इस कारण श्रीलंकाई बल्लेबाज को पड़ी फटकार और मिला एक डीमेरिट अंक (Video)

INDvsSL श्रीलंका के स्पिनर प्रभात जयसूर्या पर भारत के खिलाफ टेस्ट सीरीज जिताने का बड़ा दारोमदार था लेकिन वह इसमें पूरी तरह विफल रहे। गाले टेस्ट में उन्होंने 5 विकेट जरूर चटकाए लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। वहीं कोलंबो टेस्ट में भी उनकी गेंदबाजी भारतीय बल्लेबाजों को परेशान करने में विफल रही। इस बात का ही खीज रही जब उनको रात्रि प्रहरी बनाकर कोलंबो टेस्ट के दूसरे दिन पिच पर भेजा गया तो वह पगबाधा आउट हो गए और बल्ला सीमा की रस्सी पर दे मारा।

श्रीलंका के स्पिनर प्रभात जयसूर्या को कोलंबो में भारत के खिलाफ दूसरे टेस्ट के दूसरे दिन आईसीसी आचार संहिता का उल्लंघन करने के लिए फटकार लगाई गई और उनके खाते में एक डिमैरिट अंक जोड़ा गया।

आईसीसी ने कहा कि जयसूर्या को खिलाड़ियों और सहयोगी स्टाफ के लिए आईसीसी आचार संहिता के अनुच्छेद 2.2 का उल्लंघन करते हुए पाया गया है जो अंतरराष्ट्रीय मैच के दौरान क्रिकेट उपकरण या पोशाक को नुकसान पहुंचाने से जुड़ा है।

आईसीसी ने कहा कि इस खिलाड़ी का पिछले 24 महीने यह पहला अपराध था।दूसरे दिन के खेल की आखिरी गेंद पर भारतीय स्पिनर मानव सुथार की गेंद पर पगबाधा आउट होने के बाद जयसूर्या ने पवेलियन लौटते समय बाउंड्री पर अपना बल्ला पटका था।

जयसूर्या ने अपराध स्वीकार किया और मैच रेफरी एंडी पाइक्रॉफ्ट द्वारा प्रस्तावित दंड को मान लिया।इससे पहले, कोलंबो टेस्ट के पहले दिन मैदान पर हुई झड़प के लिए भारतीय सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल और श्रीलंकाई तेज गेंदबाज असिथा फर्नांडो पर मैच फीस का 25 प्रतिशत जुर्माना लगाया गया और उनके खाते में एक-एक डिमैरिट अंक भी जोड़ा गया था।

ऋषभ पंत की चोट है गंभीर, गेंदबाजी कोच के बयान से टीम और फैंस चिंता में

भारत के गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्कल ने मंगलवार को कहा कि विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत को कंधे पर ‘काफी चोट’ लगी है जिससे उनकी मूवमेंट प्रभावित हुई है लेकिन उन्हें उम्मीद है कि वह श्रीलंका के खिलाफ यहां चल रहे दूसरे टेस्ट के चौथे दिन मैदान पर लौटेंगे।

पंत ने यहां तीसरे दिन विकेटकीपिंग नहीं की और ध्रुव जुरेल ने उनकी जगह यह जिम्मेदारी निभाई।दूसरे दिन बल्लेबाजी के दौरान कंधे पर चोट लगने के बाद पंत ड्रेसिंग रूम में हाथ में पट्टी बांधकर दिखे।

मोर्कल ने दिन का खेल समाप्त होने के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘‘ऋषभ के कंधे पर चोट लगी है। इस बारे में कल रात भी चर्चा हुई थी क्योंकि उन्हें काफी चोट लगी है। मुझे लगता है कि आज सुबह वार्मअप करने की कोशिश के दौरान उनकी मूवमेंट सीमित थीं।’’उन्होंने कहा, ‘‘अब हम रातभर उनकी स्थिति पर नजर रखेंगे और उम्मीद है कि कल वह हमारे लिए विकेटों के पीछे मौजूद होंगे। उनका वहां होना महत्वपूर्ण है क्योंकि खेल को समझने की उनकी क्षमता असाधारण है।’’

