rbi bank assistant vacancy : आरबीआई असिस्टेंट पद के लिए क्या योग्यता चाहिए? कौन इसमें अप्लाई कर सकता है? ये भी जान लें

rbi bank assistant vacancy : आरबीआई असिस्टेंट पद के लिए क्या योग्यता चाहिए? कौन इसमें अप्लाई कर सकता है? ये भी जान लें

How to apply for RBI Assistant 2026  : रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने एक और नई भर्ती का विज्ञापन जारी कर दिया है। आरबीआई ने 650 पदों पर असिस्टेंट की रिक्तियां निकाली हैं। इसके लिए आधिकारिक वेबसाइट opportunities.rbi.org.in पर भर्ती विज्ञापन जारी हो गया है। ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया भी 16 फरवरी 2026 से शुरू हो गई है। आइए जानते हैं इसके लिए कौन आवेदन कर सकता है और इसके लिए क्या योग्यताएं हैं। उम्मीदवार सलाह दी जाती है कि वे आवेदन करने से पहले आधिकारिक वेबसाइट पर मौजूद 'नोटिफिकेशन PDF' को ध्यान से पढ़ें ताकि फॉर्म भरते समय कोई गलती न हो।

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rbi bank assistant  के लिए क्या शैक्षणिक योग्यता

इन पदों पर आवेदान के लिए  उम्मीदवारों का किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से न्यूनतम 50 प्रतिशत अंकों के साथ ग्रेजुएट होना चाहिए। एससी/एसटी/पीडब्ल्यूबीडी कैंडिडेट्स केवल पास हैं, तब भी अप्लाई कर सकेंगे। अभ्यर्थी जिस भी रिक्रूटिंग ऑफिस के लिए अप्लाई कर रहे हैं, वहां की स्थानीय भाषा को बोलना, लिखना और पढ़ना आना चाहिए। 

rbi bank assistant के लिए कितनी उम्र होना जरूरी

आवेदक की उम्र न्यूनतम 20 वर्ष और अधिकतम 28 वर्ष तक होनी चाहिए। यानी कैंडिडेट्स की जन्मतिथि 2 फरवरी 1998 से पहले और 1 फरवरी 1006 के बाद की नहीं होनी चाहिए। आवेदक की आयु 20 से 28 वर्ष के बीच होनी चाहिए। सरकारी नियमों के अनुसार आरक्षित वर्गों को अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी।

 

कब तक कर सकते हैं आवेदन 

8 मार्च तक कर सकते हैं ऑनलाइन आवेदन

इच्छुक और पात्र उम्मीदवार आरबीआई की आधिकारिक वेबसाइट rbi.org.in पर जाकर अपना आवेदन जमा कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरने की अंतिम तिथि 8 मार्च 2026 निर्धारित की गई है। 

 

RBI असिस्टेंट वैकेंसी 2025 स्टेटवाइज

आरबीआई ने असिस्टेंट की ये वैकेंसी अपने देशभर के ऑफिसों के लिए घोषित की हैं। आप यहां से चेक कर सकते हैं कि किस जगह कितनी रिक्तियां निकाली हैं? आरबीआई ने यह नियुक्तियां अलग-अलग राज्यों और श्रेणियों (Category-wise) के आधार पर निकाली हैं। नोटिफिकेशन में परीक्षा की तारीखों, सिलेबस और चयन प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी गई है। चयन प्रक्रिया में मुख्य रूप से प्रीलिम्स परीक्षा, मेन्स परीक्षा और भाषा प्रवीणता परीक्षा (LPT) शामिल होगी। Edited by : Sudhir Sharma

Success in Exams: एक्जाम में पाना है अच्छी सक्सेस, तो करें ये 5 खास उपाय

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एग्जाम सक्सेस टिप्स संबंधी शानदार फोटो

Exam success remedies tips: परीक्षा का समय न केवल छात्रों के लिए बल्कि अभिभावकों के लिए भी तनाव भरा होता है। परीक्षा में सफलता के लिए सबसे पहले स्पष्ट लक्ष्य (Clear Goal) निर्धारित करना आवश्यक है। सही दिशा में की गई मेहनत ही आपको एग्जाम में टॉप करा सकती है। यदि मेहनत के साथ-साथ सही रणनीति, एकाग्रता और कुछ ज्योतिषीय उपायों का तालमेल बैठ जाए, तो सफलता की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।ALSO READ: अमेरिका, कनाडा पीछे छूटे, अब पढ़ाई के लिए यहां जा रहे भारतीय

 

  1. अध्ययन की सही दिशा
  2. एकाग्रता बढ़ाने के लिए ज्योतिषीय उपाय
  3. 'याद रखने' की वैज्ञानिक तकनीक
  4. परीक्षा के दिन के विशेष उपाय
  5. खान-पान और जीवनशैली
  6. बुध ग्रह के लिए एक विशेष उपाय:
  7. एग्जाम सक्सेस-FAQ

 

