अल्कोहल वाली दवाओं को लेकर सरकार का बड़ा फैसला, दुकानों को भी रखना होगा रिकॉर्ड, जानिए क्‍या है नया नियम?

Government's major decision regarding alcohol-based medicines

New Drug Rules News : नशे के दुरुपयोग को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। खबरों के अनुसार, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने आज ड्रग्स रूल्स (दसवां संशोधन) नियम, 2026 में बदलाव कर 12 प्रतिशत से ज्यादा इथाइल अल्कोहल वाली और 30 मिलीलीटर से बड़ी दवाओं को 'Schedule H1' में डाल दिया है। अब ये दवाएं बिना रजिस्टर्ड चिकित्सा विशेषज्ञ की पर्ची के नहीं बिकेंगी। केमिस्ट को अलग रजिस्टर भी रखना होगा। हालांकि नए नियम तुरंत प्रभाव से लागू नहीं किए जाएंगे। सरकार ने दवा कंपनियों और मेडिकल स्टोर संचालकों को तैयारी के लिए 6 महीने का समय दिया है।

 

बिना डॉक्‍टर की पर्ची के नहीं बिकेंगी दवाएं

नशे के दुरुपयोग को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। खबरों के अनुसार, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने आज ड्रग्स रूल्स (दसवां संशोधन) नियम, 2026 में बदलाव कर 12 प्रतिशत से ज्यादा इथाइल अल्कोहल वाली और 30 मिलीलीटर से बड़ी दवाओं को 'Schedule H1' में डाल दिया है। अब ये दवाएं बिना रजिस्टर्ड चिकित्सा विशेषज्ञ की पर्ची के नहीं बिकेंगी। केमिस्ट को अलग रजिस्टर भी रखना होगा।

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ये हैं नए नियम   

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने नई अधिसूचना जारी करते हुए कहा है कि नए नियमों के तहत दवा दुकानदारों और फार्मासिस्टों की जिम्मेदारी होगी कि वे तय सीमा से अधिक अल्कोहल वाली दवाएं केवल डॉक्टर की पर्ची देखने के बाद ही उपलब्ध कराएं। इनमें कुछ कफ सिरप, टॉनिक और दूसरी लिक्विड दवाएं शामिल हो सकती हैं।

 

मंत्रालय के निर्देश के अनुसार, इन दवाओं को ओवर-द-काउंटर (OTC) दवाओं की कैटगरी से बाहर रखा जाएगा। हालांकि हर अल्कोहल वाली दवा इस नियम के दायरे में नहीं आएगी। केवल तय सीमा से ज्यादा अल्कोहल और बड़ी पैकिंग वाली दवाओं पर यह नियम लागू होगा।

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कब लागू होंगे नए नियम?

नए नियम तुरंत प्रभाव से लागू नहीं किए जाएंगे। सरकार ने दवा कंपनियों और मेडिकल स्टोर संचालकों को तैयारी के लिए 6 महीने का समय दिया है। इस अवधि में दवा कंपनियों को अपनी दवाओं की पैकेजिंग और लेबल पर जरूरी बदलाव करने होंगे। वहीं मेडिकल दुकानदारों को नए नियमों के अनुसार रिकॉर्ड रखने और बिक्री प्रक्रिया में बदलाव की तैयारी करनी होगी। जनवरी 2027 से इन नियमों का पूरी तरह पालन करना अनिवार्य होगा।

 

मेडिकल स्टोर्स को रखना होगा रिकॉर्ड

मेडिकल स्टोर्स (फार्मेसी) को इन दवाओं की बिक्री का पूरा रिकॉर्ड (मरीज का नाम, दवा की मात्रा और डॉक्टर का नाम) एक अलग रजिस्टर में दर्ज करना अनिवार्य है। ये दवाएं मुख्य रूप से कफ सिरप, होम्योपैथिक दवाओं और कुछ स्वास्थ्य टॉनिक में पाई जाती हैं, जिन्हें घुलनशील बनाने के लिए अल्कोहल का उपयोग किया जाता है।

 

सरकार ने क्यों उठाया यह कदम?

सरकार ने यह कदम अधिक मात्रा में अल्कोहल युक्त दवाओं के गलत इस्तेमाल और अनियंत्रित सेवन को रोकने के उद्देश्य से उठाया है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इस फैसले से दवाओं के सुरक्षित उपयोग को बढ़ावा मिलेगा और लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा को मजबूत करने में मदद मिलेगी। सरकार के इस फैसले का सीधा असर कई कफ सीरप और टॉनिक पर पड़ेगा।

 

नशे पर कसेगे नकेल

दरअसल अल्कोहल युक्त दवाओं का नशे के रूप में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। अलग-अलग राज्यों से कोडीन युक्त कफ सिरप की बड़े पैमाने पर तस्करी की बातें भी सामने आ चुकी हैं। इसी पर नकेल कसने के लिए सरकार ने ड्रग्स रूल्स 1945 में संशोधन करते हुए यह बदलाव किया है।