किसान कल्याण: जो स्वप्न पीएम मोदी ने देखा, उसे बखूबी पूरा कर रहे माटी के लाल मोहन

किसान कल्याण: जो स्वप्न पीएम मोदी ने देखा, उसे बखूबी पूरा कर रहे माटी के लाल मोहन

'सबका साथ-सबका विकास-सबका विश्वास-सबका प्रयास,' का मंत्र देने वाले देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पद संभालते ही अन्नदाता के कल्याण का स्वप्न देखा था। इस स्वप्न के साथ विकास के अन्य कार्य करते-करते उन्होंने किसानों के कल्याण के लिए कई योजनाएं संचालित कीं। आज उन्होंने अपने कार्यकाल के सफलतम 12 वर्ष पूर्ण कर लिए हैं। इसके मद्देनजर यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि उनके कार्यकाल में किसानों का भला हुआ है। इन 12 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई बार खुद को ग्लोबल लीडर भी सिद्ध किया है। कई मौकों पर विश्व के बड़े राष्ट्रों के अध्यक्षों को प्रधानमंत्री मोदी से मशवरा करते देखा गया है।

 

विशेष बात यह है कि इस व्यस्तता के बीच भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्यप्रदेश को प्राथमिकता की सूची में सदैव रखा। उन्हें जब भी मौका मिला, वे मध्यप्रदेश आए और जनता का भला कर गए। वे जानते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ किसान हैं। कृषि प्रधान राज्य  मध्यप्रदेश के लाखों किसान अपनी मेहनत से देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। उनकी समृद्धि और कल्याण के बिना देश की प्रगति अधूरी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की राज्य सरकार ने किसानों के उत्थान के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं। इन प्रयासों में  बीमा, सिंचाई, फसल विविधीकरण, आधुनिक तकनीक, बाजार सुविधाओं और किसानों की आय दुगनी करने पर पर विशेष जोर दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मोहन यादव सरकार के संयुक्त प्रयासों से प्रदेश में किसानों के कल्याण के लिए अभूतपूर्व कार्य हो रहे हैं।

 

किसान सम्मान निधि से अन्नदाता हुआ खुशहाल

केन्द्र सरकार की सबसे महत्वपूर्ण योजना प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि है। इसके तहत सभी भूमि धारक किसान परिवारों को प्रति वर्ष 6,000 रू की आय सहायता तीन समान किस्तों में सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती है। मध्यप्रदेश में लाखों किसान इस योजना का लाभ उठा रहे हैं। इसी तरह मध्यप्रदेश सरकार भी किसानों को 6000 रुपये महीने देती है। इससे किसानों को जीवन संचालित करने में आसानी होती है। मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के अंतर्गत भी 84 लाख से अधिक किसानों के खातों में 20,878 करोड़ रु से अधिक की राशि का अंतरण किया जा चुका है। 

 

गेहूं उपार्जन में रिकॉर्ड उपलब्धि

वर्ष 2026-27 में गेहूं उपार्जन के लिए प्रदेश के 19 लाख 4 हजार 644 किसानों ने अपना पंजीयन कराया है। गेहूं उपार्जन के लिए इस वर्ष प्रदेश में कुल 3627 उपार्जन केंद्र बनाये गये हैं। बीते उपार्जन वर्ष 2025-26 में 15 लाख 44 हजार 55 किसानों ने गेहूं उपार्जन के लिए पंजीयन कराया था। इस उपार्जन वर्ष के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,625 रूपए प्रति क्विंटल तय किया गया है। मोहन यादव सरकार ने गेहूँ खरीदी के लक्ष्य को 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया है। समर्थन मूल्य पर निर्बाध खरीदी, स्लॉट अवधि बढ़ाने और सप्ताह में छह दिन उपार्जन सुनिश्चित करने जैसे कदमों से मध्य प्रदेश गेहूँ उत्पादन और खरीदी में देश में अग्रणी बना। इससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिला और फसल बिक्री में पारदर्शिता बढ़ी।

 

फसलों पर बोनस, भूमि अधिग्रहण पर ऐतिहासिक फैसला

किसान कल्याण वर्ष के तहत सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि के अधिग्रहण पर बाजार दर का चार गुना मुआवजा देने का प्रावधान किया गया है। यह निर्णय विकास कार्यों और किसानों के हितों के बीच संतुलन बनाते हुए किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर रहा है। उड़द पर समर्थन मूल्य के अतिरिक्त 600 रु प्रति क्विंटल बोनस दिया जा रहा है। सरसों के लिए भावांतर योजना का विस्तार  हुआ है। आपदा प्रभावित किसानों को राहत पैकेज के भी सरकार द्वारा वितरित किए गए हैं।

 

मोहन का मिशन किसान कल्याण

2026 को कृषि कल्याण वर्ष  घोषित कर राज्य सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने, उन्हें आर्थिक सुरक्षा देने और आधुनिक कृषि की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों के उत्थान को अपनी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बनाया है। डबल इंजन सरकार प्रयासों से वर्ष 2026 मध्यप्रदेश के लाखों किसानों के लिए एक नई उम्मीद की किरण साबित हो रहा है, जहां  अनेक योजनाएं धरातल पर उतर रही हैं।

 

‘मोहन’ ने किसानों का मन मोहा

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की किसान-केंद्रित नीतियां व्यावहारिक और दूरदर्शी हैं। भावांतर योजना का विस्तार कर सोयाबीन के बाद सरसों को शामिल किया गया जबकि उड़द और मूंगफली पर समर्थन मूल्य के साथ बोनस की घोषणा हुई। फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स पर सब्सिडी से किसानों को मूल्य संवर्धन का अवसर मिलेगा। खेती का रकबा 2.50 लाख हेक्टेयर बढ़ाने, तीन नदी जोड़ो परियोजना से 16 लाख हेक्टेयर सिंचाई,  माइक्रो इरीगेशन विस्तार, आधुनिक मंडियां, बीज परीक्षण लैब और फसल नुकसान सर्वे के लिए तहसील-स्तरीय मौसम केंद्र जैसी रोडमैप ने किसानों का मन मोह लिया है।  इसके अलावा नि: शुल्क मृदा परीक्षण, गुणवत्तापूर्ण बीज और खाद की उपलब्धता, 24 घंटे बिजली, शून्य ब्याज दर पर फसल ऋण,  भावांतर योजना जैसे कार्यक्रमों को समर्थन दे रही है, जिसमें बाजार मूल्य और एमएसपी के बीच के अंतर की भरपाई की जाती है जिससे किसान परिवारों तक सीधा लाभ पहुँच रहा है।

 

किसानों के प्रति संवेदनशील ‘मोहन’

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव किसानों के हितों के प्रति संवेदनशील हैं। किसानों के हितों में लिए जा रहे अनेक निर्णय न केवल किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है, बल्कि प्रदेश सरकार की किसान कल्याण के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का भी प्रतीक भी बन रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विजन से मध्यप्रदेश में कृषि विकास योजनाएं तेजी से लागू हो रही हैं। किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार योजनाओं की पहुँच परिवारों तक पहुंचाने पर जोर दे रही है। ट्रैक्टर रैली, कृषि प्रदर्शनियों और किसान सम्मेलनों के माध्यम से मोहन सरकार किसानों से सीधा संवाद कर रही है। कैबिनेट ने किसान कल्याण से जुड़ी हजारों करोड़ रुपये की योजनाओं को मंजूरी दी है। 