परीक्षा में शानदार सफलता पाने के लिए यहां कुछ खास और प्रभावी उपाय दिए गए हैं:

 

1. अध्ययन की सही दिशा 

मुख की दिशा: पढ़ाई करते समय हमेशा अपना मुख पूर्व (East) या उत्तर (North) दिशा की ओर रखें। यह दिशा सकारात्मक ऊर्जा और ज्ञान की मानी जाती है।

 

पीठ का सहारा: पढ़ाई करते समय आपकी पीठ के पीछे ठोस दीवार होनी चाहिए, खिड़की नहीं। इससे एकाग्रता बढ़ती है।

 

2. एकाग्रता बढ़ाने के लिए ज्योतिषीय उपाय

सरस्वती मंत्र का जाप: प्रतिदिन पढ़ाई शुरू करने से पहले मां सरस्वती का ध्यान करें और इस मंत्र का 11 बार जाप करें:

 

'ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः'

 

गायत्री मंत्र: सुबह उठकर 3 बार गायत्री मंत्र का जाप करने से बुद्धि प्रखर होती है और स्मरण शक्ति (Memory) तेज होती है।

 

मिश्री और सौंफ: पढ़ने बैठने से पहले थोड़ी सी मिश्री और सौंफ खाएं, इससे मस्तिष्क को ग्लूकोज मिलता है और एकाग्रता बढ़ती है।

 

3. 'याद रखने' की वैज्ञानिक तकनीक

45:15 का नियम: लगातार 3-4 घंटे न पढ़ें। हर 45 मिनट की पढ़ाई के बाद 15 मिनट का ब्रेक लें। इससे आपका दिमाग जानकारी को बेहतर तरीके से 'स्टोर' कर पाता है।

 

लिखकर याद करें: जो भी पढ़ें, उसे एक बार बिना देखें लिखने की कोशिश करें। 'एक बार लिखना, दस बार पढ़ने के बराबर होता है।'

 

4. परीक्षा के दिन के विशेष उपाय

दही और चीनी: परीक्षा देने घर से निकलने से पहले थोड़ा सा दही और चीनी खाकर निकलें। यह शुभ माना जाता है और शरीर को ऊर्जा देता है।

 

माता-पिता का आशीर्वाद: घर से निकलते समय अपने माता-पिता और बड़े-बुजुर्गों के चरण स्पर्श जरूर करें। उनकी दुआएं आत्मविश्वास बढ़ाती हैं।
 

5. खान-पान और जीवनशैली

हल्का भोजन: परीक्षा के दिनों में भारी और तला-भुना खाना न खाएं। इससे सुस्ती और नींद आती है। फल और ड्राई फ्रूट्स का सेवन बढ़ाएं।

 

पानी का भरपूर सेवन: मस्तिष्क का अधिकांश हिस्सा पानी है। हाइड्रेटेड रहने से दिमाग तेजी से काम करता है।

 

बुध ग्रह के लिए एक विशेष उपाय:

बुद्धि का कारक बुध ग्रह माना जाता है। यदि पढ़ाई में मन बिल्कुल नहीं लग रहा हो, तो बुधवार के दिन गणेश जी को दूर्वा (घास) चढ़ाएं और उन्हें 'बुद्धि विधाता' मानकर प्रार्थना करें।

 

एग्जाम सक्सेस-FAQ

 

1. एग्जाम में अच्छे नंबर कैसे लाएं?

एग्जाम में अच्छे नंबर लाने के लिए नियमित पढ़ाई, सही टाइमटेबल, रोजाना रिवीजन और मॉक टेस्ट का अभ्यास जरूरी है। कठिन विषयों पर अधिक ध्यान दें और पिछले साल के प्रश्नपत्र हल करें।

 

2. एग्जाम की तैयारी कब से शुरू करनी चाहिए?

परीक्षा की तैयारी जितनी जल्दी शुरू करें उतना बेहतर है। आदर्श रूप से परीक्षा से 3–6 महीने पहले नियमित अध्ययन शुरू कर देना चाहिए।

 

3. पढ़ाई में मन कैसे लगाएं?

पढ़ाई के लिए शांत वातावरण चुनें, मोबाइल से दूरी बनाएं, छोटे-छोटे लक्ष्य निर्धारित करें और हर लक्ष्य पूरा होने पर खुद को मोटिवेट करें।

 

4. टाइम मैनेजमेंट कैसे करें?