मोर्कल ने कहा कि अगर कुलदीप यादव दूसरे टेस्ट से पहले वायरल बुखार की चपेट में नहीं आए होते तो चयन के लिए उनके नाम पर विचार किया जाता।उन्होंने कहा, ‘‘नहीं, चयन मेरे हाथ में नहीं है। मुझे लगता है कि पहले टेस्ट के लिए उन्हें कुछ निश्चित भूमिकाएं निभाने को कहा गया था जो थोड़ा मुश्किल टेस्ट था। लेकिन मेरे हिसाब से वह अंतिम चयन के दावेदारों में जरूर होते।’’

दक्षिण अफ्रीका के पूर्व तेज गेंदबाज मोर्कल ने कहा कि भारत बुधवार को जल्द से जल्द श्रीलंका के बचे हुए दो विकेट हासिल करके बढ़त अपने पक्ष में बनाए रखना चाहेगा। श्रीलंका की ओर से सोनल दिनुशा, केशरा नुवंता और लाहिरू कुमारा ने संघर्षपूर्ण पारियां खेलीं। मोर्कल ने कहा कि क्रिकेट में ऐसे दौर आते रहते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘आप जितनी जल्दी हो सके मैदान से बाहर आना चाहते हैं, हमेशा यही योजना होती है। लेकिन यह खेल का हिस्सा है। कभी-कभी कूकाबूरा गेंद थोड़ी नरम हो जाती है और पिच से गेंद को अतिरिक्त तेजी दिलाना काफी मुश्किल होता है।’’मोर्कल ने कहा, ‘‘मुझे लगा कि उन्होंने (श्रीलंका ने) काफी अच्छी बल्लेबाजी की और वहां अच्छी साझेदारी बनाई। मुझे नहीं लगता कि उन्हें गेंदबाजी करने में हमें कोई परेशानी हुई, यह सिर्फ खेल की प्रकृति है।’’

कृष्णा और सुथार के 3-3 विकेट, सोनल लड़ रहे श्रीलंका को फॉलोऑन से बचाने के लिए

INDvsSL प्रसिद्ध कृष्णा और मानव सुथार के 3-3 विकेट के कारण भारत ने 83.4 ओवरों में श्रीलंका के 265 रनों पर 8 विकेट गंवा दिए हैं। इसके बाद बारिश के कारण मैच को रोकना पड़ा। अंतिम सत्र में श्रीलंका ने काहिरा का विकेट खोया और लाहिरू 8 रन और सोनल दिनूशा 85 रन पर क्रीज पर खड़े हुए हैं। श्रीलंका अभी भारत से 239 रन पीछे है और फॉलोऑन टालने के लिए मेजबान को 39 रन चाहिए।

श्रीलंका ने सुबह दो विकेट पर आठ रन से आगे खेलना शुरू किया और पहले सत्र में 122 रन जोड़े। बारिश के कारण देर से शुरू हुए दूसरे सत्र में उसने 86 रन जोड़े और इस बीच तीन विकेट गंवाए।मानव सुथार की सटीक गेंदबाजी से भारत ने लंच के बाद श्रीलंका को शुरुआती झटका दिया। सुथार की गेंद धनंजय डी सिल्वा के बल्ले का किनारा देकर पहली स्लिप में केएल राहुल के सुरक्षित हाथों में चली गई।

लेकिन श्रीलंका को सबसे बड़ा झटका पासिंदु सूरियाबंडारा (80) के आउट होने से लगा, जिन्होंने धैर्य के साथ बल्लेबाजी की। रविंद्र जडेजा ने उन्हें चकमा देकर बोल्ड किया।इसके दो रन बाद मोहम्मद सिराज ने लेग साइड से डाली गई एक साधारण सी गेंद पर निरोशन डिकवेला को आउट कर दिया। विकेटकीपर ध्रुव जुरेल ने उनका कैच लिया।

