राम नाम की लूट है, लूट सके तो लूट… अयोध्या में चढ़ावे की चोरी प्रकरण को देखकर तो ऐसा ही कुछ नजर आ रहा है। राम भक्तों की अगाध श्रद्धा और समर्पण से खड़े हुए भव्य श्री राम मंदिर परिसर में हुई इस घटना ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। जहां एक तरफ प्रभु श्रीराम के चरणों में अर्पित किए गए चढ़ावे और चंदे में चोरी की घटना से सनातन धर्म की छवि धूमिल हो रही है, वहीं दूसरी तरफ इस मुद्दे ने यूपी की सियासत में भूचाल ला दिया है। राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले संतोष दूबे ने आरोप लगाया कि चंपत राय तो लुटेरा है, जो राम भक्तों के चढ़ावे को सरेआम लूट रहा है। हिन्दू महासभा ने राम मंदिर निर्माण के लिए देश-विदेश से एकत्रित 1400 करोड़ का भी हिसाब मांगा है।
यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से ठीक पहले विपक्ष के लिए यह मुद्दा एक चुनावी 'लॉटरी' जैसा साबित हो रहा है, जिस पर सवार होकर वह अपनी सियासी नैया पार लगाने की जुगत में है। जनता के बीच अब यह सबसे बड़ा सवाल है कि क्या यह जांच केवल एक दिखावा बनकर रह जाएगी? क्या बड़े-बड़े मठाधीश मलाई चाटते रहेंगे और हमेशा की तरह किसी निर्बल को मोहरा बना दिया जाएगा?
परिसर में 7.30 घंटे की मैराथन SIT जांच
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस पूरे घटनाक्रम से बेहद नाराज हैं। उनके कड़े रुख के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर एक उच्चस्तरीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। सोमवार, 15 जून को इस तीन सदस्यीय भारी-भरकम टीम ने अयोध्या पहुंचकर राम जन्मभूमि परिसर में करीब 7 घंटे 30 मिनट तक डेरा डाले रखा। इस टीम में विजय विश्वास पंत (IAS, मंडलायुक्त लखनऊ), किरण एस (IPS, आईजी रेंज) और नील रतन (विशेष सचिव, वित्त)। इस दौरान अयोध्या के डीएम, एसपी और कमिश्नर भी टीम के साथ मौजूद रहे।
सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी ने मामले से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर गहन पड़ताल की, अहम दस्तावेजों को खंगाला और हर पहलू की बारीकी से जांच की। टीम को 15 दिनों के भीतर अपनी गोपनीय रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपनी है। जहां एक तरफ राम मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्रा ने इस SIT जांच पर पूरा भरोसा जताया है, वहीं दूसरी तरफ इस जांच की निष्पक्षता को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं। हालांकि एसआईटी ने 43 लोगों को जांच के दायरे में लिया है।
विपक्ष के तेवर तीखे
चंदा चोरी के इस कथित घोटाले को लेकर विपक्ष ने सरकार और ट्रस्ट को घेरना शुरू कर दिया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता संजय सिंह ने इस मामले गंभीर आरोप लगाए हैं। समाजवादी पार्टी के पूर्व मंत्री व पूर्व विधायक तेज नारायण पांडेय 'पवन' ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि संघ से जुड़े निष्ठावान कार्यकर्ता महिपाल सिंह, जिनकी ड्यूटी राम मंदिर में थी, उन्होंने खुद स्वीकार किया है कि चढ़ावे के सोने, चांदी और रत्नों की चोरी हो रही थी। उन्होंने इसे रंगे हाथों पकड़ा और सार्वजनिक भी किया। इस चोरी में ट्रस्ट के बड़े-बड़े पदाधिकारियों और मठाधीशों का नाम सामने आ रहा है। ऐसे में निष्पक्ष जांच कैसे होगी? हमारी मांग है कि जांच से पहले उन सभी पदाधिकारियों का इस्तीफा लिया जाए जिनका नाम महिपाल सिंह ने उजागर किया है।