* पढ़ाई का दैनिक टाइमटेबल बनाएं

* कठिन विषय पहले पढ़ें

* हर 45–50 मिनट बाद 5–10 मिनट का ब्रेक लें

* रिवीजन के लिए अलग समय निर्धारित करें।

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: Pariksha Par Samvad : लक्ष्य पर ध्यान और कड़ी मेहनत, CM डॉ. यादव ने स्टूडेंट्स को दिए पढ़ाई के मंत्र

UP Police Constable Exam Date 2026 : यूपी कांस्टेबल परीक्षा की तारीख का ऐलान

UP Police Constable Exam Date 2026 : यूपी कांस्टेबल परीक्षा की तारीख का ऐलान

उत्तर प्रदेश पुलिस में बतौर सिपाही भर्ती होने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर है। योगी सरकार ने आरक्षी नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों पर सीधी भर्ती-2025 के तहत होने वाली लिखित परीक्षा की तारीखें घोषित कर दी हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड (UPPBPB) की ओर से मंगलवार को जारी सूचना के अनुसार सिपाही भर्ती-2025 की लिखित परीक्षा 8 जून (सोमवार), 9 जून (मंगलवार) और 10 जून (बुधवार) को आयोजित की जाएगी।

यह परीक्षा तीनों दिनों में दो-दो पालियों में कराई जाएगी। इस भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से कुल 32,679 पदों को भरा जाएगा। सिपाही भर्ती परीक्षा से संबंधित अन्य जानकारी, परीक्षा केंद्र, एडमिट कार्ड एवं दिशा-निर्देश उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किए जाएंगे।

 

अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत बना योगी सरकार का फैसला

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश में पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं को योगी आदित्यनाथ सरकार ने वर्तमान सिपाही भर्ती प्रक्रिया में बड़ी राहत दी है। अभ्यर्थियों के हितों को प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री के निर्देश पर पुलिस में आरक्षी नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों पर प्रस्तावित सीधी भर्ती-2025 के लिए अधिकतम आयु सीमा में एकमुश्त तीन वर्ष का शिथिलीकरण प्रदान किया गया है। सरकार द्वारा यह निर्णय उत्तर प्रदेश लोक सेवा (भर्ती के लिए आयु सीमा का शिथिलीकरण) नियमावली-1992 के नियम-3 के आलोक में लिया गया। यह फैसला 31 दिसंबर 2025 को जारी भर्ती विज्ञप्ति के अनुक्रम में 5 जनवरी 2026 को जारी शासनादेश के माध्यम से लागू किया गया, जिससे बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थियों को अवसर मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ जो आयु सीमा के कारण अब तक भर्ती प्रक्रिया से बाहर हो रहे थे।

 

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा वर्ष 2024 में प्रदेश में कांस्टेबल के कुल 60,244 पदों पर भर्तियां की गई थीं। यह प्रदेश सरकार की अब तक की सबसे बड़ी भर्ती थी। भर्ती प्रक्रिया के अंतर्गत चयनित सभी पदों में से 20 प्रतिशत पद महिलाओं के लिए आरक्षित रखते हुए उन्हें नियुक्ति प्रदान की गई है।

Work From Home: घर में इस दिशा में बैठकर करेंगे काम, तो करियर में मिलेगी दोगुनी तरक्की

Work From Home: घर में इस दिशा में बैठकर करेंगे काम, तो करियर में मिलेगी दोगुनी तरक्की

वर्क फ्रॉम होम वास्तु दिशा का फोटो

Work From Home: आजकल वर्क फ्रॉम होम का ट्रेंड बहुत बढ़ गया है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके घर में बैठने की दिशा का असर आपके करियर पर भी पड़ता है? वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में काम करने के लिए सही दिशा का चुनाव करने से न केवल आपके करियर की प्रगति होती है, बल्कि आप मानसिक शांति और ध्यान केंद्रित करने में भी सक्षम होते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार, कार्यक्षेत्र की दिशा न केवल आपकी उत्पादकता यानी Productivity को प्रभावित करती है, बल्कि नए अवसरों के द्वार भी खोलती है।ALSO READ: Vastu for Toilet: वास्तु के अनुसार यदि नहीं है शौचालय तो राहु होगा सक्रिय

 

इस लेख में हम आपको बताने जा रहे हैं कि आपके काम करने के लिए सबसे शुभ दिशा कौन सी हो सकती है, ताकि आप करियर में दोगुनी तरक्की पा सकें।

 

  1. वर्क फ्रॉम होम बैठने की सही दिशा
  2. पीठ का सहारा
  3. मेज की स्थिति
  4. इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स
  5. वर्क फ्रॉम होम-FAQs:

 

वर्क फ्रॉम होम में सही दिशा


घर में काम करने के लिए उत्तर या उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा सबसे उत्तम है। यह दिशा कुबेर और सफलता की मानी जाती है।

 

पीठ का सहारा


बैठते समय ध्यान रखें कि आपकी पीठ के पीछे ठोस दीवार हो, खिड़की नहीं। यह स्थिरता प्रदान करता है।

 

मेज की स्थिति


काम की मेज (Desk) आयताकार या वर्गाकार होनी चाहिए। गोल या टेढ़ी-मेढ़ी मेज से बचें।

 

इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स


लैपटॉप और अन्य गैजेट्स को मेज के दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण) हिस्से में रखें।ALSO READ: Vastu Remedies: वास्तु दोष निवारण के सबसे असरदार 5 उपाय

 

वर्क फ्रॉम होम-FAQs:

 

Q 1. क्या वर्क फ्रॉम होम करते समय दिशा का असर पड़ता है?