 

निर्भरता से आत्मनिर्भरता की यात्रा

कृषक मित्र योजना के तहत 90% सब्सिडी पर सोलर सिंचाई पंप वितरित किए गए हैं जिससे किसान बिजली पर निर्भरता कम कर आत्मनिर्भर बन रहे हैं। दुग्ध उत्पादन, मत्स्य पालन, उद्यानिकी और तीसरी फसल को प्रोत्साहन देकर कृषि आय विविधीकरण और जैविक खेती पर विशेष जोर दिया जा रहा है। मध्यप्रदेश  देश का इकलौता राज्य है जहां किसानों को 5 रुपये में बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली और भूसे की मशीनें उपलब्ध कराई जा रही हैं। सरकार की किसान केंद्रित नीतियों एक प्रभाव से प्रदेश में दूध संग्रहण भी काफी तेजी से बढ़ रहा है।  प्रदेश की कृषि वृद्धि दर 16% तक पहुंचने में इन सभी प्रयासों का महत्वपूर्ण योगदान है।

 

देश के विकास में देंगे योगदान

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का मानना है कि किसानों की आमदनी बढ़ाए बिना प्रदेश का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है। प्रत्यक्ष लाभ, उचित मूल्य, आधुनिक सिंचाई, विविधीकरण और आपदा राहत के माध्यम से केन्द्र और राज्य सरकार अन्नदाताओं के हर सुख-दुःख में उनके साथ खड़ी है। ये उपलब्धियां न केवल किसानों को सशक्त बना रही हैं, बल्कि मध्यप्रदेश को कृषि प्रधान राज्य के रूप में नई ऊंचाइयों पर ले जा रही हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का यह दृष्टिकोण न केवल मध्यप्रदेश को कृषि प्रधान राज्य के रूप में स्थापित करेगा, बल्कि किसानों को आत्मनिर्भर बनाकर देश के विकास में अपना योगदान देगा।

प्रधानमंत्री मोदी का फ्रांस दौरा, G7 समिट में होंगे शामिल, कई मुद्दों पर होगी चर्चा, ट्रंप से भी होगी मुलाकात

प्रधानमंत्री मोदी का फ्रांस दौरा, G7 समिट में होंगे शामिल, कई मुद्दों पर होगी चर्चा, ट्रंप से भी होगी मुलाकात

Prime Minister Narendra Modi's visit to France

PM Modi's visit to France : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस के नीस पहुंच चुके हैं। वे 14 जून को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे और 'भारत इनोवेट्स' कार्यक्रम का उद्घाटन भी करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी 14 जून तक नीस में रहेंगे। प्रधानमंत्री मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों के बीच भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी, रक्षा सहयोग, व्यापार, निवेश और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी 16 से 18 जून तक एवियन और पेरिस का दौरा करेंगे। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी G7 समिट में हिस्सा लेंगे। G7 समिट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्ंप से द्विपक्षीय मुलाकात होगी।

 

इन मुद्दों पर हो सकती है चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस के नीस पहुंच चुके हैं। वे 14 जून को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे और 'भारत इनोवेट्स' कार्यक्रम का उद्घाटन भी करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी 14 जून तक नीस में रहेंगे। प्रधानमंत्री मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों के बीच भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी, रक्षा सहयोग, व्यापार, निवेश और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

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अमेरिकी राष्ट्रपति ट्ंप से होगी मुलाकात

इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी 16 से 18 जून तक एवियन और पेरिस का दौरा करेंगे। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी G7 समिट में हिस्सा लेंगे। G7 समिट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्ंप से द्विपक्षीय मुलाकात होगी। व्हाइट हाउस ने शनिवार को इसकी पुष्टि की है। व्हाइट हाउस के मुताबिक, ट्रंप सोमवार सुबह अमेरिका से रवाना होंगे। नीस में 14 जून को प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों के बीच द्विपक्षीय बैठक होगी।

भारतीय समुदाय ने किया गर्मजोशी से स्वागत

दोनों नेता यहां 'भारत इनोवेट्स' कार्यक्रम का मिलकर शुभारंभ भी करेंगे। इस कार्यक्रम में भारत, फ्रांस और अन्य देशों के प्रमुख स्टार्टअप और वेंचर कैपिटल फंड शामिल होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फ्रांस के नीस शहर पहुंचने पर वहां रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। होटल पहुंचते ही बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग उनके स्वागत के लिए एकत्रित हुए और देशभक्ति के माहौल के बीच तिरंगा लहराते हुए उनका अभिनंदन किया।

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भारतीय समुदाय के सदस्यों ने 'भारत माता की जय' और 'मोदी-मोदी' जैसे नारों के साथ उनका स्वागत किया। भारत G7 का सदस्य नहीं है, लेकिन दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्था और महत्वपूर्ण वैश्विक भूमिका के कारण उसे अक्सर विशेष आमंत्रित देश (Guest Country) के रूप में बुलाया जाता है। आमतौर पर भारत के प्रधानमंत्री को समिट का न्यौता मिलता है।

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G7 यानी ‘ग्रुप ऑफ सेवन’, दुनिया के उन 7 देशों का समूह है, जिन्हें दुनिया की 'मॉडर्न इकोनॉमी' वाला देश कहा जाता है। इनमें अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जापान, इटली, कनाडा और जर्मनी शामिल हैं। इसकी शुरुआत 1975 में G6 के रूप में हुई थी। 1976 में कनाडा के जुड़ने के बाद यह G7 बन गया।
Edited By : Chetan Gour

निपुण भारत मिशन को नई धार देगी योगी सरकार, जुलाई में प्रदेशभर में होंगी ‘निपुण संकल्प कार्यशालाएं’

निपुण भारत मिशन को नई धार देगी योगी सरकार, जुलाई में प्रदेशभर में होंगी ‘निपुण संकल्प कार्यशालाएं’

Chief Minister Yogi Adityanath state government is going to make Nipun Bharat Mission even more effective

– बीएसए, बीईओ, डायट, एआरपी और जिला समन्वयकों को एक मंच पर लाकर तैयार होगी जमीनी कार्ययोजना

– शैक्षणिक सत्र 2026-27 की रणनीति, निपुण विद्यालय लक्ष्य और सीखने के परिणामों पर होगा मंथन

– कक्षा 3 से 5 तक निपुण विस्तार, बालवाटिका और संरचित शिक्षण पद्धति पर विशेष फोकस

Uttar Pradesh News : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार निपुण भारत मिशन को और अधिक प्रभावी तथा परिणामोन्मुखी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान को मजबूत करने के साथ-साथ विद्यालयों में सीखने के परिणामों में सुधार लाने के उद्देश्य से जुलाई में प्रदेश के सभी जनपदों में ‘निपुण संकल्प कार्यशालाओं’ का आयोजन किया जाएगा। 

 