चंपत राय लुटेरा है : संतोष दूबे
इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा और सबसे तीखा हमला धर्म सेना के प्रमुख संतोष दूबे ने किया है। वेबदुनिया से बातचीत के दौरान उन्होंने सीधे तौर पर ट्रस्ट के शीर्ष नेतृत्व को कटघरे में खड़ा किया है। राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले संतोष दूबे ने सीधे तौर पर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि चंपत राय तो लुटेरा है, जो राम भक्तों के चढ़ावे को सरेआम लूट रहा है। यही नहीं, उन्होंने राम मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्रा पर भी बेहद संगीन और विवादित आरोप लगाते हुए कहा कि ये तो राम भक्तों के हत्यारे हैं, जिन्हें आज ट्रस्ट का मुखिया बना दिया गया है।
संतोष दूबे ने राम मंदिर आंदोलन के इतिहास को लेकर भी एक बड़ा सवाल उठाया और पूछा कि राम मंदिर आंदोलन के समय देश भर से जो राम शिलाएं आई थीं, जिनमें कई सोने और चांदी की थीं, वे सब कहां गईं? उनका कुछ पता नहीं है। इस बयान ने अयोध्या के संतों और राम भक्तों के बीच खलबली मचा दी है। उल्लेखनीय है कि संतोष दूबे ने राम मंदिर आंदोलन के दौरान जब रामभक्तों पर गोलियां चलाई गई थीं, तब उन्हें भी दो-तीन गोलियां लगी थीं।
कहां गए 1400 करोड़, भंग किया जाए हो राम मंदिर ट्रस्ट
इस मामले में हिंदू संगठनों ने भी अपनी ही व्यवस्था के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनीष पांडेय ने देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को एक पत्र लिखकर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को तत्काल भंग करने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने एक बड़ा सवाल दागते हुए पूछा है कि राम मंदिर आंदोलन के दौरान देश-विदेश से एकत्रित हुए 1400 करोड़ रुपए कहां गए? दान में मिली सोने-चांदी की ईंटों और अन्य बहुमूल्य आभूषणों का कोई हिसाब क्यों नहीं दिया जा रहा है?
राम मंदिर ट्रस्ट में हलचल
इस बीच, जैसे ही मामले की जांच तेज हुई है, राम मंदिर ट्रस्ट के भीतर की हलचल रहस्यमयी हो गई है। ट्रस्टी अनिल मिश्रा जो अब तक राम मंदिर के हर छोटे-बड़े आयोजन में मुख्य यजमान की भूमिका में रहते थे और मीडिया के कैमरों के फ्रेम में सबसे आगे नजर आते थे, वो अचानक 'आंख दिखाने' के बहाने दक्षिण भारत रवाना हो गए हैं और मीडिया की नजरों से ओझल हैं। दूसरी ओर, ट्रस्ट के सर्वेसर्वा चंपत राय, जिनकी अनुमति के बिना अयोध्या में पत्ता भी नहीं हिलता, वो अचानक गंभीर रूप से 'बीमार' पड़ गए हैं। अब हिदायत दी जा रही है कि कोई उनसे सवाल पूछकर उन्हें परेशान न करे।
इन दिग्गज पदाधिकारियों के अचानक बीमार होने और लापता होने पर अयोध्या की गलियों से लेकर लखनऊ के गलियारों तक सवाल उठ रहे हैं। आखिर जांच शुरू होते ही यह कौन सा रहस्यमयी 'वायरस' आ गया जिसने बड़े-बड़ों की जुबान पर ताला लगा दिया? क्या अब मुख्यमंत्री को इस SIT टीम में किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज (KGMU) के डॉक्टरों को भी शामिल करने की जरूरत पड़ेगी, जो यह पता लगा सकें कि यह बीमारी शारीरिक है या 'जांच का डर'?
फिलहाल, 15 दिनों के भीतर आने वाली SIT की रिपोर्ट ही तय करेगी कि राम भक्तों की आस्था के साथ खिलवाड़ करने वाले ये 'चंदा चोर' सलाखों के पीछे जाएंगे या मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
Edited by: Vrijendra Singh Jhala
