क्या ब्रह्मांड बिग बैंग से नहीं बना? नई स्टडी में सामने आई ‘बिग बाउंस’ थ्योरी

Big Bang Theory, Big Bounce,

हाल ही में Physical Review D जैसी प्रमुख विज्ञान पत्रिकाओं में प्रकाशित शोध के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों ने ब्रह्मांड की उत्पत्ति को लेकर एक नया सिद्धांत पेश किया है। MSN.COM की खबर के अनुसार इस नए अध्ययन के मुताबिक, हमारे ब्रह्मांड की शुरुआत पारंपरिक 'बिग बैंग' (Big Bang) से नहीं, बल्कि 'बिग बाउंस' (Big Bounce) की प्रक्रिया से हुई हो सकती है।

 

मुख्य वैज्ञानिक तथ्य और खोजें

सिंगुलैरिटी (Singularity) की पहेली:

पुराने 'बिग बैंग' सिद्धांत का मानना है कि ब्रह्मांड की शुरुआत अनंत घनत्व वाले एक बेहद छोटे बिंदु से हुई थी। लेकिन वैज्ञानिक स्वीकार करते हैं कि उस बिंदु पर आइंस्टीन के भौतिकी के सामान्य नियम (General Relativity) काम करना बंद कर देते हैं।

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क्या है 'बिग बाउंस' (Big Bounce) सिद्धांत?

नए अध्ययन के अनुसार, ब्रह्मांड किसी शून्य या सूक्ष्म बिंदु से पैदा नहीं हुआ। इसके विपरीत, एक पुराना ब्रह्मांड धीरे-धीरे सिकुड़ता (Gravitational Collapse) गया। जब पदार्थ अपनी क्वांटम सीमा (Quantum Limit) तक पूरी तरह दब गया, तो भौतिकी के नियमों के कारण वह नष्ट नहीं हुआ—बल्कि एक स्प्रिंग की तरह वापस उछला (Bounce हुआ) और फैलने लगा।

 

ब्लैक होल और पैरेंट यूनिवर्स मॉडल:

यूनिवर्सिटी ऑफ पोर्ट्समाउथ के प्रोफेसर एनरिक गजतानागा (Enrique Gaztañaga) और उनकी टीम के अनुसार, हमारा पूरा दृश्यमान ब्रह्मांड एक बड़े 'पैरेंट यूनिवर्स' के विशाल ब्लैक होल के अंदर हुए गुरुत्वाकर्षण बाउंस का परिणाम हो सकता है।

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क्वांटम मैकेनिक्स और आइंस्टीन के नियमों का मेल:

यह नया मॉडल क्वांटम मैकेनिक्स और सामान्य सापेक्षता (General Relativity) दोनों के सिद्धांतों के अनुकूल है, जिससे 'अनंत घनत्व' (Singularity) की उलझन दूर हो जाती है।

 

क्या 'बिग बैंग थ्योरी' पूरी तरह गलत साबित हो गई?

नहीं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह बिग बैंग थ्योरी को खारिज करना नहीं, बल्कि उसमें किया गया एक बड़ा सुधार (Expansion Model) है। यह अध्ययन ब्रह्मांड के फैलाव को नकारता नहीं है, बल्कि यह सटीक रूप से समझाता है कि फैलाव शुरू होने से ठीक पहले क्या घटित हुआ था।

 

संक्षेप में, यह शोध उन वैज्ञानिकों के प्रयासों पर आधारित है जो ब्रह्मांड के जन्म की गुत्थी सुलझाने के लिए 'सिंगुलैरिटी' की जगह 'बिग बाउंस' मॉडल को अधिक सटीक मानते हैं।

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