प्रदेश के 33 केंद्रों पर 6 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक आयोजित होने वाली इन कार्यशालाओं में विभिन्न जनपदों के शैक्षणिक अधिकारी और विशेषज्ञ प्रतिभाग करेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में शिक्षा क्षेत्र में चल रहे सुधारों की यह पहल निपुण भारत मिशन को जमीनी स्तर पर और मजबूत बनाने के साथ-साथ प्रदेश के लाखों बच्चों को बेहतर अधिगम अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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इन कार्यशालाओं के माध्यम से शैक्षणिक सत्र 2026-27 की रणनीति, निपुण विद्यालय लक्ष्य, विद्यालय गुणवत्ता सुधार, निपुण 2.0, बालवाटिका संचालन तथा डेटा आधारित अनुश्रवण की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। शिक्षा सुधार का वास्तविक प्रभाव तभी दिखाई देता है जब योजनाएं और नीतियां प्रभावी रूप से कक्षा-कक्ष तक पहुंचें।

 

इसलिए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों, खंड शिक्षा अधिकारियों, डायट प्राचार्यों, एआरपी, एसआरजी, डायट मेंटरों तथा जिला समन्वयकों को एक साझा मंच पर लाकर शैक्षणिक गुणवत्ता संवर्धन की रणनीति तैयार की जाएगी। कार्यशालाओं में शैक्षणिक सत्र 2026-27 की अकादमिक रणनीति, निर्धारित शैक्षणिक कैलेंडर, विद्यालय स्तर पर संचालित गतिविधियों तथा निपुण विद्यालय लक्ष्यों पर विशेष मंथन होगा। 

 

कार्यशालाओं में परख (PARAKH) राष्ट्रीय सर्वेक्षण से प्राप्त निष्कर्षों की समीक्षा करते हुए सीखने के परिणामों को बेहतर बनाने की रणनीति तैयार की जाएगी। साथ ही जिला, ब्लॉक और विद्यालय स्तर पर वार्षिक लक्ष्य निर्धारण, उनकी नियमित समीक्षा तथा डेटा आधारित अनुश्रवण व्यवस्था को और मजबूत बनाने पर भी जोर रहेगा। योगी सरकार का लक्ष्य है कि प्रत्येक विद्यालय में सीखने के परिणामों का सतत मूल्यांकन हो और समयबद्ध सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें।

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निपुण भारत मिशन के विस्तार के अंतर्गत कक्षा 3 से 5 तक प्रस्तावित लक्ष्य आधारित शिक्षण, प्रभावी कक्षा-शिक्षण के लिए 10 प्वाइंट टूलकिट, कैच-अप शिक्षण तथा निपुण प्लस में प्रस्तावित सुधारों पर भी चर्चा की जाएगी। इसके साथ ही बालवाटिका के प्रभावी संचालन तथा कक्षा 1 से 5 तक शिक्षक संदर्शिका आधारित संरचित शिक्षण पद्धति को विद्यालयों में लागू करने की रणनीति तैयार की जाएगी, जिससे बच्चों की सीखने की नींव और अधिक मजबूत हो सके।

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कार्यशालाओं में विभागीय प्राथमिकताओं की समीक्षा, एआईपीएफएसएसी पोर्टल के प्रभावी उपयोग, बीईओ और एआरपी के बीच बेहतर समन्वय, विद्यालय गुणवत्ता सुधार की कार्ययोजना तथा शिक्षकों को प्रभावी फीडबैक उपलब्ध कराने जैसे विषयों को भी शामिल किया गया है। इससे शैक्षणिक नेतृत्व को मजबूत करने और विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
Edited By : Chetan Gour

ईरान ने शांति समझौते से किया इनकार, कहा- अभी तारीख तय नहीं, किसने कहा था 24 घंटे में होगी डील?

ईरान ने शांति समझौते से किया इनकार, कहा- अभी तारीख तय नहीं, किसने कहा था 24 घंटे में होगी डील?

Iran's major statement regarding a peace agreement with US

Iran refuses peace agreement : ईरान-अमेरिका शांति समझौते को लेकर ईरान की सरकारी मीडिया ने बड़ा दावा किया है। मीडिया का कहना है कि ईरान और अमेरिका के बीच समझौते पर फिलहाल हस्ताक्षर टल गए हैं और यह रविवार को नहीं होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मार्च महीने से लगातार ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने वाले समझौते की घोषणा कर रहे हैं। ट्रंप अब तक कम से कम 38 बार ऐसा दावा कर चुके हैं, लेकिन हर बार कोई अंतिम समझौता नहीं हो पाया, इससे अमेरिकी राष्ट्रपति की किरकिरी हो रही है। इससे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दावा किया था कि 24 घंटे के अंदर ईरान-अमेरिका में डील हो सकती है। दोनों देशों के बीच शांति समझौते को लेकर शर्तों पर सहमति बन गई है।

 

ईरान-अमेरिका शांति समझौते को लेकर ईरान की सरकारी मीडिया ने बड़ा दावा किया है। मीडिया का कहना है कि ईरान और अमेरिका के बीच समझौते पर फिलहाल हस्ताक्षर टल गए हैं और यह रविवार को नहीं होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मार्च महीने से लगातार ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने वाले समझौते की घोषणा कर रहे हैं।

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अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप 38 बार कर चुके ऐसा दावा 

ट्रंप अब तक कम से कम 38 बार ऐसा दावा कर चुके हैं, लेकिन हर बार कोई अंतिम समझौता नहीं हो पाया, इससे अमेरिकी राष्ट्रपति की किरकिरी हो रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि दोनों देश समझौते के क़रीब हैं। इस पर दस्तख़त होते ही होर्मुज़ स्ट्रेट फिर खोल दिया जाएगा। 

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समझौते पर क्‍या बोला ईरानी विदेश मंत्रालय? 

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा कि यह समझौता अगले कुछ दिनों में हो सकता है, लेकिन अभी इसकी तारीख तय नहीं है। बकाई ने कहा कि उनकी सरकार पारदर्शिता और जिम्मेदारी के सिद्धांतों के तहत काम करती है और उचित समय आने पर समझौते से जुड़ी सभी जानकारी जनता के साथ साझा की जाएगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका का रुख बार-बार बदलता रहा है, इसलिए समझौते को लेकर अभी सावधानी बरतने की जरूरत है।

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शांति समझौते को लेकर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज ने किया था यह दावा 

इससे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दावा किया था कि 24 घंटे के अंदर ईरान-अमेरिका में डील हो सकती है। दोनों देशों के बीच शांति समझौते को लेकर शर्तों पर सहमति बन गई है। अगर शहबाज शरीफ का यह दावा सच साबित हो जाता है तो फरवरी में शुरू हुए टकराव के बाद सबसे बड़ी कूटनीतिक कामयाबी हो सकती है। इससे दुनियाभर में ऊर्जा सप्लाई के लिए अहम 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' फिर से खुल सकता है, जिसने तेल बाजारों को हिला दिया है और शिपिंग में रुकावट डाली है।

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अंतिम समझौते पर इसराइल का बयान