पहले सत्र के खेल के दौरान ऋषभ पंत की जगह क्षेत्ररक्षण करने आए सरफराज खान, मोहम्मद सिराज और श्रीलंकाई बल्लेबाजों के बीच हुई जुबानी जंग से यह सत्र और भी रोमांचक हो गया।प्रसिद्ध कृष्णा ने दिन के सातवें ओवर में ही अपना पहला टेस्ट मैच खेल रहे कामिल मिसारा (19) को विकेट के पीछे कैच करा दिया। प्रसिद्ध की तेजी से उठती गेंद को मिसारा नहीं समझ पाए। गेंद उनके बल्ले को चूमकर विकेटकीपर जुरेल के हाथों में चली गई।

लेकिन सूरियाबंडारा और कामिंदु मेंडिस (32) ने भारत को लगभग दो घंटे तक विकेट से महरूम रखा। इन दोनों बल्लेबाजों ने मानव सुथार और अपना पहला टेस्ट मैच खेल रहे सारांश जैन को हावी नहीं होने दिया।ऑफ स्पिनर जैन ने कुछ उछाल और टर्न हासिल किया लेकिन श्रीलंका के बल्लेबाजों को परेशानी में नहीं डाल सके। सूरियाबंडारा और मेंडिस ने चौथे विकेट के लिए 87 रन जोड़े।

इसमें अपना दूसरा टेस्ट खेल रहे सूरियाबंडारा का योगदान महत्वपूर्ण रहा। दाएं हाथ के इस बल्लेबाज में 76 गेंद पर अपना पहला अर्धशतक पूरा किया।दूसरी ओर, मेंडिस ने मानव सुथार की गेंद पर मिड-विकेट के ऊपर से छक्का लगाकर अपने इरादे स्पष्ट किए। प्रसिद्ध ने लंच से ठीक पहले तेजी से उछाल लेती गेंद पर मेंडिस को मिड विकेट पर खड़े रविंद्र जडेजा के हाथों कैच कराकर यह साझेदारी तोड़ी।

महिला एशिया कप में नकवी और कैद ट्रॉफी सीजन 2 दोहराने की पूरी संभावना

INDvsPAK

पिछले साल भारत ने पाकिस्तान को एशिया कप फाइनल में 5 वितेट से शिकस्त देकर खिताब अपने नाम किया था लेकिन ट्रॉफी भारत के हिस्से में नहीं आ पाई थी। सेरेमनी में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड और एशियाई क्रिकेट परिषद के प्रमुख मोहसिन नकवी को यह ट्रॉफी भारत को सौंपनी थी लेकिन ऐसा हो नहीं पाया क्योंकि भारतीय खिलाड़ियों ने बिगड़े हुए भूराजनैतिक संबंधो के कारण नकवी से ट्रॉफी लेने से मना कर दिया था। इस बात पर नाराज नकवी ट्रॉफी लेकर ही चल दिए थे और आज भी वह ट्रॉफी दुबई के दफ्तर में रखी हुई है। 

ऐसा एक बार फिर हो सकता है क्योंकि भारत को महिला एशिया कप में भी मोहसिन नकवी से ही ट्रॉफी लेनी होगी।नक़वी पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के प्रमुख और अपने देश के गृह मंत्री भी हैं। महिला एशिया कप 28 अगस्त से 13 सितंबर तक खेला जाएगा।भारत और पाकिस्तान को एक ही ग्रुप में रखा गया है और लीग चरण का उनका मुकाबला पांच सितंबर को होना है। इसके बाद इन दोनों टीम का मुकाबला फाइनल में हो सकता है और ऐसे में पुरस्कार वितरण का मसला फिर से सुर्खियों में आ सकता है।

अब स्वाभाविक सवाल यह उठता है कि अगर हरमनप्रीत कौर की अगुवाई वाली भारतीय टीम महिला एशिया कप जीत जाती है और नक़वी पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान मंच पर मौजूद होते हैं तो फिर आगे क्या होगा?
क्या भारतीय महिला टीम भी सूर्यकुमार यादव और उनके साथियों की तरह नक़वी से ट्रॉफी लेने से इनकार कर देगी? इस मामले में बीसीसीआई का रुख अभी स्पष्ट नहीं है।