A. हां, वर्क फ्रॉम होम करते समय सही दिशा का चुनाव आपके करियर की सफलता और मानसिक शांति में मदद करता है।

 

Q 2. घर में काम करने के लिए कौन सी दिशा सबसे शुभ है?

A. पूर्व और उत्तर दिशा वर्क फ्रॉम होम के लिए सबसे शुभ मानी जाती हैं।

 

Q 4. क्या बेडरूम में काम करना सही है? 

A. नहीं, इससे सुस्ती आती है। संभव हो तो अलग कमरा या कोना चुनें।

 

Q 3. बैठते समय चेहरा किस तरफ हो? 

A. हमेशा उत्तर या पूर्व की ओर चेहरा करके बैठें।

 

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: Vastu tips: ऐसा रखें घर का वास्तु, जानें 5 टिप्स, मिलेंगे बेहतरीन लाभ

 

परीक्षा, तनाव और विद्यार्थी : दबाव के बीच संतुलन की राह

परीक्षा, तनाव और विद्यार्थी : दबाव के बीच संतुलन की राह

परीक्षा की तैयारी को लेकर तनाव में विद्यार्थी

आज का विद्यार्थी केवल किताबों से नहीं जूझ रहा, वह अपेक्षाओं, प्रतिस्पर्धा और परिस्थितियों के बहुआयामी दबाव में जी रहा है। परीक्षा नजदीक है। एक ओर माता-पिता की उम्मीदों का अदृश्य बोझ है, दूसरी ओर गला काट प्रतिस्पर्धा का भय। पाठ्यक्रम पूरा करने की चिंता, अच्छे अंक लाने का दबाव, भविष्य को लेकर अनिश्चितता, और इन सबके बीच प्रदूषित वातावरण तथा डिजिटल विचलन इन परिस्थितियों में विद्यार्थी परीक्षा कक्ष की ओर बढ़ रहा है।


मैं यह लेख किसी उपदेशक की तरह नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक मित्र की तरह लिख रहा हूं जो विद्यार्थियों से यह कहता है कि तनाव स्वाभाविक है, पर उसके अधीन होना आवश्यक नहीं।

  1. तनाव को पहले समझें, फिर संभालें
  2. परीक्षा की तैयारी : सही दिशा, सही दृष्टि
  3. कैसे पढ़ें ताकि याद रहे
  4. परीक्षा के ठीक पहले : क्या करें, क्या न करें
  5. प्रश्न पत्र हल करने की तकनीक
  6. कठिन परिस्थिति में तनाव प्रबंधन
  7. माता-पिता की अपेक्षाएं और विद्यार्थी
  8. माता-पिता, विद्यालय और शिक्षक : त्रिकोणीय संतुल
  9. प्रतिस्पर्धा से सहयोग की ओर
  10. प्रदूषण और स्वास्थ्य : अनदेखा पहलू
  11. आत्मविश्वास : सबसे बड़ा हथियार

 

* तनाव को पहले समझें, फिर संभालें

 

तनाव कोई शत्रु नहीं है। थोड़ी मात्रा में तनाव हमें सजग बनाता है, पर जब वह डर में बदल जाए, तब समस्या बनता है। तनाव कोई असामान्य स्थिति नहीं है। परीक्षा से पहले घबराहट होना स्वाभाविक है। समस्या तब होती है, जब तनाव डर का रूप ले लेता है अधिकांश विद्यार्थी यह मान लेते हैं कि परीक्षा में असफल होना जीवन में असफल होना है, जबकि यह सोच ही सबसे बड़ा तनाव पैदा करती है।

 

परीक्षा का तनाव प्रायः तीन कारणों से जन्म लेता है पहला, अपेक्षाओं का दबाव दूसरा, तैयारी की असंतुलित रणनीति तीसरा, स्वयं पर विश्वास की कमी यदि विद्यार्थी यह समझ ले कि परीक्षा जीवन का एक पड़ाव है, पूरा जीवन नहीं, तो तनाव की तीव्रता स्वतः कम होने लगती है।

 

विद्यालय और शिक्षक की भूमिका यहीं से शुरू होती है। यदि शिक्षक कक्षा में यह वातावरण बना दें कि परीक्षा सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा है, अंतिम सत्य नहीं, तो विद्यार्थी का भय आधा हो जाता है। जब शिक्षक कहते हैं तुम प्रयास करो, परिणाम हम मिलकर संभालेंगे तो छात्र का मन हल्का हो जाता है।

 

* परीक्षा की तैयारी : सही दिशा, सही दृष्टि

 

परीक्षा के पहले कुछ सप्ताह अत्यंत संवेदनशील होते हैं। इस समय विद्यालय का वातावरण निर्णायक भूमिका निभाता है। यदि विद्यालय में डर का माहौल हो, केवल परिणाम की चर्चा हो, तो तनाव बढ़ता है। यदि विद्यालय में विश्वास का वातावरण हो, जहां शिक्षक कहते हों हम साथ हैं तो विद्यार्थी मजबूत बनता है।