दूसरी ओर इसराइल का कहना है कि किसी भी अंतिम समझौते में ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम को हटाना और यूरेनियम एनरिचमेंट के स्ट्रक्चर को ख़त्म करने जैसी शर्तें शामिल होंगी। प्रस्तावित समझौता 2 चरणों में होगा। पहले चरण में सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त किया जाएगा। इसके बाद 60 दिनों तक केवल ईरान के परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और युद्ध से हुए नुकसान के मुआवजे पर बातचीत होगी।
Edited By : Chetan Gour

उत्‍तर प्रदेश में शिक्षा से संवर रहा भविष्य, योगी सरकार दे रही अनाथ बच्चों के सपनों को नई उड़ान

उत्‍तर प्रदेश में शिक्षा से संवर रहा भविष्य, योगी सरकार दे रही अनाथ बच्चों के सपनों को नई उड़ान

Chief Minister Yogi Adityanath's statement regarding education in Uttar Pradesh

– लैपटॉप से लेकर निःशुल्क शिक्षा तक, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड) बनी बच्चों का मजबूत सहारा

– मुख्यमंत्री योगी के मार्गदर्शन में महिला कल्याण विभाग ने 8 हजार से ज्यादा बच्चों को वितरित किए लैपटॉप

– डिजिटल युग में यह पहल बच्चों के लिए ज्ञान और अवसरों के नए द्वार खोल रही

Chief Minister Yogi Adityanath : कोविड महामारी में अपने माता-पिता को खो चुके बच्चों के लिए योगी सरकार अभिभावक की भूमिका निभा रही है। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड) के तहत अनाथ और बेसहारा बच्चों को न केवल आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, बल्कि उनके बेहतर भविष्य के लिए शिक्षा को भी प्राथमिकता दी गई है। महिला कल्याण विभाग के द्वारा सरकार 8085 बच्चों को लैपटॉप वितरित कर उन्हें डिजिटल शिक्षा से जोड़ चुकी है। डिजिटल युग में यह पहल बच्चों के लिए ज्ञान और अवसरों के नए द्वार खोल रही है। इससे वो ऑनलाइन अध्ययन, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और तकनीकी दक्षता हासिल करने में सक्षम हो रहे हैं।

 

वहीं 11 से 18 वर्ष तक के बच्चों को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय और अटल आवासीय विद्यालयों में कक्षा 12 तक निःशुल्क प्रदान कर रही हैं। योजना के अंतर्गत प्रत्येक बच्चे को प्रतिमाह उसकी शिक्षा जारी रखने के लिए 14 हजार रुपए प्रतिमाह की सहायता भी दी जा रही है। यह पहल बच्चों के सपनों को नई उड़ान देने का माध्यम बन रही है।

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निःशुल्क शिक्षा के साथ आर्थिक संबल

योगी सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि संसाधनों के अभाव में कोई भी बच्चा अपनी पढ़ाई अधूरी न छोड़े। योजना के अंतर्गत 11 से 18 वर्ष तक के बच्चों को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों और अटल आवासीय विद्यालयों में कक्षा 12 तक निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। इसके साथ ही प्रत्येक पात्र बच्चे को 14 हजार रुपए प्रतिमाह की आर्थिक सहायता भी प्रदान की जा रही है।

यह सहायता बच्चों की शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इससे किताबें, स्टेशनरी और अन्य जरूरी शैक्षिक संसाधन जुटाने में मदद मिलती है। सरकार का यह प्रयास सामाजिक सुरक्षा और शिक्षा के समन्वित मॉडल के रूप में सामने आया है।

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प्रतिस्पर्धी माहौल से जुड़ रहे बच्चे

लैपटॉप वितरण और आधुनिक शैक्षिक सुविधाओं के माध्यम से बच्चों को प्रतिस्पर्धी माहौल से जोड़ने की दिशा में भी प्रभावी कार्य किया जा रहा है। शिक्षा आधारित यह मॉडल बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए भी तैयार कर रहा है।

 

निदेशक ने कहा, योगी सरकार का प्रयास है कि ये बच्चे आत्मनिर्भर बनें 

महिला कल्याण विभाग की निदेशक सी. इंदुमती ने कहा, योगी सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि महामारी से प्रभावित कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। निःशुल्क शिक्षा, आर्थिक सहायता और डिजिटल संसाधनों के माध्यम से बच्चों को आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है।

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योगी सरकार का प्रयास है कि ये बच्चे आत्मनिर्भर बनें और अपने सपनों को साकार कर सकें। इसलिए प्रदेश के सभी जिला प्रोबेशन अधिकारियों को मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के पात्र बच्चों को समय पर लाभ प्रदान करने तथा ऐसे बच्चों का नियमित फॉलोअप लेकर उनके सम्पूर्ण विकास सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
Edited By : Chetan Gour

UCC: लोगों के सुझावों से बनेगी नीति, सीएम डॉ. मोहन बोले- बच्चों से लेकर बूढ़ों से ली जाए राय

UCC: लोगों के सुझावों से बनेगी नीति, सीएम डॉ. मोहन बोले- बच्चों से लेकर बूढ़ों से ली जाए राय

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 13 जून को समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) जागरूकता अभियान को लेकर कलेक्टरों के साथ बैठक की। सीएम डॉ. यादव इस बैठक में वीसी के जरिये शामिल हुए। बैठक में उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता के संबंध में नीति निर्माण जनसामान्य के सुझावों के आधार पर किया जाएगा। बेहतर नीति निर्माण के लिए बेहतर जनभागीदारी आवश्यक है। प्रदेशवासियों से अधिक से अधिक संख्या सुझाव आमंत्रित करने के लिए सभी जिलों में जागरूकता अभियान चलाया जाए। नगरीय क्षेत्रों के साथ-साथ ग्राम स्तर तक इस विषय पर बातचीत को प्रोत्साहित कर लोगों को अपना अभिमत देने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। 

 

सीएम डॉ. यादव ने कहा कि नगरीय स्तर पर स्कूल-कॉलेजों में गतिविधियां संचालित कर तथा सामाजिक-व्यापारिक संस्थाओं, बार काउंसिल आदि में चर्चा के सत्र आयोजित कर जनसामान्य से अपनी राय प्रकट करने के लिए कहा जाए। शासकीय अधिकारी-कर्मचारी भी समान नागरिक संहिता के संबंध में भी अपने सुझाव दें। ग्राम स्तर पर रोजगार सहायक, पंचायत सचिव आदि इस विषय पर चर्चा को प्रोत्साहित करें, इस संबंध में विशेष ग्राम सभा की  बैठक भी आयोजित की जा सकती है। सभी जिला कलेक्टर इस गतिविधि को प्राथमिकता पर लें। 

 

वेबसाइट पर देना है सुझाव:सरल है प्रक्रिया

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि समान नागरिक संहिता के बारे में 22 जून तक सुझाव आमंत्रित हैं। इसके लिए विशेष रूप से वेबसाइट ucc.mp.gov.in का विमोचन किया गया है। इस पर सुझाव देने की प्रक्रिया बहुत सरल है। वेबसाइट के फॉर्म में केवल नाम, लिंग, धर्म, संभाग, जिला, पता और मोबाइल नंबर अंकित करना है। कुल 12 प्रश्नों का उत्तर हां या ना में दिया जाना है। मोबाइल ओटीपी से सत्यापित करने से सुझाव जमा हो जाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस संबंध में जिला स्तर संचालित गतिविधियों की जानकारी भी प्राप्त की।

