सरदार सरोवर समझौते पर कांग्रेस ने की श्र्वेत पत्र लाने की मांग, पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने पूछा, MP के 7,669 करोड़ क्यों छोड़े?

भोपाल। सरदार सरोवर परियोजना को लेकर गुजरात को किए जाने वाले भुगतान को लेकर मध्यप्रदेश की सियासत गर्मा गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरदार सरोवर बांध से जुड़े मुद्दे पर प्रदेश सरकार को घेरते हुए कहा कि मध्यप्रदेश के हितों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस पूरे मामले पर विधानसभा में चर्चा कराने और श्वेत पत्र जारी करने की मांग की।

 

अपने भोपाल स्थित निवास पर मीडिया से बात करते हुए जीतू पटवारी ने कहा कि वर्ष 2019 में नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर सरदार सरोवर बांध को पूरी क्षमता तक भर दिया गया था, जिसके कारण मध्यप्रदेश के हजारों गांव डूब की चपेट में आ गए और व्यापक अव्यवस्था फैल गई। उन्होंने कहा कि यह मामला तत्कालीन शिवराज सिंह चौहान सरकार के समय का है। पटवारी ने कहा कि नर्मदा मैया पर पहला अधिकार मध्यप्रदेश के लोगों का है।

उन्होंने आरोप लगाया कि डैम में सबसे अधिक डूब मध्यप्रदेश की हुई, सबसे अधिक विस्थापन मध्यप्रदेश का हुआ और पुनर्वास का सबसे बड़ा बोझ भी प्रदेश ने ही उठाया। उनके अनुसार डूब प्रभावित 230 गांवों में से 178 गांव मध्यप्रदेश के हैं तथा 30,600 प्रभावित परिवार भी प्रदेश के हैं। इसके अलावा सबसे अधिक कृषि भूमि, वन भूमि और आदिवासी परिवारों का नुकसान भी मध्यप्रदेश को उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश ने 7,669 करोड़ रुपये का दावा किया था। ऐसे में सरकार यह स्पष्ट करे कि आखिर 7,500 करोड़ रुपये का दावा क्यों छोड़ दिया गया।

 

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि क्या इस विषय पर मंत्रिमंडल में मध्यप्रदेश के हितों पर चर्चा हुई थी क्या विपक्ष के नेताओं या पर्यावरणविदों से कोई राय ली गई। पटवारी ने कहा कि सरकार केवल यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती कि 1,500 करोड़ रुपये की जगह 1,250 करोड़ रुपये बचाकर केवल 250 करोड़ रुपये दिए गए। 

 

उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश को समृद्ध बनाने के लिए सरकार के कोई स्पष्ट विजन नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रदेश लगातार कर्ज ले रहा है तो सरकार यह बताए कि कर्ज लेने की जरूरत क्यों पड़ रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस विषय पर श्वेत पत्र लाकर जनता के सामने पूरी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। पटवारी ने कहा कि जब उन्होंने “मोदी की गारंटी” को लेकर सवाल पूछा तो जवाब देने के बजाय उन्हें गालियां मिलीं। उन्होंने मांग की कि सरकार पूरे मामले पर श्वेत पत्र जारी करे, सभी समझौतों और पूर्ववर्ती सरकारों के तर्कों को सार्वजनिक करे तथा विधानसभा में विस्तृत चर्चा और आधिकारिक वक्तव्य दे।