धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी CJP का धरना जारी, क्या है उनकी 2 अन्य बड़ी मांगें

Dharmendra Pradhan Resigns : केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। प्रधान के इस्तीफे की खबर से जंतर मं‍तर पर प्रदर्शन कर रहे लोगों में हर्ष की लहर दौड़ गई। हालांकि इस्तीफे के बाद भी जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी का धरना जारी है। सीजेपी का कहना है कि उनकी 2 अन्य मांगें भी पूरी होनी चाहिए। ALSO READ: शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का अंतत: इस्तीफा, प्रदर्शनकारियों को भी लिखा खत

 

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है और यह इस्तीफा इस बात का गवाह है कि अगर आप लोग डरेंगे नहीं, अगर आप लोग इस सरकार के आगे नहीं झुकेंगे, तो हम किसी का भी इस्तीफा ले सकते हैं।

 

उन्होंने कहा कि डरने की कोई जरूरत नहीं है। यह लोकतंत्र है। उन्होंने इस्तीफा दे दिया है, लेकिन हमारी दो और मांगें हैं। धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है लेकिन जिन बच्चों ने सुसाइड किया है, उनके परिवारों को एक करोड़ रुपए का मुआवजा मिलना चाहिए। दूसरा, ये पुलिस वाले गुंडे जिन्होंने 20 तारीख को एक्शन लिया। उसके लिए पुलिस अधिकारियों पर एक्शन होना चाहिए। याद रखना कॉकरोच से पंगा मत लेना। ALSO READ: भारतीय Gen-Z का क्रिएटिव प्रोटेस्‍ट बनाम दुनिया के हिंसक आंदोलन, क्‍यों दुनियाभर में सराहे जा रहे हैं भारतीय Gen-Z

इस्तीफे पर युवाओं से क्या बोले धर्मेन्द्र प्रधान?

धर्मेन्द्र प्रधान ने युवाओं को लिखे अपने पत्र में कहा कि युवाओं की आकांक्षाओं का सम्मान करते हुए उन्होंने अपना इस्तीफा दिया है। उन्होंने कहा कि पिछले 10 दिनों से मेरा मन दुखी है। मैं जिम्मेदारी से भाग नहीं रहा था। 

 

उन्होंने पत्र में कहा कि यह पक्का करने के लिए कि जंतर-मंतर और पूरे देश में जो हालात हैं, उनसे देश विरोधी तत्वों को फायदा न हो, देश एकजुट रहे, भारत में छात्र कानूनी पचड़ों में न उलझें और अपनी पढ़ाई और अपने करियर पर ध्यान दें, मैंने प्रधानमंत्री को अपना त्यागपत्र भेज दिया है। 

गौरतलब है कि पेपर लीक मामले में कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ता पिछले 36 दिनों से धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर 26 दिन धरने पर थे। मानसून के पहले 5 दिन विपक्ष भी धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ा रहा। इस वजह से संसद के दोनों सदनों में कार्यवाही ठप रही।