 

जागरूकता बढ़ाना आवश्यक-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समान नागरिक संहिता के उद्देश्य और प्रक्रिया की जानकारी का विस्तार करने के लिए जनप्रतिनिधियों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने की जरूरत बताई। उन्होंने स्व-सहायता समूहों, महिला मंडलों, सामाजिक संगठनों के माध्यम से जागरूकता बढ़ाने के निर्देश भी दिए। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में विभिन्न व्यक्तिगत तथा पारिवारिक विधियों के अंतर्गत विवाह, विवाह-विच्छेद, भरण-पोषण, उत्तराधिकार आदि विषयों से संबंधित पृथक-पृथक प्रावधानों का समग्र परीक्षण कर विधिक संरचना विकसित करने की आवश्यकता अनुभव की जा रही है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए राज्य शासन द्वारा विषय के विधिक, सामाजिक एवं प्रशासनिक पहलुओं का विस्तृत अध्ययन कर समान नागरिक संहिता के संबंध में अनुशंसाओं को प्रस्तुत करने के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। इस समिति द्वारा जिलों का भ्रमण कर लोगों को अपने सुझाव प्रेषित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

सिंधू नदी के जल पर राजनाथ की पाक को कड़ी चेतावनी, बोले- आतंक के आकाओं तक नहीं पहुंचेगा चुल्‍लूभर पानी

सिंधू नदी के जल पर राजनाथ की पाक को कड़ी चेतावनी, बोले- आतंक के आकाओं तक नहीं पहुंचेगा चुल्‍लूभर पानी

Defence Minister Rajnath Singh's stern warning to Pakistan regarding Indus River waters

Rajnath Singh's stern warning to Pakistan : आतंकवाद को लेकर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि आतंक के संरक्षकों तक सिंधु नदी का पानी नहीं पहुंचने देंगे। उन्हें हमसे पानी की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। रक्षामंत्री ने साफ तौर पर कहा कि भारत शांति की भाषा न समझने वालों को जवाब देना अच्छे से जानता है और जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह बंद नहीं करता, तब तक यह जल बंटवारा समझौता निलंबित ही रहेगा। रक्षामंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से सरकार ने दुनिया को दिखा दिया है कि वह उन लोगों को जवाब देना जानती है जो शांति और सद्भाव की भाषा नहीं समझते हैं।

 

तब तक जल बंटवारा समझौता निलंबित ही रहेगा

आतंकवाद को लेकर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि आतंक के संरक्षकों तक सिंधु नदी का पानी नहीं पहुंचने देंगे। उन्हें हमसे पानी की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। रक्षामंत्री ने साफ तौर पर कहा कि भारत शांति की भाषा न समझने वालों को जवाब देना अच्छे से जानता है और जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह बंद नहीं करता, तब तक यह जल बंटवारा समझौता निलंबित ही रहेगा।

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ऑपरेशन सिंदूर से दुनिया को दिखा दिया कि… 

रक्षामंत्री सिंह हैदराबाद में आयोजित एक बुद्धिजीवी सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि (IWT) को निलंबित किए जाने का जिक्र किया। रक्षामंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से सरकार ने दुनिया को दिखा दिया है कि वह उन लोगों को जवाब देना जानती है जो शांति और सद्भाव की भाषा नहीं समझते हैं।

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दुश्मनों को यह नहीं भूलना चाहिए कि…

रक्षामंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर और सैनिकों की बहादुरी पर सवाल उठाने के लिए कांग्रेस और विपक्ष के अन्य नेताओं की भी आलोचना की। रक्षामंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस देश को एक खास परिवार की जागीर मानती है। रक्षामंत्री राजनाथ ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि भारत के दुश्मनों को यह नहीं भूलना चाहिए कि देश के पास न केवल टीके हैं, बल्कि ब्रह्मोस मिसाइल भी है।

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रक्षामंत्री ने कहा कि कश्मीर, जो कभी आतंकवाद से जुड़ा हुआ था, अब पर्यटन, निवेश और रोजगार के अवसरों में वृद्धि देख रहा है। भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी प्रणाली की नदियों के जल-उपयोग को लेकर 19 सितंबर, 1960 को ऐतिहासिक सिंधु जल संधि (IWT) पर हस्ताक्षर किए गए थे।

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खून और पानी एकसाथ नहीं बहेंगे

हालांकि पिछले वर्ष पहलगाम में हुए जघन्य आतंकवादी हमले के बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाया है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह का यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस घोषणा का पुनरावलोकन है, जिसमें उन्होंने कहा था कि खून और पानी एक साथ नहीं बहेंगे।
Edited By : Chetan Gour

अनुसंधान को राष्ट्र निर्माण से जोड़ें युवा वैज्ञानिक : CM योगी

अनुसंधान को राष्ट्र निर्माण से जोड़ें युवा वैज्ञानिक : CM योगी

Vigyan Bharati National Convention: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवा वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों से नवाचार व अनुसंधान को राष्ट्र निर्माण तथा जनकल्याण से जोड़ने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि भारत के पास विज्ञान, कृषि, चिकित्सा, उद्यम, आयुर्वेद और पारंपरिक ज्ञान के क्षेत्र में असीम संभावनाएं हैं। शनिवार को विज्ञान भारती के सातवें राष्ट्रीय अधिवेशन के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा कि कोई भी अनुसंधान केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसका उद्देश्य आर्थिक उन्नयन, लोककल्याण और भारत को शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में स्थापित करना होना चाहिए।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें प्रसन्नता है कि विज्ञान भारती का सातवां राष्ट्रीय अधिवेशन ज्ञान की पावन धरा काशी में आयोजित हो रहा है, जिसमें 1300 से अधिक प्रतिनिधि पंजीकरण करा चुके हैं। काशी हिंदू विश्वविद्यालय महामना मदन मोहन मालवीय की साधना का परिणाम है और इसकी स्थापना का उद्देश्य काशी को उसकी प्राचीन ज्ञान-विज्ञान की पहचान दिलाना था। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय ज्ञान परंपरा, आधुनिक विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार का समन्वय भारत को विकसित राष्ट्र बनाने तथा विश्व मंच पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

भारत हजारों वर्षों से ज्ञान, विज्ञान और नवाचार का केंद्र

मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक विज्ञान की प्रभावी यात्रा लगभग 400-500 वर्षों की है, जबकि भारत हजारों वर्षों से ज्ञान, विज्ञान और नवाचार का केंद्र रहा है। 2000 वर्ष पूर्व वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 44-45 प्रतिशत थी। विदेशी आक्रमणों के कठिन दौर में भी यह 24-25 प्रतिशत बनी रही, लेकिन स्वतंत्रता के समय घटकर 1.5 से 2 प्रतिशत रह गई। भारत का किसान केवल किसान नहीं था, बल्कि वह इन्वेंटर और नवाचारी भी था। प्राकृतिक खेती, पशुपालन और भूमि की उर्वरता बनाए रखने की पारंपरिक व्यवस्थाएं उसकी वैज्ञानिक सोच का प्रमाण थीं।

 

