
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर राज्यवासियों को शुभकामनाएं देते हुए ऐतिहासिक झारखंड जनजातीय महोत्सव का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि झारखंड की धरती ने दुनिया को ऐसी जीवन-दृष्टि दी है, जिसमें प्रकृति पूजनीय है, समुदाय सर्वोपरि है और संस्कृति जीवन का अभिन्न हिस्सा है।
हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि हर वर्ष की तरह इस बार भी झारखंड में ऐतिहासिक जनजातीय महोत्सव मनाया जा रहा है। उन्होंने विश्व आदिवासी दिवस के शुभ अवसर पर इस आयोजन में शामिल सभी लोगों का स्वागत करते हुए उन्हें शुभकामनाएं और ‘जोहार’ कहा।
झारखंड में हर वर्ष की तरह आज फिर ऐतिहासिक झारखंड आदिवासी महोत्सव मनाया जा रहा है।
विश्व आदिवासी दिवस के शुभ अवसर पर आयोजित होने वाले इस महाआयोजन के लिए आप सभी का हार्दिक स्वागत, शुभकामनाएं और जोहार।
झारखंड की धरती ने दुनिया को ऐसा जीवन दर्शन दिया है, जहाँ प्रकृति पूजनीय है,… pic.twitter.com/C6qztuswwK
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) August 9, 2026
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह महोत्सव केवल झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और विरासत का उत्सव नहीं है, बल्कि अस्तित्व, पहचान और अधिकारों के प्रति संकल्प को भी दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन के साथ-साथ अपनी पहचान की रक्षा के लिए संघर्ष झारखंड की विरासत रही है। आने वाली पीढ़ियों के लिए इस विरासत को सुरक्षित रखना सभी का संकल्प होना चाहिए।
सोरेन ने अपने संदेश में झारखंड की अस्मिता और भविष्य को लेकर कहा कि “हमारी जमीन, हमारा शासन—अपनी पहचान के साथ, अपने भविष्य की ओर।”
मुख्यमंत्री ने झारखंड के वीर शहीदों को नमन करते हुए कहा कि राज्य के बहादुर शहीद हमेशा अमर रहें।
उन्होंने अपने संदेश का समापन “झारखंड की जय” के उद्घोष के साथ किया।