 

इस समय शिक्षकों को चाहिए कि वे अतिरिक्त दबाव न डालें छात्रों की मानसिक स्थिति को समझें अनावश्यक तुलना से बचें एक समझदार शिक्षक जानता है कि इस समय एक प्रेरक वाक्य, दस प्रश्नों से अधिक प्रभावी होता है। परीक्षा की तैयारी का अर्थ केवल घंटों पढ़ना नहीं, बल्कि समझदारी से पढ़ना है।

 

– सबसे पहले, पाठ्यक्रम को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटिए। पूरा सिलेबस एक साथ देखने से डर पैदा होता है। जब उसे अध्यायों, विषयों और उपविषयों में बांट दिया जाता है, तो वह प्रबंधनीय हो जाता है।

 

– दूसरा, पढ़ने का समय निश्चित कीजिए। अनियमित पढ़ाई मन को भ्रमित करती है। रोज़ का एक निश्चित समय भले कम हो, पर नियमित हो अधिक प्रभावी होता है।

 

– तीसरा, पढ़ते समय तुलना न करें। कोई मित्र अधिक पढ़ रहा है, कोई तेज़ समझ रहा है यह सोच आपकी ऊर्जा को कम करती है। आपकी क्षमता आपकी है, उसी पर भरोसा रखें।

 

* कैसे पढ़ें ताकि याद रहे

 

पढ़ाई का सबसे बड़ा प्रश्न यही है पढ़ा हुआ याद कैसे रहे? इसके लिए तीन सूत्र अत्यंत उपयोगी हैं पहला, समझकर पढ़ना दूसरा, लिखकर अभ्यास करना तीसरा, बार-बार दोहराना।

 

सिर्फ़ पढ़ लेने से विषय स्थायी नहीं होता। महत्वपूर्ण बिंदुओं को अपने शब्दों में लिखिए। जहां संभव हो, चार्ट, तालिका और माइंड मैप बनाइए। यह मस्तिष्क को दृश्य संकेत देता है, जिससे स्मरण शक्ति बढ़ती है।

 

रटने की बजाय अर्थ समझिए। जो बात समझ में आ जाती है, वह डर नहीं बनती।

 

* परीक्षा के ठीक पहले : क्या करें, क्या न करें

 

परीक्षा से कुछ दिन पहले नया पाठ शुरू करने से बचें। इस समय का उपयोग केवल पुनरावृत्ति के लिए करें। यह वह समय है जब आत्मविश्वास बनाया जाता है, न कि स्वयं को भ्रमित किया जाता है।

 

रात को देर तक जागने की आदत छोड़ें। नींद मस्तिष्क के लिए उतनी ही आवश्यक है जितनी पढ़ाई। थका हुआ मस्तिष्क सीखी हुई बातों को भी भूल जाता है। खान-पान हल्का और संतुलित रखें। अत्यधिक चाय, कॉफी या जंक फूड तनाव बढ़ाता है।

 

* प्रश्न पत्र हल करने की तकनीक

 

परीक्षा कक्ष में प्रवेश करते ही घबराहट होना सामान्य है, पर उसे हावी न होने दें। सबसे पहले, प्रश्न पत्र को ध्यान से पढ़ें जल्दबाज़ी में उत्तर लिखना गलतियां बढ़ाता है।

 

जिन प्रश्नों के उत्तर अच्छे से आते हों, उन्हें पहले हल करें। इससे आत्मविश्वास बनता है और समय का संतुलन भी रहता है। उत्तर लिखते समय साफ़-सुथरी भाषा और स्पष्ट अक्षरों का ध्यान रखें। उत्तर को बिंदुओं में लिखना, जहां संभव हो, परीक्षक के लिए भी सुविधाजनक होता है। समय प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। किसी एक प्रश्न में अधिक समय न लगाएं। हर प्रश्न के लिए समय पहले ही मन में बांट लें। 

 

* कठिन परिस्थिति में तनाव प्रबंधन

 

यदि परीक्षा के दौरान कोई प्रश्न कठिन लग जाए, तो घबराएं नहीं। कुछ गहरी सांसें लें। मस्तिष्क को कुछ क्षण का विराम दें। कई बार उत्तर थोड़ी देर बाद स्वतः स्पष्ट हो जाता है। यदि उत्तर पूरा न आए, तो जितना आता है उतना सही ढंग से लिखिए। अधूरा प्रयास भी शून्य नहीं होता। खुद से यह कहें मैं पूरी कोशिश कर रहा हूँ। यही भावना तनाव को कम करती है।

 

* माता-पिता की अपेक्षाएं और विद्यार्थी

 