उन्होंने श्रीमद्भागवत गीता का उल्लेख करते हुए कहा कि कृषि, गोरक्षा और वाणिज्य भारतीय अर्थव्यवस्था की परस्पर जुड़ी हुई व्यवस्थाएं थीं। लेकिन समय के साथ हम रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर अत्यधिक निर्भर हो गए और अपनी मूल परंपराओं से दूर होते चले गए।

विदेशी आक्रांताओं, वामपंथियों ने भारतीय ज्ञान परंपरा को कमतर दिखाया

सीएम योगी ने कहा कि भारतीय व्यापारी केवल व्यापार नहीं करता था, बल्कि देश को जोड़ने का कार्य करता था। भारतीय कारीगर भी केवल शिल्पकार नहीं बल्कि उद्यमी था, जिसने भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाया। आज भी आत्मनिर्भरता और सस्टेनेबल डेवलपमेंट के लिए वही मॉडल प्रासंगिक है।

 

मुख्यमंत्री ने महान वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके प्रयोगों ने यह सिद्ध किया था कि पौधों में भी संवेदनशीलता और चेतना होती है। यदि एक पौधा सकारात्मक और नकारात्मक व्यवहार का प्रभाव समझ सकता है तो समाज पर नकारात्मक सोच के प्रभाव का सहज अनुमान लगाया जा सकता है। विदेशी आक्रांताओं, वामपंथी विचारधाराओं और भारत-विरोधी प्रवृत्तियों ने लंबे समय तक भारतीय ज्ञान परंपरा और गौरव को कमतर दिखाने का प्रयास किया, जिससे समाज अपनी जड़ों से दूर होता गया।

भारतीय जीवन पद्धति का हर पक्ष विज्ञान से जुड़ा हुआ

मुख्यमंत्री ने अपने बचपन की स्मृतियां साझा करते हुए कहा कि उत्तराखंड के गांव में उनकी माता छोटी-छोटी क्यारियों में सब्जियां उगाने के लिए प्रेरित करती थीं। भारतीय जीवन पद्धति का हर पक्ष विज्ञान से जुड़ा हुआ है। रसोई में हल्दी और मसालों के उपयोग से लेकर दैनिक जीवन की अनेक परंपराओं तक वैज्ञानिक दृष्टिकोण स्पष्ट दिखाई देता है।

 

कोविड महामारी का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत ने 140 करोड़ की आबादी के बावजूद महामारी का प्रभावी मुकाबला किया। यह भारतीयों की प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता और पारंपरिक जीवनशैली का परिणाम था। गांवों में मार्च से अक्टूबर तक पशुओं को खेतों में बांधने की परंपरा प्राकृतिक और गो-आधारित खेती का उत्कृष्ट उदाहरण थी। इस व्यवस्था के कमजोर होने के साथ खेती की लागत बढ़ी, भूमि की उर्वरता प्रभावित हुई और कृषि संकट गहराया।

एमएसएमई के कारण घटी बेरोजगारी दर

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश में परंपरागत उद्यमों को पुनर्जीवित करने का अभियान शुरू किया गया। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) योजना के माध्यम से कारीगरों को तकनीक, डिजाइन, पैकेजिंग और मार्केटिंग से जोड़ा गया। इसके परिणामस्वरूप प्रदेश का निर्यात 86 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर दो लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। वर्तमान में प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई इकाइयां संचालित हैं, जिनमें लगभग तीन करोड़ लोग कार्यरत हैं तथा बेरोजगारी दर तीन प्रतिशत से नीचे आ गई है।

प्रकृति के प्रत्येक तत्व में उपयोगिता और अनुसंधान की संभावनाएं

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने तक्षशिला विश्वविद्यालय के आयुर्वेदाचार्य जीवक का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि शिक्षा पूर्ण होने के बाद गुरु ने जीवक को ऐसी वनस्पति खोजने का निर्देश दिया जिसमें औषधीय गुण न हों। लंबे समय तक खोज के बाद जीवक ने बताया कि उन्हें ऐसी कोई वनस्पति नहीं मिली। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह भारतीय ज्ञान परंपरा की वैज्ञानिक दृष्टि का प्रमाण है, जिसमें प्रकृति के प्रत्येक तत्व में उपयोगिता और अनुसंधान की संभावनाएं देखी जाती हैं।

विभिन्न क्षेत्रों में अनुसंधान एवं नवाचार के अनगिनत अवसर

युवा वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि, चिकित्सा, तकनीक, एमएसएमई, उद्यम और विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में अनुसंधान एवं नवाचार के अनगिनत अवसर मौजूद हैं। उन्होंने विज्ञान भारती को सुझाव दिया कि प्रत्येक अधिवेशन के साथ नवाचार प्रदर्शनी आयोजित की जाए, अधिवेशन से पहले नवाचार प्रतियोगिताएं कराई जाएं और उत्कृष्ट शोधकर्ताओं एवं नवाचारकर्ताओं को मंच पर सम्मानित किया जाए। साथ ही विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालयों तथा अन्य सरकारी विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर शोधकर्ताओं को अपने नवाचारों का प्रस्तुतीकरण करने का अवसर उपलब्ध कराया जाए।

 

इस अवसर पर विज्ञान भारती के अखिल भारतीय पालक अधिकारी सुनील आंबेडकर, राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ शेखर सी माण्डे, काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अजीत चतुर्वेदी, आईआईटी बीएचयू के निदेशक प्रोफेसर अमित पात्रा व अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

 

मुख्‍यमंत्री योगी ने कहा- अब विदेशी भी यहां आकर करेंगे चाकरी

मुख्‍यमंत्री योगी ने कहा- अब विदेशी भी यहां आकर करेंगे चाकरी

Yogi in Gorakhpur

Yogi Adityanath Gorakhpur: मुख्यमंत्री ने गांधी इंटर कॉलेज, महुआपार बड़हलगंज में शनिवार को 295 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 319 परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह धरा मां सरयू के आंचल में है। यहां के नौजवानों ने हर जगह अपनी प्रतिभा व परिश्रम का लोहा मनवाया है। एक समय बाढ़ की त्रासदी और कनेक्टिविटी के अभाव में क्षेत्र के लोग पलायन करते थे।

आजीविका के लिए विदेश जाना पड़ता था, लेकिन अब यहां के नौजवान को बाहर नहीं जाना होगा। उसे यहीं रोजगार के ढेर सारे अवसर मिलेंगे। अब आपके द्वारा चुने गए विधायक-सांसद डबल इंजन सरकार की ताकत का इस्तेमाल करते हुए विदेश के लोगों को चिल्लूपार में काम करने का अवसर देने जा रहे हैं। विदेशी लोग यहां आकर चाकरी करेंगे। सीएम ने विश्वास जताया कि विकास व विरासत की यात्रा के साथ चिल्लूपारवासी बिना रुके-बिना झुके निरंतर आगे बढ़ेंगे। 