बोर्ड का यह स्पष्ट मत है कि दोनों टीमों के बीच किसी प्रकार की औपचारिक बातचीत नहीं होगी, लेकिन वह पुरस्कार वितरण समारोह के लिए इंतजार करने की नीति अपनाएगा।पिछले साल की तरह विवाद से बचने का एक तरीका यह हो सकता है कि नकवी स्वयं ट्रॉफी प्रदान नहीं करें और एशियाई क्रिकेट परिषद के किसी अन्य अधिकारी को यह सम्मान प्रदान करने दें।

भारतीय पुरुष टीम के नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार करने के बाद इसे एसीसी के कार्यालय में रखा गया है। नकवी ने बाद में कहा था कि भारत एसीसी कार्यालय में आकर उनसे ट्रॉफी ले सकता है।इस गतिरोध को समाप्त करने का भी प्रयास किया गया जिसमें बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने आईसीसी की बैठक के दौरान नकवी से मुलाकात की।

सैकिया ने कहा था कि दोनों पक्षों के बीच गतिरोध समाप्त हो गया है लेकिन उस समय भी ट्रॉफी का मुद्दा नहीं सुलझ पाया था। इसके बाद नक़वी ने कहा कि भारत को उनसे ही ट्रॉफी लेनी होगी।फिलहाल सभी का ध्यान टूर्नामेंट पर केंद्रित है लेकिन अगर भारत चैंपियन बनता है तो यह मामला फिर से गर्मा सकता है।

‘जय जवान, जय किसान’ सिर्फ टैटू नहीं, ध्रुव जुरेल की भावुक कर देने वाली कहानी है, VIDEO में देखें

श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट के दूसरे दिन ध्रुव जुरेल ने अपने टेस्ट करियर का दूसरा शतक जड़कर महफिल लूट ली। जुरेल ने नाबाद 115 रन की पारी खेली और भारत को 503/9 घोषित के मजबूत स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। उनके शतक की खास बात सिर्फ उनका शानदार बल्लेबाजी प्रदर्शन नहीं था, बल्कि सेंचुरी पूरी करने के बाद किया गया उनका सेलिब्रेशन भी रहा। जुरेल ने बैट उठाकर शतक का जश्न मनाया और फिर अपनी बांह पर बना ‘जय जवान, जय किसान’ (Jai Jawan Jai Kishan Tattoo) टैटू दिखाया। यह पल सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना, क्योंकि इस टैटू के पीछे जुरेल की अपनी जड़ों और परिवार से जुड़ी बेहद खास कहानी है। 

 पिता सैनिक, दादा किसान… जुरेल ने बताया टैटू का मतलब

 

जुरेल ने दिन का खेल खत्म होने के बाद बताया कि ‘जय जवान, जय किसान’ उनके लिए सिर्फ एक स्लोगन नहीं, बल्कि उनकी पहचान और परिवार की विरासत है। उन्होंने कहा कि उनके दादा किसान थे, जबकि पिता भारतीय सेना में सैनिक रहे है। उनके पिता ने 1999 के कारगिल युद्ध में भी हिस्सा लिया था। यही वजह है कि जुरेल अपनी बांह पर इस संदेश को हमेशा अपने साथ रखना चाहते हैं। सेंचुरी के बाद उनका सलाम और टैटू दिखाने वाला सेलिब्रेशन भी उन्होंने अपने पिता और दादा को समर्पित किया। जुरेल के मुताबिक, ये वही जड़ें हैं जहां से वह आए हैं और वह इन्हें कभी नहीं भूलना चाहते। दूसरे दिन के खेल में उनका यह अंदाज शतक से भी ज्यादा भावुक कर देने वाला पल बन गया। 

पंत के साथ 112 रन की साझेदारी, लेकिन अपना गेम नहीं छोड़ा

 

