Commonwealth Games में भारत का खाता खोलने वाले झंडू कुमार थे पोलियो से ग्रसित में बेची सब्जियां

Jhandu Kumar

राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का खाता खोलने वाले पैरा भारोत्तोलक झंडु कुमार 5 साल से  पोलियो से ग्रसित थे। उन्होंने कुल 190 किलोग्राम पॉवरलिफ्ट करके भारत को कांस्य पदक जिताया। वह खुद एक सब्जी बेचने वाले के बेटे हैं और कोविड काल के दौरान उन्होंने सब्जी बेचकर अपना घर खर्च चलाया लेकिन आज उनका संघर्ष रंग लाया।

28 वर्षीय झंडु कुमार का जन्म नालंदा के हरनौत में हुआ था। झंडु कुमार का शुरुआती जीवन कई संघर्षों में बीता। उन्होंने गुजर बसर के लिए ई रिक्शा चलाया वहीं खानदानी पेशा सब्जियां भी बेची। लेकिन अंतत जैसे उन्होंने निजी जिंदगी के संघर्षो से पार पाकर जीत हासिल की वैसे ही ग्लासगो में भी भारत का झंडा बुलंद किया।

झंडू कुमार ने 5 सालों में ही अपने पैरों की मजबूती गंवा दी थी। पोलियो के कारण उनको बैसाखी का सहारा लेना पड़ा। सब्जी बेचने के अलावा उन्होंने ई रिक्शा चलाया ताकि घर चल पाए लेकिन यह भी काम नहीं आया। नतीजा यह हुआ कि उन्हें अपना ई रिक्शा भी बेचना पड़ा।झंडू कुमार ने गोला फेंक, भाला फेंक और चक्का फेंक जैसे खेलों में अपना भाग्य आजमाया लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। ऐसे में उन्होंने पॉवरलिफ्टिंग चुना और आज देश का खाता खुलवा गए।

प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट कर उनको बधाई दी”झंडू कुमार का शानदार प्रदर्शन! उन्होंने पुरुषों के हैवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग इवेंट में ब्रॉन्ज़ मेडल जीतकर #CWG2026 में भारत के लिए मेडल का खाता खोला है। उन्हें बधाई। उनकी यह उपलब्धि उनकी जबरदस्त ताकत, अटूट संकल्प और बरसों की अनुशासित मेहनत का बेहतरीन उदाहरण है। हर चुनौती का सामना करते हुए और इंटरनेशनल मंच पर शानदार प्रदर्शन करके, उन्होंने पूरे देश का मान बढ़ाया है और अनगिनत भारतीयों को प्रेरित किया है।”