांग्रेस ने छात्रसंघ चुनाव को प्रत्यक्ष तरीके से कराने की मांग को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। कांग्रेस ने कहा कि छात्रसंघ चुनाव अगर प्रत्यक्ष तरीके से नहीं होंगे तो पार्टी पूरे प्रदेश में आंदोलन करेगी। वहीं मध्यप्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने छात्रसंघ चुनाव को लेकर कहा कि सरकार कोर्ट के निर्णय के अनुसार आगे बढ़ रही है।
प्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव कराने की मांग?-मध्यप्रदेश में छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग लंबे समय से उठती रही है। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब प्रदेश में छात्रसंघ चुनाव के आसार बन रहे है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है छात्रसंघ चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से होंगे या किसी अन्य प्रणामी से, इसको लेकर बहस तेज हो गई है। प्रदेश में छात्र संगठनों का एक बड़ा वर्ग चाहता है कि कॉलेज और विश्वविद्यालयों में छात्र अपने अध्यक्ष समेत प्रमुख पदाधिकारियों को सीधे वोट देकर चुनें।
कांग्रेस और उसकी छात्र ईकाई एनएसयूआई ने छात्रसंघ चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से कराए जाने की मांग की है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी प्रत्यक्ष तरीके से छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग कर रही है। उन्होंने कहा कि कोर्ट के निर्देश पर जो छात्रसंघ चुनाव हो रहे है, वह प्रत्यक्ष प्रणाली से हो। अगर चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से नहीं हुए तो कांग्रेस पार्टी, यूथ कांग्रेस और NSUI के साथ मिलकर हर यूनिवर्सिटी और कॉलेज में आंदोलन करेगी। कांग्रेस का मानना है कि प्रत्यक्ष चुनाव से विद्यार्थियों को अपने प्रतिनिधि चुनने का सीधा अधिकार मिलेगा और फीस, छात्र सुविधाओं, परीक्षा, छात्रावास तथा विश्वविद्यालय-कॉलेजों से जुड़े मुद्दों पर निर्वाचित प्रतिनिधि प्रभावी तरीके से आवाज उठा सकेंगे।
वहीं छात्रसंघ चुनाव को लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा है कि छात्रसंघ चुनाव को लेकर सरकार कोर्ट के निर्णय के अनुसार आगे बढ़ रही है। वहीं छात्रसंघ चुनाव किस तरीके से होंगे इस पर भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि इसको लेकर छात्र संगठनों से लगातार चर्चा हो रही है और छात्र संगठनों से चर्चा के बाद यह तय किया जाएगा कि चुनाव किस प्रणाली से हो।
छात्रसंघ चुनाव में अब तक क्या हुआ?- मध्यप्रदेश में छात्रसंघ चुनाव आखिरी बार 2017 में हुए थे। इसके बाद करीब नौ साल तक कॉलेज और विश्वविद्यालयों में नियमित छात्रसंघ चुनाव नहीं हो सके। अब हाईकोर्ट की कार्यवाही और आदेश के बाद चुनाव कराने का रास्ता खुलने की स्थिति बनी है। सरकार ने 2026-27 के सत्र में चुनाव कराने की तैयारी शुरू की है और सितंबर का समय प्रस्तावित बताया जा रहा है।
गौरतलब है कि छात्रसंघ चुनाव केवल कॉलेज परिसरों तक सीमित मुद्दा नहीं हैं। मध्यप्रदेश में छात्र राजनीति ने लंबे समय से मुख्यधारा की राजनीति को नेतृत्व दिया है। ऐसे में करीब नौ साल के अंतराल के बाद चुनाव होने की संभावना ने भाजपा और कांग्रेस से जुड़े छात्र संगठनों को सक्रिय कर दिया है। प्रत्यक्ष चुनाव की मांग के बीच सरकार पर जल्द और स्पष्ट निर्णय लेने का दबाव बढ़ रहा है। दूसरी ओर सरकार कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कह रही है। नौ साल बाद लौटती छात्र राजनीति में फिलहाल चुनाव कराने पर सहमति का माहौल है, लेकिन चुनाव का तरीका सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल बना हुआ है।