जुरेल ने दूसरे दिन ऋषभ पंत के साथ मिलकर 112 रन की साझेदारी की। पंत ने अपने आक्रामक अंदाज में 63 रन बनाए, जबकि जुरेल ने दूसरी तरफ संयम और समझदारी से अपनी पारी को आगे बढ़ाया। पंत के साथ बल्लेबाजी को लेकर जुरेल ने कहा कि वह उनके अनुभव से काफी कुछ सीखते हैं और मुश्किल परिस्थितियों में उनसे सलाह भी लेते हैं। हालांकि, उन्होंने यह साफ किया कि पंत की तरह खेलने की कोशिश करना उनके गेम का हिस्सा नहीं है।

शतक, सलाम और ‘जय जवान, जय किसान’… ध्रुव जुरेल के टैटू का इमोशनल कनेक्शन, VIDEO
उनका फोकस अपनी ताकत के मुताबिक बल्लेबाजी करने, सही गेंदबाज को निशाना बनाने और सही समय पर जोखिम लेने पर रहता है। जुरेल ने यह भी बताया कि शतक पूरा करने में मोहम्मद सिराज की भूमिका अहम रही, जिन्होंने उनके साथ टिककर 29 गेंदें खेलीं और उन्हें सेंचुरी तक पहुंचने का मौका दिया। 

 

विश्व चैंपियनशिप में विफल हुई PV सिंधु चाईना मास्टर्स से हटी

स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु और आयुष शेट्टी आने वाले चाइना मास्टर्स सुपर 750 से हट गए हैं, जो 1 सितंबर से शुरू हो रहा है। यह टूर्नामेंट एशियन गेम्स से पहले एकमात्र बड़ा BWFवर्ल्ड टूर इवेंट होगा। आयुष का नई दिल्ली में वर्ल्ड चैंपियनशिप में यादगार प्रदर्शन रहा, जहाँ उन्होंने पहले राउंड में दुनिया के नंबर 1 शी युकी को हराया था।

इसके बाद भारतीय खिलाड़ी इंडोनेशिया के अल्वी फरहान से हारने से पहले राउंड ऑफ़ 16 में पहुँचे थे। आयुष के हटने के बाद, लक्ष्य सेन और किदांबी श्रीकांत पुरुष सिंगल्स में भारत के रिप्रेजेंटेटिव होंगे। हालाँकि, लक्ष्य को वर्ल्ड चैंपियनशिप में दूसरे राउंड में अमेरिका के वर्ल्ड नंबर 92 गैरेट टैन से हारने के बाद जल्दी बाहर होना पड़ा।

सिंधु ने वर्ल्ड चैंपियनशिप के राउंड ऑफ़ 16 में भी हिस्सा लिया था, जहाँ वह एक करीबी मुकाबले में चीन की वर्ल्ड नंबर 3 वांग ज़ी यी से हार गईं। ऐसा लग रहा था कि भारतीय खिलाड़ी इस मुश्किल मैच का असर महसूस कर रही हैं, जिसकी वजह से उन्होंने चाइना मास्टर्स से हटने का फैसला किया होगा। मालविका बंसोड़ और आकर्षि कश्यप भी हट गई हैं, जिससे महिला सिंगल्स में उन्नति हुड्डा, देविका सिहाग और तन्वी शर्मा भारत की चुनौती संभालेंगी।

पुरुषों युगल में सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी, हरिहरन अमासुकरन और अर्जुन एमआर के साथ भारतीय टीम की कमान संभालेंगे। सात्विक और चिराग वर्ल्ड चैंपियनशिप में चोट के कारण बाहर रहने के बाद लौटे थे, लेकिन राउंड ऑफ़ 16 में चीन के लियांग वेइकेंग और वांग चांग से हार गए थे। भारत की महिला डबल्स ड्रॉ में कोई जोड़ी नहीं होगी, क्योंकि ट्रीसा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने वर्ल्ड चैंपियनशिप में अपने ऐतिहासिक ब्रॉन्ज़ मेडल जीतने के बाद बाहर होने का फैसला किया है।