सीएनजी-एथेनॉल ने बंद नहीं होने दिया काम

सीएम योगी ने कहा कि हम लोगों ने धुरियापार में बंद पड़ी चीनी मिल की खाली जमीन पर सीएनजी का प्लांट लगवाया। अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण दुनिया में संकट है, लेकिन सीएनजी-एथेनॉल के कारण हमारे यहां काम बंद नहीं हुआ। ऊर्जा में आत्मनिर्भर अमेरिका में भी महंगाई चार गुना हो गई है। वहां 100 रुपये की वस्तु 400 रुपये में मिल रही है, लेकिन भारत में महंगाई नियंत्रित है।

धुरियापार में लगने जा रही सीमेंट फैक्ट्री

सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नया भारत गरीब कल्याण, विकास व सुरक्षा का बेहतरीन माहौल देते हुए माफिया को मिट्टी में भी मिलाता है। एक समय रामजानकी मार्ग पर आवागमन ठप होता था। उपचार के लिए लखनऊ जाने को मजबूर होना पड़ता था। कनेक्टिविटी, रोडवेज बस व अन्य साधन तक नहीं थे। जैसे-तैसे व्यवस्था चल पाती थी, लेकिन आज कनेक्टिविटी बेहतर हुई है। 2017 के पहले कोई सोच भी नहीं सकता था कि धुरियापार में इंडियन ऑयल का सीएनजी प्लांट लगेगा या सहजनवां का गीडा आ पाएगा। अब हम यहां ग्रेटर गीडा बनाने जा रहे हैं। अभी से हजारों करोड़ रुपये के प्रस्ताव आ गए हैं, जिन्हें हमें उद्योग के रूप में स्थापित करना है। इसमें सीमेंट की फैक्ट्री धुरियापार में लगने जा रही है। पावर प्लांट, आधुनिक पेंट व अत्याधुनिक डिस्टलरी भी स्थापित होगी, जहां मॉडर्न मेडिसिन, एलोपैथिक दवा भी बनेगी। यहां भारी पैमाने पर निवेश के प्रस्ताव आ रहे हैं। 

राजेश त्रिपाठी जितने प्रस्ताव देंगे, सरकार स्वीकृत करेगी 

सीएम ने कहा कि विधायक राजेश त्रिपाठी जितने भी प्रस्ताव देंगे, सरकार उन्हें स्वीकृत करेगी। राजेश त्रिपाठी ने यहां होमियोपैथिक कॉलेज स्वीकृत कराया था, उस समय काम बढ़ा, लेकिन सपा सरकार ने आते ही काम रोक दिया। उस समय चुने गए लोगों ने कान में तेल डालकर इसे अनसुना कर दिया था। 2017 में सरकार आने पर राजेश जी इस काम के लिए रोज मिलते थे। आज इस विधानसभा क्षेत्र में आयुष के डॉक्टर बन रहे हैं। चिल्लूपार ट्रेडिशनल मेडिसिन का नया केंद्र बन रहा है।

जितनी फास्ट कनेक्टिविटी-उतनी तेज प्रगति

सीएम योगी ने बताया कि मैंने जलशक्ति मंत्री से कहा है कि बाढ़ बचाव के लिए जो भी प्रस्ताव आएंगे, उन समस्याओं का समाधान होना चाहिए। सीएम ने कनेक्टिविटी पर जोर देते हुए कहा कि यह जितनी फास्ट होगी, प्रगति उतनी तेज गति से बढ़ेगी। प्रगति होगी तो नौजवान को पलायन नहीं करना पड़ेगा। उन्हें अपने क्षेत्र में नौकरी व रोजगार मिलेगा, यही देश में डबल इंजन सरकार के कार्यों की पहचान है। गीडा यहीं आ रहा है, यहां के नागरिकों के लिए रोजगार के ढेर सारे अवसर बढ़ेंगे। नौजवानों को बाहर नहीं जाना होगा।

चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र से अब बेहतर कनेक्टिविटी

सीएम योगी ने कहा कि चिल्लूपार अब विकास की प्रक्रिया से जुड़ा है। एक तरफ लखनऊ को जोड़ने के लिए पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का लिंक एक्सप्रेसवे तो दूसरी तरफ गोरखपुर-वाराणसी को जोड़ने वाला फोरलेन का नेशनल हाइवे है। इस विधानसभा क्षेत्र से कनेक्टिविटी बहुत अच्छी है। यहां से तीन घंटे में लखनऊ, दो घंटे में वाराणसी, आधे-पौने घंटे में गोरखपुर पहुंच जाएंगे। 

सांसद कमलेश पासवान व विधायक राजेश त्रिपाठी ने तेज की विकास प्रक्रिया

मुख्यमंत्री ने विपरीत मौसम के बावजूद कार्यक्रम में आए आमजन के हौसले को सलाम किया और कहा कि आपके उत्साह को देखते हुए आंधी-तूफान भी थम गया। कल्याण चाहने वालों को डबल इंजन सरकार के साथ चलना होगा। सांसद कमलेश पासवान व विधायक राजेश त्रिपाठी ने मिलकर विकास की प्रक्रिया को तेज किया। विकास की हर योजना चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र में आ रही है। यह क्षेत्र अब विकास से वंचित नहीं रहेगा। विकास की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़े, यही यूपी की पहचान है। 

कमल पर वोट देते हैं तो तर जाती है पीढ़ी दर पीढ़ी

सीएम ने कहा कि आप कमल पर वोट देते हैं तो पीढ़ी दर पीढ़ी तर जाती है। 500 वर्ष पहले जिस अयोध्या धाम में हम सभी अपमानित हुए थे, वहां लगातार आंदोलन चलता रहा। संघर्ष का सिलसिला थमा नहीं, लेकिन जब मोदी जी पीएम बने और यूपी में डबल इंजन सरकार आई तो अयोध्या में भगवान राम का मंदिर बन गया। यह काम कांग्रेस या सपा नहीं कर पाती। 

जब विधायक ही ठेका-पट्टा करेगा तो क्या होगा 

सीएम ने कहा कि जो लोग आस्था-महापुरुषों को सम्मान, विकास की योजनाएं, नौजवान को रोजगार, उद्योग-धंधे नहीं ला सकते, बेटी-बहन को सुरक्षा, बाढ़ की समस्या का समाधान और सड़कों का निर्माण नहीं कर सकते, ऐसे लोगों को नहीं चुनना चाहिए। जब गलत व्यक्ति को चुनते हैं तो अपने ऊपर बोझ व कलंक का ठप्पा लगाते हैं। उत्तर प्रदेश के साथ यही होता था, गलत लोग चुनकर जाते थे तो जनता का पैसा कुछ लोगों के ही विकास में लगता था। नौकरी में सेंध लगती थी। नौजवानों को नौकरी नहीं मिलती थी। पैसे का लेनदेन शुरू हो जाता था। ठेके पट्टे के लिए मारपीट होने लगती थी। जब विधायक स्वयं ठेका करेगा तो क्या होगा, यह बताने की आवश्यकता नहीं।

