कविता- तू ना हो तो…

कवयित्री: पूर्वा मेहता

 

Poem kavita tum na ho to

शीर्षक: तू ना हो तो…

तू ना हो तो यह दिन थम सा जाता है,

बिना तेरे हमसे रहा नहीं जाता है…

 

तू ना हो तो एक कमी सी है,

दुनिया जैसे बिल्कुल थमी सी है…

 

तू ना हो तो बाकी सब भी है,

मगर उनका होना, न होना सा है…

 

तू ना हो तो सब अधूरा सा लगता है,

तेरे होने से पूरा सा लगता है।

 

तू ना हो तो मेरी मुस्कान खो जाती है,

रातें तो जागती हैं और सुबह सो जाती है…

 

तू ना हो तो बातें किससे करूँ,

तेरे बिना खामोशी भी सताती है…

 

तू ना हो तो सुबह अधूरी सी लगती है,

तेरे न होने से शाम खाली सी लगती है…

 

तू ना हो तो ज़िंदगी चल तो जाती है,

पर तेरे बिना जीने का एहसास खो जाता है…

 

तू ना हो तो हर धुन फीकी सी है,

तेरे बिना हर गीत अधूरा सा है…

 

(समाप्त)