2011 में ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा के ब्रॉन्ज़ मेडल के बाद, भारतीय जोड़ी वर्ल्ड चैंपियनशिप में मेडल जीतने वाली देश की दूसरी महिला डबल्स जोड़ी बन गई। मिक्स्ड डबल्स में, ध्रुव कपिला और तनिषा क्रैस्टो, रोहन कपूर और रुत्विका शिवानी के साथ, भारत को रिप्रेजेंट करेंगे। भारत ने 2011 से हर वर्ल्ड चैंपियनशिप में कम से कम एक मेडल जीतने का अपना शानदार सिलसिला जारी रखा, 2026 एडिशन रविवार को नई दिल्ली में खत्म होगा।

Duleep Trophy में वैभव का गेंद से कमाल 4 गेंदों में झटके 2 विकेट (Video)

बिहार के वैभव सूर्यवंशी आईसीसी टूर्नामेंट्स और इंडियन प्रीमियर लीग में अपनी बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं लेकिन दिलीप ट्रॉफी में उन्होंने दिखाया कि वह गेंद से भी उतना ही कमाल कर सकते हैं। ईस्ट जोन के उपकप्तान वैभव सूर्यंवशी ने आज दलीप ट्रॉफी क्वार्टरफाइनल में नॉर्थ इस्ट जोन के खिलाफ 4 गेंदों में 2 विकेट चटकाए। उन्होंने नॉर्थ ईस्ट के किशन को 25 रनों पर और इमलिवती को 4 रनों पर आउट किया। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

15 साल के इस खिलाड़ी के लिए यह सीज़न शानदार रहा है। इस उभरते हुए बल्लेबाज ने इंग्लैंड में तीन टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में 14, 13 और 15 रन बनाए। इनमें से दो पारियों में सूर्यवंशी जोफ्रा आर्चर की शॉर्ट गेंद पर आउट हुए। इंग्लैंड दौरे पर भारत के लिए अपने डेब्यू में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन न कर पाने के बाद, सूर्यवंशी ने ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ टी20 सीरीज़ में प्रभावित किया। वहाँ उन्होंने कई मैचों में जीत दिलाने वाला प्रदर्शन किया और ‘प्लेयर ऑफ़ द सीरीज़’ चुने गए।

हालांकि इस 15 वर्षीय खिलाड़ी ने बिहार के लिए आठ प्रथम श्रेणी मैचों की 12 पारियों 17 से अधिक के औसत से रन बनाए हैं जो कि आकर्षक नहीं हैं। उनका सर्वोच्च स्कोर 93 रन है।ईस्ट ज़ोन ने एक मज़बूत टीम चुनी है जिसमें कई अनुभवी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी शामिल हैं। चुने गए प्रमुख खिलाड़ियों में भारत के अनुभवी तेज़ गेंदबाज़ मोहम्मद शमी, बंगाल के कप्तान अभिमन्यु ईश्वरन, तेज़ गेंदबाज़ मुकेश कुमार, ऑलराउंडर शाहबाज़ अहमद और विकेटकीपर-बल्लेबाज़ कुमार कुशाग्र शामिल हैं।

कभी भारत की टीम में जगह बनाने की चाह रखने वाले खिलाड़ियों के लिए महत्वपूर्ण टूर्नामेंट रहे दलीप ट्रॉफी अब महज बीसीसीआई के कैलेंडर में एक और टूर्नामेंट बनकर रह गया है क्योंकि अधिकतर खिलाड़ी टेस्ट टीम में जगह बनाने की दौड़ में नहीं हैं।

रणजी ट्रॉफी की तरह ही दलीप ट्रॉफी भी भारत ए की टीम में जगह बनाने का जरिया रह गया है। इसमें अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी सितंबर के आखिर और अक्टूबर की शुरुआत में पुडुचेरी में ऑस्ट्रेलिया ए टीम के खिलाफ होने वाले दो चार दिवसीय ‘टेस्ट’ मैचों के लिए दावेदार हो सकते हैं।

