सूडान में परस्पर विरोधी सैन्य बलों के बीच हिंसक टकराव अपने चौथे वर्ष में प्रवेश कर चुका है और वहां आम नागरिक भय, हिरासत में लिए जाने या ग़ायब होने की आशंका में अपना जीवन गुज़ारने के लिए मजबूर हैं। सूडान के लिए स्वतंत्र, अन्तरराष्ट्रीय तथ्य-खोजी मिशन ने सोमवार को मानवाधिकार परिषद के 62वें सत्र के लिए अपने नए अपडेट में यह जानकारी दी है। आम नागरिकों पर वफ़ादारी दिखाने का दबाव बढ़ रहा है। मनमाने ढंग से की गई गिरफ़्तारियों और फिरौती की रक़म ऐंठे जाने की वजह से सूडान में मानवीय आपात स्थिति जटिल हो गई है। कुछ मामलों में परिवारों ने हिरासत में रखे गए अपने परिजन की रिहाई के लिए बड़ी धनराशि अदा की है, जो कि 40 हज़ार डॉलर तक हो सकती है।
15 अप्रैल 2023 को सूडानी सशस्त्र बलों और अर्द्धसैनिक बल (RSF) के बीच, देश पर नियंत्रण के मुद्दे पर मतभेदों की वजह से लड़ाई भड़क उठी थी। स्वतंत्र मिशन के प्रमुख मोहम्मद चांदे उथमान ने बताया कि आम नागरिक अब भी इस हिंसक टकराव का भीषण बोझ झेल रहे हैं और हिंसा, दमन की एक ऐसी व्यापक प्रणाली में तब्दील हो गई है, जो कि नागरिक समाज के हर पहलू को अपनी चपेट में ले रही है।
सूडान के अनेक परिवारों के लिए केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाना एक ख़तरनाक क़दम बन चुका है। आम नागरिकों को चेक प्वाइंट पर रोके जाने, उन पर विरोधी सैन्य बलों का समर्थन करने का आरोप मढ़ने और बिना किसी क़ानूनी कार्रवाई के हिरासत में लिए जाने के मामलों में जानकारी जुटाई गई है।
ALSO READ: कांगो में इबोला वायरस का नया खौफ, बच्चों में संक्रमण बढ़ने की आशंका, WHO का अलर्ट
अलग-अलग सैन्य बलों के नियंत्रण वाले इलाक़ों के बीच में से होकर आवाजाही, गिरफ़्तारी, दुर्व्यवहार व जबरन गुमशुदगी की वजह बन सकती है। इन हालात में पत्रकार, मानवीय सहायताकर्मी, व्यापारी, सामुदायिक नेता और आम लोग भी प्रभावित हैं, जो किसी तरह सुरक्षित इलाक़ों में जाने या आजीविका चलाने की कोशिशों में जुटे हैं।
विशेषज्ञ सदस्य जॉय न्गोज़ी ऐज़ीलो ने बताया कि आम नागरिकों पर वफ़ादारी दिखाने का दबाव बढ़ रहा है और कुछ मामलों में उनकी सुरक्षा, आज़ादी और आर्थिक गुज़र-बसर की शर्त यह है कि वे युद्धरत पक्ष के समर्थन में खड़े हों।
संकट के गर्त में परिवार
स्वतंत्र तथ्य-खोजी मिशन के अनुसार, मनमाने ढंग से की गई गिरफ़्तारियों और फिरौती की रक़म ऐंठे जाने की वजह से सूडान में मानवीय आपात स्थिति जटिल हो गई है। कुछ मामलों में परिवारों ने हिरासत में रखे गए अपने परिजन की रिहाई के लिए बड़ी धनराशि अदा की है, जो कि 40 हज़ार डॉलर तक हो सकती है। पहले से ही हिंसक टकराव, विस्थापन और बदहाल आजीविकाओं से जूझ रहे देश के लोगों के लिए यह एक बड़ी रक़म है।
ALSO READ: तंबाकू की लत से पाना चाहते हैं छुटकारा, सरकार की इस फ्री हेल्पलाइन से उठाएं फायदा
मिशन ने कहा कि इन कारणों से स्थानीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। अल फ़शर, अल ओबेद, डिलिंग और कडूग्ली में, लड़ाई के अग्रिम मोर्चे से गुज़र रहे व्यापारियों को हिरासत में लिए जाने या अगवा किए जाने का गम्भीर जोखिम है। स्थानीय नागरिकों की खाद्य सामग्री तक पहुंच कम हुई है और असुरक्षा गहरा रही है।
सहायताकर्मियों की गुमशुदगी
मिशन ने चिंता जताई है कि कम से कम 70 लोगों को मई 2026 में अल जिनीना में गिरफ़्तार किया गया था, जिनमें अनेक मानवीय सहायताकर्मी भी थे। उसके बाद से उनसे संपर्क नहीं हो पाया है और यह भी स्पष्ट नहीं है कि उन्हें कहां रखा गया है?
ALSO READ: यूक्रेन में रूसी सैन्यबलों के हवाई हमलों की एक और लहर, संयुक्त राष्ट्र ने की निंदा
विशेषज्ञ सदस्य मोना रिशमावी ने कहा कि किसी भी परिवार को सन्नाटे और अनिश्चितता में जीवन गुज़ारने के लिए नहीं छोड़ा जाना चाहिए, जब वे अपने प्रियजन को ढूंढ रहे हों। उन्होंने ध्यान दिलाया कि मानवीय सहायताकर्मियों के विरुद्ध हमलों से राहत प्रयास कमज़ोर होते हैं और पूरे समुदायों के लिए जोखिम बढ़ता है, चूंकि उनके पास जीवनरक्षक सहायता नहीं पहुंच पाती है।
जवाबदेही का आग्रह
स्वतंत्र मिशन ने सभी पक्षों से आग्रह किया है कि लोगों को मनमाने ढंग से गिरफ़्तार करने, हिरासत में लेने पर रोक लगाई जानी होगी। बिना किसी क़ानूनी आधार के पकड़े गए व्यक्तियों को रिहा करना होगा और यह बताना होगा कि हिरासत में रखे गए लोगों को कहां रखा गया है? साथ ही हिरासत केन्द्रों में स्वतंत्र पहुंच मुहैया कराई जानी चाहिए और जवाबदेही तय करने के लिए नए सिरे से अन्तरराष्ट्रीय प्रयास किया जाना अहम है।
ALSO READ: सूडान युद्ध : घर लौटने वाले हताश नागरिकों के लिए चुनौतियों का नया अंबार
जांचकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि पुख़्ता कार्रवाई के अभाव में दुर्व्यवहार की घटनाओं को और अधिक हवा मिल सकती है, जिससे सूडानी नागरिक अपना दैनिक जीवन, भय, अनिश्चितता व अलग-थलग रहकर जीने के लिए मजबूर होंगे। सूडान के लिए स्वतंत्र, अन्तरराष्ट्रीय तथ्य-खोजी मिशन के सदस्यों को यूएन मानवाधिकार परिषद द्वारा नियुक्त किया गया था। वे यूएन कर्मचारी नहीं है और उन्हें काम के बदले भुगतान नहीं किया जाता है।
