खिलाड़ियों और प्रसारक की भलाई के लिए बदली गई जर्सी जानिए कैसे (Video)

नीदरलैंड और बेल्जियम में होने वाले हॉकी विश्वकप में भारत की जर्सी का रंग बदलने का मामला गर्माता जा रहा है। भारत अमूमन किसी वैश्विक टूर्नामेंट या प्रो लीग में नीली या सफेद जर्सी पहनकर हॉकी स्टेडियम में उतरता था। लेकिन अब आगामी विश्वकप के लिए नारंगी (भगवा) और सफेद जर्सी को चुना गया है।

भारत के कप्तान हरमनप्रीत ने एक डिजिटल चैनल में यह बात स्वीकारी की खिलाड़ियों और कोच की सहमति के बाद ही जर्सी बदलनी पड़ी। जर्सी बदलने का सबसे बड़ा कारण यह था कि टर्फ का रंग नीला होता है जिससे ना केवल अभ्यास सत्र बल्कि मैच के दौरान भी खिलाड़ियों को फॉर्मेशन बनाने में दिक्कत होती थी।

इसके अलावा लंबे समय से बात चर्चा में थी कि स्क्रीन पर टर्फ और जर्सी का रंग एक होने के कारण दर्शकों को हॉकी का मैच देखने में बहुत दिक्कत आती है। यह प्रसारकों के हित का भी निर्णय है लेकिन अब इस पर राजनीति हो रही है।

इन पूर्व खिलाड़ियों ने उठाया सवाल

नीदरलैंड और बेल्जियम में 15 अगस्त से शुरू हो रहे विश्व कप से पहले भारतीय टीमों की जर्सी का रंग नीले से केसरिया कर दिया गया जिसे लेकर वीरेन रासकिन्हा, परगट सिंह, वी भास्करन, धनराज पिल्लै जैसे पूर्व खिलाड़ियों ने सवाल उठाये हैं। वहीं मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया और विपक्षी दलों ने इस पर सरकार को आड़े हाथों लिया है।

टिर्की सहित हॉकी इंडिया के पदाधिकारियों का कल तक कहना था कि खेल के मैदान पर इस्तेमाल होने वाली नीली पिच से रंग की समानता से बचने के लिए यह पूरी तरह से तकनीकी निर्णय था।