यह सच है कि माता-पिता अपने बच्चों से बहुत उम्मीदें रखते हैं। पर विद्यार्थी को यह समझना चाहिए कि अधिकांश अभिभावक सफलता से अधिक सुरक्षा और स्थिरता चाहते हैं। उनसे संवाद करें। अपनी कठिनाइयों को साझा करें। चुप्पी तनाव को बढ़ाती है। माता-पिता के लिए भी यह आवश्यक है कि वे परिणाम से पहले प्रयास को सराहें। परीक्षा के समय बच्चे को सहयोग चाहिए, तुलना नहीं।

 

* माता-पिता, विद्यालय और शिक्षक : त्रिकोणीय संतुलन

 

– विद्यार्थी सबसे अधिक दबाव तब महसूस करता है, जब विद्यालय और घर से विरोधाभासी संदेश मिलते हैं।

– यदि विद्यालय माता-पिता को यह समझा सके कि अंक से अधिक महत्व प्रयास का है तो घर का दबाव कम होता है।

– शिक्षक और अभिभावक के बीच संवाद विद्यार्थी के मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है।

– जब माता-पिता कहते हैं हम तुम्हारे साथ हैं तो विद्यार्थी का आत्मविश्वास कई गुना बढ़ जाता है।

 

* प्रतिस्पर्धा से सहयोग की ओर

 

गला काट प्रतिस्पर्धा का दौर हमें यह भूलने पर मजबूर कर देता है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल आगे निकलना नहीं, बल्कि समझदार बनना है। दूसरों से आगे निकलने की होड़ में स्वयं को पीछे न छोड़ दें। सहयोग, चर्चा और सामूहिक अध्ययन तनाव को कम करता है और सीख को गहरा करता है।

 

* प्रदूषण और स्वास्थ्य : अनदेखा पहलू

 

आज का वातावरण शारीरिक ही नहीं, मानसिक प्रदूषण से भी भरा है। लगातार शोर, स्क्रीन और नकारात्मक समाचार मन को थका देते हैं। पढ़ाई के बीच थोड़ी देर खुली हवा में टहलना, हल्का व्यायाम या ध्यान करना अत्यंत लाभकारी है। यह मन को स्थिर करता है और एकाग्रता बढ़ाता है।

 

* आत्मविश्वास : सबसे बड़ा हथियार

 

अंततः, परीक्षा का सबसे महत्वपूर्ण तत्व है आत्मविश्वास। आत्मविश्वास न तो रातों-रात आता है, न दूसरों से उधार लिया जा सकता है। यह छोटे-छोटे प्रयासों से बनता है। 

 

हर दिन स्वयं से यह कहिए मैं सीख रहा हूं, मैं प्रयास कर रहा हूं, मैं सक्षम हूं। 

ये तीन वाक्य परीक्षा के सबसे बड़े उत्तर बन जाते हैं।

 

परीक्षा जीवन का निर्णायक क्षण नहीं, बल्कि स्वयं को परखने का अवसर है। तनाव, दबाव और अपेक्षाएँ इस यात्रा का हिस्सा हैं, पर मंज़िल नहीं।

 

यदि विद्यार्थी सही दिशा में तैयारी करे, संतुलित जीवन जिए, स्वयं पर विश्वास रखे और परिस्थितियों को समझदारी से संभाले, तो परीक्षा केवल अंकपत्र नहीं, आत्मविश्वास की प्रमाणपत्र बन जाती है।

 

याद रखिए आप परीक्षा देने जा रहे हैं, परीक्षा आपको परिभाषित करने नहीं।

आपका मूल्य आपकी मेहनत, आपकी ईमानदारी और आपकी संवेदनशीलता में है।

सफलता एक परिणाम है,पर संतुलित मन और स्वस्थ दृष्टि वही वास्तविक विजय है।

 

(वेबदुनिया पर दिए किसी भी कंटेट के प्रकाशन के लिए लेखक/वेबदुनिया की अनुमति/स्वीकृति आवश्यक है, इसके बिना रचनाओं/लेखों का उपयोग वर्जित है…)

राज्य ओपन स्कूल शिक्षा बोर्ड के नाम पर साइबर ठगी से रहें सावधान

राज्य ओपन स्कूल शिक्षा बोर्ड के नाम पर साइबर ठगी से रहें सावधान

Madhya Pradesh News : प्रदेश में राज्य ओपन स्कूल शिक्षा बोर्ड के परीक्षार्थियों के अभिभावकों से साइबर ठगों द्वारा ठगी किए जाने का मामला सामने आया है। ठगों द्वारा स्वयं को बोर्ड से संबंधित बताकर परीक्षार्थियों को पास कराने के नाम पर धनराशि मांगी जा रही है। धोखाधड़ी की जा रही है। इधर, मामला सामने आने के बाद राज्य ओपन स्कूल शिक्षा बोर्ड ने विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए हेल्पलाइन नंबर 0755-2671066 जारी किया है।

साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि  जिन नामों से फोन कॉल किए जा रहे हैं, उस नाम का कोई भी व्यक्ति राज्य ओपन स्कूल शिक्षा बोर्ड में कार्यरत नहीं है। इस प्रकार से किसी को पास कराना पूर्णतः असंभव है। परीक्षार्थियों का परिणाम केवल उत्तर पुस्तिकाओं में लिखे गए उत्तरों के मूल्यांकन के आधार पर ही घोषित किया जाता है।

