ईरान और अमेरिका के बीच डील से पश्चिम एशिया में तेल सप्लाय सामान्य होने की उम्मीद के बावजूद भारत सरकार ने विंडफाल टैक्स के रूप में डीजल और एविएशन टरबाइन ईंधन (ATF) के करों में बढ़ोतरी कर दी है। सरकार के इस फैसले के बाद जो तेल कंपनियां भारत से बाहर अपने उत्पादों का निर्यात करती हैं उन्हें अब इस पर ज्यादा कर चुकाना होगा। हालांकि सरकार ने निर्यात किए जाने वाले पेट्रोल किसी तरह की नई लेवी नहीं लगाई है। वित्त मंत्रालय के इस कदम से देश में पेट्रोल डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं होगा।
SAED के तहत बढ़ाई एक्सपोर्ट ड्यूटी
सरकार ने इन उत्पादों पर स्पेशल एडिशन एक्साइज ड्यूटी (SAED) के तहत यह कर लगाया है। अब भारत से निर्यात होने वाले डीजल पर प्रति लीटर 14 रुपए चुकाने होंगे। पहले यह कर 13.5 रुपए प्रति लीटर था। इसी तरह एविएशन टरबआइन ईंधन (ATF) पर अब 9.5 रुपए प्रति लीटर की जगह 12.5 प्रति लीटर चुकाने होंगे। पेट्रोल पर यह कर 1.5 प्रति लीटर लगता है।
आज से संशोधित टैक्स लागू
वित्त मंत्रालय द्वारा जारी एक अधिसूचना के अनुसार, ये संशोधित कीमते 16 जून मंगलवार से लागू होंगी। इसके साथ ही, सरकार ने घरेलू बाजार में बेचे जाने वाले पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा शुल्क दरों में भी कोई बदलाव नहीं किया है।
सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?
सरकार ने यह कदम इसलिए उठाए हैं, ताकि तेल रिफाइनिंग कंपनियां इस समय अपने तेल उत्पादों का निर्यात सीमित रखें और वे घरेलू मांग की पूर्ति में जरूरी योगदान बनाए रखें। सरकार की प्राथमिकता है कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के चलते तेल की उपलब्धता को लेकर आ रही चुनौतियों के बीच पर्याप्त घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित कर सके। इसलिए उसने निर्यात होने वाले डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल पर यह अतिरिक्त टैक्स लगाया है। इस पर टैक्स बढ़ाने से इन उत्पादों के निर्यात में कमी आएगी।
गौरतलब है कि वैश्विक ऊर्जा बाजारों द्वारा पश्चिम एशिया के संघर्ष पर प्रतिक्रिया देने के बाद, सरकार ने पहली बार मार्च में डीजल और एटीएफ पर निर्यात शुल्क लगाया था। इसके बाद से अब तक इन दरों में वैश्विक बाजार की स्थितियों और कच्चे तेल की कीमतों के आधार पर कई बार संशोधन किया जा चुका है।
edited by : Nrapendra Gupta
