Success Story: महिमा की उम्र मात्र 14 साल की है। वह रायपुर में 10वीं कक्षा की छात्रा हैं। आजकल महिमा राजपूत का नाम सुर्खियों में है और लोग उनकी उपलब्धि के बारे में जानकर फख्र महसूस करने के साथ ही उनसे प्रेरणा भी ले रहे हें। महिमा उन 108 देशों के छात्रों में शामिल हैं, जिन्हें चंद्रमा पर भेजने के लिए सैटेलाइट बनाने वाले छात्रों के समूह के लिए चुना गया है। ये बच्चे 23 अगस्त को दिल्ली आएंगे और चंद्रमा पर भेजी जाने वाला उपग्रह बनाएंगे और संभवत: अक्टूबर में उनका यह कारनामा आसमान की बुलंदियों को चीर कर चंद्रमा की तरफ बढ़ेगा।
10वीं कक्षा की छात्रा महिमा राजपूत को इंटरनेशनल स्पेस मिशन ‘ShakthiSAT’ के लिए भारत से चुना गया है, जिसमें 108 देशों के स्टूडेंट्स हिस्सा लेंगे। अपने चयन के बारे में महिमा ने कहा कि उन्हें उनके स्कूल प्रिंसिपल ने उनके गाइडेंस टीचर के जरिए मिशन के बारे में बताया, जिसके बाद उन्हें प्रोग्राम के लिए रजिस्टर किया गया।
#WATCH | Raipur, Chhattisgarh: Mahima Rajput, a 10th-class student, is selected for the international space Mission ‘ShakthiSAT’ from India. Students from 108 countries will participate.
Mahima Rajput says, “I am selected for the Mission ‘ShakthiSAT’, which my principal told my… pic.twitter.com/KOemeBd8YC
— ANI (@ANI) June 25, 2026
क्या है शक्तिसैट?
‘शक्तिसैट’ (ShakthiSAT) कार्यक्रम, भारतीय एयरोस्पेस संस्था ‘स्पेस किड्स इंडिया’ की ओर से शुरू की गई एक अनोखी ग्लोबल स्पेस पहल है। यह खासकर लड़कियों के लिए है। इस मिशन का मकसद 108 देशों की 12 से 18 साल की स्कूली लड़कियों को स्पेस टेक्नोलॉजी और सैटेलाइट इंजीनियरिंग में ट्रेनिंग देना है। इसके तहत 12,000 स्कूली छात्राओं को स्पेस टेक्नोलॉजी में ट्रेन किया जाता है।
इस ट्रेनिंग का हिस्सा रहीं महिमा ने बताया कि ट्रेनिंग के दौरान छात्राओं को 21 मॉड्यूल और 365 पाठों के जरिए सैटेलाइट बिल्डिंग और स्पेस साइंस की बारीकियां बताई जाती है। 120 घंटे की ऑनलाइन ट्रेनिंग के जरिए सैटेलाइट सिस्टम, पेलोड डेवलपमेंट, पीसीबी डिज़ाइन के बारे में बताया जाता है। ऑनलाइन ट्रेनिंग के बाद, हर देश से एक बेस्ट स्टूडेंट का सिलेक्शन किया गया है।
भारत की ओर से छत्तीसगढ़ के रायपुर की महिमा इस टीम का हिस्सा बनी हें। उन्होंने कहा, “मॉड्यूल ने साइंस और सैटेलाइट के बारे में हमारे बेसिक कॉन्सेप्ट क्लियर किए और हमारी बहुत मदद की।” अब सभी चुने गए छात्र 23 अगस्त को दिल्ली जाएंगे, जहां वे इस प्रोग्राम के तहत सैटेलाइट बनाने की प्रैक्टिकल गतिविधियों में हिस्सा लेंगे। इस मिशन की योजना में अंतरिक्ष में सैटेलाइट लॉन्च करना शामिल है।
बच्चों का बनाया सैटेलाइट जाएगा चांद पर
मिशन प्लान के हिस्से के तौर पर, दो सैटेलाइट लॉन्च किए जाएंगे। इनमें से एक सैटेलाइट के चांद की सतह पर लैंड करने की उम्मीद है, जबकि दूसरा चांद के ऑर्बिट में चक्कर लगाएगा। यह मिशन अक्टूबर में लॉन्च होने वाला है और इसका मकसद स्कूली छात्रों को सैटेलाइट डेवलपमेंट और इंटरनेशनल स्पेस कोलेबोरेशन का प्रैक्टिकल अनुभव देना है।