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राज्य ओपन स्कूल बोर्ड द्वारा ऐसे साइबर ठगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर वैधानिक कार्यवाही की जा रही है।  विद्यार्थियों एवं अभिभावकों से अपील है कि वे इस प्रकार के किसी भी प्रलोभन में न आएं और स्वयं तथा अपने बच्चों को साइबर ठगी से सुरक्षित रखें। किसी भी प्रकार की जानकारी, शिकायत अथवा सत्यापन के लिए बोर्ड द्वारा जारी किए गए हेल्पलाइन पर संपर्क किया जा सकता है।

आरक्षण पर Supreme Court का बड़ा फैसला, जनरल कैटेगरी कोई कोटा नहीं, मेरिट सबके लिए समान

आरक्षण पर Supreme Court का बड़ा फैसला, जनरल कैटेगरी कोई कोटा नहीं, मेरिट सबके लिए समान

Supreme Court's big decision : उच्‍चतम न्‍यायालय ने आरक्षण व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बड़ा और दूरगामी असर डालने वाला फैसला सुनाया है। न्‍यायालय ने अपने फैसले में कहा कि आरक्षित वर्ग का कट-ऑफ जनरल से ज्यादा हो और आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार जनरल कट-ऑफ पार करता है, तो जनरल कोटे में उसका चयन किया जा सकता है। न्‍यायालय ने कहा कि जनरल कैटेगरी में सभी मेधावी छात्रों को जगह मिलनी चाहिए, फिर चाहे वो किसी भी जाति, धर्म, जनजाति, वर्ग या लिंग का हो। न्‍यायालय का कहना है कि फॉर्म में अपनी जाति लिख देना अपने आप में आरक्षित सीट पाने का अधिकार नहीं देता, बल्कि सिर्फ यह बताता है कि उम्मीदवार आरक्षित सूची में भी दावेदार हो सकता है।

खबरों के अनुसार, उच्‍चतम न्‍यायालय ने सरकारी नौकरी में आरक्षण को लेकर अपने अहम फैसले में कहा कि आरक्षित वर्ग का कट-ऑफ जनरल से ज्यादा हो और आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार जनरल कट-ऑफ पार करता है, तो जनरल कोटे में उसका चयन किया जा सकता है।

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न्‍यायालय ने कहा कि जनरल कैटेगरी में सभी मेधावी छात्रों को जगह मिलनी चाहिए, फिर चाहे वो किसी भी जाति, धर्म, जनजाति, वर्ग या लिंग का हो। न्‍यायालय का कहना है कि फॉर्म में अपनी जाति लिख देना अपने आप में आरक्षित सीट पाने का अधिकार नहीं देता, बल्कि सिर्फ यह बताता है कि उम्मीदवार आरक्षित सूची में भी दावेदार हो सकता है।

शीर्ष न्‍यायालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि ‘जनरल’ या ‘ओपन कैटेगरी’ कोई अलग कोटा नहीं है, बल्कि यह सभी वर्गों के उम्मीदवारों के लिए खुली प्रतियोगिता का मंच है। यदि कोई अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) या आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) का उम्मीदवार बिना किसी आरक्षण लाभ के सामान्य कट-ऑफ के आधार पर चयनित होता है, तो उसे जनरल श्रेणी में ही माना जाएगा।

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यह मामला तब उठा जब विभिन्न राज्यों और केंद्रीय भर्तियों में यह देखा गया कि कई बार आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार सामान्य मेरिट से चयनित होने के बावजूद उन्हें आरक्षित कोटे में ही गिना जाता है। इससे एक ओर आरक्षित सीटों पर दबाव बढ़ता था, तो दूसरी ओर मेरिट का सही मूल्यांकन नहीं हो पाता था।

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फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज है। कुछ दल इसे मेरिट का सम्मान बता रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि इससे आरक्षण की भावना कमजोर हो सकती है। हालांकि सरकार की ओर से संकेत दिए गए हैं कि उच्‍चतम न्‍यायालय के निर्देशों के अनुसार नियमों में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। संवैधानिक विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला आरक्षण को खत्म नहीं करता, बल्कि उसे अधिक तार्किक और प्रभावी बनाता है।
Edited By : Chetan Gour

10th board exams 2026: 10वीं बोर्ड परीक्षा की तैयारी कैसे करें?

10th board exams 2026: 10वीं बोर्ड परीक्षा की तैयारी कैसे करें?