गोरखपुर के 800 से अधिक नौजवान पुलिस में भर्ती

सीएम ने कहा कि पुलिस भर्ती में चिल्लूपार और गोरखपुर के भी लगभग 800 से अधिक नौजवान शामिल थे। आज सरकारी सेवाओं में गोला, बड़हलगंज, गगहा, बांसगांव, खजनी, सिकरीगंज, चौरीचौरा, पिपरौली, सहजनवा, पाली से भी नौजवानों का चयन होता है। जब मैं सांसद था तो उन नौजवानों की उम 12 से 15 साल के आसपास रही होगी। सांसद के रूप में गांव-गांव जाकर परिवार के सदस्यों से संपर्क करता था। 9 वर्ष से पूरे प्रदेश की सेवा में लगने के कारण उतना समय नहीं दे पाता। नियुक्ति पत्र वितरण के दौरान युवाओं से गांव, परिवार और मां-पिता का नाम पूछता हूं तो उनकी पीठ थपथपाकर चयन की बधाई भी देता हूं। 2017 के पहले यह संभव नहीं था, क्योंकि चाचा-भतीजे की जोड़ी आपके हक पर डकैती डालती थी, वसूली होती थी और होनहारों का चयन नहीं होता था।

चिल्लूपार, मऊ, आजमगढ़ के नाम पर नहीं मिलती थी नौकरी

सीएम ने कटाक्ष किया कि 2017 के पहले युवा नौकरी व रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में जाता था तो पहचान का संकट होता था। लोग चिल्लूपार, आजमगढ़, मऊ के नाम पर नौकरी नहीं देते थे। किसी उद्योग में काम करने गए तो योग्यता होने पर भी यूपी का नाम सुनकर लोग कहते थे कि वहां का साया न पड़ने पाए। उस समय यहां दंगा, कर्फ्यू, अव्यवस्था, माफियागिरी, अराजकता थी। लेकिन, आज लोग बाहर जाकर बताएंगे कि गोरखपुर-चिल्लूपार से आए हैं तो सामने वाला 10 कदम आगे आकर गले मिलेगा। यह विकास की यात्रा की नई पहचान है।

विकास, सुरक्षा और आस्था का करेंगे सम्मान 

सीएम ने कहा कि हम विकास, सुरक्षा, आस्था का सम्मान करेंगे और समृद्धि की नई ऊंचाई की ओर लेकर जाएंगे। हम यहां ऐसे संस्थान खोलेंगे, जहां उद्योग के लिए युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा और उद्योग में नौकरी भी मिलेगी। हम यहीं प्रशिक्षित युवाओं व बेटियों को नौकरी उपलब्ध कराएंगे। बाहर जाने की आवश्यकता नहीं होगी। विकास और अर्थव्यवस्था को गति तभी मिलेगी, जब अच्छी सरकारें होंगी और सुरक्षा-सुशासन का माहौल होगा। 

अच्छे लोग चुने गए तो अच्छी सरकारें आईं 

सीएम ने कहा कि जब अच्छे लोग चुनकर गए, तभी अच्छी सरकारें आईं और अयोध्या में राम मंदिर बना। रामजानकी मार्ग का निर्माण हो रहा है। काशी विश्वनाथ धाम, गोरखपुर में फर्टिलाइजर व एम्स का निर्माण पूरा हो गया है। चिल्लूपार, बड़हलगंज में मेडिकल कॉलेज, धुरियापार में ग्रेटर गीडा का निर्माण कर विकास की गति बढ़ाई गई। अच्छे जनप्रतिनिधि सुविधाएं विकसित करने का आधार बनते हैं। नेतृत्व के साथ मिलकर स्पीड को बढ़ाएंगे तो विकास को कोई ताकत रोक नहीं पाएगी।

 

कार्यक्रम में चिल्लूपार विधायक राजेश त्रिपाठी ने अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर केंद्रीय राज्यमंत्री व बांसगांव के सांसद कमलेश पासवान, उप्र के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, मत्स्य मंत्री डॉ. संजय निषाद, विधान परिषद सदस्य डॉ. धर्मेंद्र सिंह, जिला पंचायत अध्य़क्ष साधना सिंह, विधायक श्रीराम चौहान, प्रदीप शुक्ल, महेंद्र पाल सिंह, डॉ. विमलेश पासवान, फतेह बहादुर सिंह, सरवन निषाद, भाजपा के जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी, महिला मोर्चा की प्रदेश उपाध्य़क्ष अस्मिता चंद आदि उपस्थित रहे।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

असम के मुख्यमंत्री हिमंत का बड़ा फैसला, 18 साल से ज्‍यादा उम्र के आधार कार्ड पर लगी रोक, क्‍या अवैध घुसपैठ पर लगेगी लगाम?

असम के मुख्यमंत्री हिमंत का बड़ा फैसला, 18 साल से ज्‍यादा उम्र के आधार कार्ड पर लगी रोक, क्‍या अवैध घुसपैठ पर लगेगी लगाम?

Assam Chief Minister Himanta Biswa Sarma's big decision regarding Aadhaar card

Chief Minister Himanta's big decision : प्रदेश में अवैध घुसपैठ पर रोक लगाने के लिए असम सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने राज्य में 18 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को आधार कार्ड जारी करने पर रोक लगा दी है, जबकि 18 वर्ष से कम आयु वाले लोगों को आधार कार्ड जारी किए जाते रहेंगे। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया है। सरमा ने कहा कि असाधारण मामलों में आधार कार्ड जारी करने की अनुमति के लिए जिला आयुक्त को राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजना होगा। 1 अप्रैल, 2027 से यह रोक पूरी तरह लागू हो जाएगी।

 

मंत्रिमंडल की बैठक में हुआ यह फैसला 

प्रदेश में अवैध घुसपैठ पर रोक लगाने के लिए असम सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने राज्य में 18 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को आधार कार्ड जारी करने पर रोक लगा दी है, जबकि 18 वर्ष से कम आयु वाले लोगों को आधार कार्ड जारी किए जाते रहेंगे। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया है।

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किसी भी अवैध बांग्लादेशी को आधार कार्ड न मिले

सरमा ने कहा कि असाधारण मामलों में आधार कार्ड जारी करने की अनुमति के लिए जिला आयुक्त को राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजना होगा। सरकार यह फैसला करेगी कि आवेदक आधार कार्ड के लिए पात्र है या नहीं। सरमा ने कहा कि यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया जा रहा है कि किसी भी अवैध बांग्लादेशी को आधार कार्ड न मिले। 1 अप्रैल, 2027 से यह रोक पूरी तरह लागू हो जाएगी।

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असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कैबिनेट की बैठक के बाद कहा कि कैबिनेट ने एक संशोधित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के नोटिफिकेशन को मंज़ूरी दी है। इस कदम का मकसद बांग्लादेश जैसे देशों से आए अवैध प्रवासियों को भारतीय नागरिकता पाने की कोशिश में आधार कार्ड हासिल करने से रोका जा सके या इसकी संभावना को कम किया जा सके।

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इन्‍हें मिलते रहेंगे आधार कार्ड

मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुसूचित जनजाति (ST), अनुसूचित जाति (SC) और चाय बागान समुदायों के लोगों को मार्च 2027 तक आधार कार्ड मिलते रहेंगे क्योंकि इनके पास अभी भी आधार कार्ड नहीं हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह फ़ैसला असम कैबिनेट ने राज्य में पहचान की पुष्टि और प्रशासन से जुड़े उपायों के तहत लिया है। सीमावर्ती राज्य होने के नाते, हमें कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है और हम जानते हैं कि उनसे कैसे निपटना है।
Edited By : Chetan Gour