10th board exams 2026: 10वीं बोर्ड की परीक्षा आपके शैक्षणिक जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। सही रणनीति और अनुशासन के साथ आप न केवल अच्छे अंक ला सकते हैं, बल्कि अपना आत्मविश्वास भी बढ़ा सकते हैं। यहीं से तय होता है छात्रों के करियर चुनने का रास्ता और तय होता है भविष्‍य। इसलिए यहां तैयारी के लिए कुछ अचूक टिप्स दिए गए हैं।

 

1. एक संतुलित टाइम-टेबल बनाएं

सभी विषयों को समय दें: कठिन विषयों (जैसे गणित या विज्ञान) को सुबह के समय रखें जब आपका दिमाग ताज़ा होता है।

छोटे ब्रेक लें: लगातार 3-4 घंटे न पढ़ें। हर 50 मिनट की पढ़ाई के बाद 10 मिनट का ब्रेक लें।

 

2. NCERT को अपनी 'गीता' मानें: 

बोर्ड परीक्षा के ज़्यादातर सवाल NCERT की किताबों से ही आते हैं। इसके सवाल श्लोक या सूत्रों जैसे हैं। इसलिए हर चैप्टर के पीछे दिए गए अभ्यास (Exercises) को कम से कम दो बार हल करें।

 

3. नोट्स बनाने की आदत डालें:

पढ़ते समय महत्वपूर्ण सूत्रों (Formulas), तारीखों और परिभाषाओं के छोटे नोट्स बनाएं। परीक्षा के आखिरी दिनों में ये 'क्विक रिवीजन' के लिए बहुत काम आते हैं।

 

4. पिछले वर्षों के प्रश्न पत्र (PYQs) हल करें:

पिछले 5-10 साल के पेपर्स हल करने से आपको परीक्षा के पैटर्न और महत्वपूर्ण टॉपिक्स का अंदाज़ा हो जाएगा।

समय सीमा तय करके (3 घंटे) घर पर पेपर सॉल्व करें ताकि आपकी लिखने की स्पीड बढ़े।

 

5. लिखकर अभ्यास करें:

अक्सर छात्र पढ़ तो लेते हैं, लेकिन परीक्षा में लिख नहीं पाते। गणित के सवाल और विज्ञान के डायग्राम को बार-बार बनाकर देखें। साफ सुथरी हैंडराइटिंग और पॉइंट्स में उत्तर देने का प्रयास करें।

 

विषय-वार विशेष टिप्स:

गणित: रोज़ाना कम से कम 10-15 सवाल हल करें। सूत्रों का चार्ट बनाकर दीवार पर चिपका लें।

विज्ञान: डायग्राम्स और रसायनिक समीकरणों (Equations) का अभ्यास करें। सिद्धांतों को रटने के बजाय समझें।

सामाजिक विज्ञान: इतिहास की तारीखों के लिए एक टाइमलाइन बनाएं। भूगोल में मैप (Map) की प्रैक्टिस ज़रूर करें।

भाषा (हिंदी/अंग्रेजी): व्याकरण (Grammar) पर ध्यान दें और पत्र लेखन/निबंध के फॉर्मेट को समझें।

 

स्वास्थ्य का भी रखें ध्यान

पूरी नींद लें: कम से कम 7-8 घंटे की नींद ज़रूरी है ताकि दिमाग जानकारी को स्टोर कर सके।

हल्का खाना खाएं: ज्यादा भारी या जंक फूड से सुस्ती आ सकती है।

 

 

 

Anganwadi Bharti: आंगनवाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका के 4767 पदों पर भर्ती, क्या है योग्यता, कैसे करें आवेदन

Anganwadi Bharti: आंगनवाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका के 4767 पदों पर भर्ती, क्या है योग्यता, कैसे करें आवेदन

Anganwadi

मध्यप्रदेश में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका के 4767 पदों के लिए भर्तियां निकाली गई हैं। इसकी आवेदन करने की अंतिम तारीख 10 जनवरी 2026 है। जानिए क्या है पदों के लिए योग्यता और कैसे करें आवेदन।  आवेदन पत्र में त्रुटि सुधार की अंतिम तिथि 12 जनवरी 2026 निर्धारित की गई है। आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे। 

 

प्रदेश के विभिन्न जिलों में कुल 1,573 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं 3,194 आंगनवाड़ी सहायिका पद, इस प्रकार कुल 4,767 रिक्त पदों पर भर्ती की जाएगी। इनमें दिसंबर 2025 तक के रिक्त पदों के साथ-साथ जनवरी 2026 से जून 2026 तक संभावित रिक्तियां भी सम्मिलित हैं। 

 

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका पद हेतु न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता हायर सेकेंडरी (12वीं उत्तीर्ण) निर्धारित की गई है। साथ ही 01 जनवरी 2025 की स्थिति में आयु 18 से 35 वर्ष के बीच होना आवश्यक है। 

 

आवेदन के समय समस्त आवश्यक प्रमाण पत्र PDF प्रारूप में अपलोड करना अनिवार्य होगा। आवेदन शुल्क 100 रुपए एवं 18 प्रतिशत जीएसटी निर्धारित किया गया है। आवेदिकाएं स्वयं MP Online पोर्टल पर जाकर या अधिकृत कियोस्क के माध्यम से आवेदन कर सकती हैं। Edited by : Sudhir Sharma