5 सत्रों में टेस्ट खत्म, ऑस्ट्रेलिया ने थमाई बांग्लादेश को पारी की हार

AUSvsBAN मिचेल स्टार्क (चार विकेट), पैट कमिंस और नेथन लायन (तीन-तीन विकेट) के बेहतरीन गेंदबाजी प्रदर्शन की बदौलत ऑस्ट्रेलिया ने दूसरे टेस्ट के दूसरे दिन रविवार को बंगलादेश को दूसरी परी में 95 रन पर ढेर कर मुकाबला पारी और 51 रनों से अपने नाम कर लिया। इसी के साथ ऑस्ट्रेलिया ने दो मैचों की सीरीज 1-1 से बराबर कर ली।

इस मैच में कुल 10 विकेट लेने वाले ऑस्ट्रेलिया तेज गेंदबाज मिचेल स्टार्क को ‘प्लेयर ऑफ द मैच तथा सीरीज में कुल12 विकेट लेने पर ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ के पुरस्कार से नवाजा गया।यह ऑस्ट्रेलिया में खेला गया अब तक का दूसरा सबसे छोटा टेस्ट मैच है। यह अब तक का चौथा सबसे छोटा टेस्ट मैच है। यह पहली बार है जब बंगलादेश की टीम एक टेस्ट मैच में दो बार 100 रन से कम पर ऑल-आउट हुआ है, और 21 साल में पहली बार ऐसा हुआ है जब कोई टीम दोनों पारियों में 100 रन से कम पर ऑल-आउट हुई है।

ऑस्ट्रेलिया ने आठ विकेट पर 165 रनों से आगे खेलना शुरु किया। सुबह के सत्र में शोरिफुल इस्लाम और तैजुल इस्लाम ने कैमरन ग्रीन (67) और जॉश हेजलवुड (छह) को आउट कर ऑस्ट्रेलिया को पहली पारी में 210 रन के स्कोर पर रोक दिया। इसी के साथ ऑस्ट्रेलिया को पहली 146 रनों की महत्वपूर्ण बढ़त मिल गई। बंगलादेश की ओर शोरिफुल इस्लाम ने (सात विकेट) लिये। तस्कीन अहमद, तैजुल इस्लाम और मेहदी हसन मिराज ने एक-एक बल्लेबाज को आउट किया।

इसके बाद दूसरी पारी में बल्लेबाजी करने उतरी बंगलादेश की टीम ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजी आक्रमण के आगे अधिक देर तक नहीं टिक सकी और उसकी पूरी टीम 38.3 ओवरों में 95 रन पर सिमट गई। स्टार्क और कमिंस ने बंगलादेश को शुरुआती झटके दिये। तंजिद हसन (नौ), शादमान इस्लाम (एक) और मोमिनुल हक (शून्य) पर आउट हुये। इसके बाद कप्तान नजमुल शांतो और मुशफ़िक़ुर रहीम ने पारी को संभालने का प्रयास किया। 21वें ओवर में नेथन लायन ने नजमुल शांतो (31) रन को आउट कर इस साझेदारी का अंत कर दिया।

शांतो ने अपनी इस पारी में छह चौके लगाये। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया गेंदबाजी आक्रमण के आगे बंगलादेश का कोई भी बल्लेबाज अधिक देर तक नहीं टिक सका। हालांकि इस दौरान मुशफिकुर रहीम एक छोर थामे खड़े रहे। मुशफिकुर रहीम ने इस दौरान 80 गेंदों का सामना किया और तीन चौके लगाते हुए 29 रन पर नाबाद रहे। 39वें ओवर में नेथन लायन ने तसकीन अहमद (आठ) और फिर शोरिफुल इस्लाम (शून्य) को आउटकर ऑस्ट्रेलिया को बड़ी जीत दिला दी।

श्रीलंका के कप्तान धनंजय टेस्ट टीम की इस कमी से हैं परेशान

श्रीलंका के कप्तान धनंजय डीसिल्वा चाहते हैं कि टीम के पास 140 किमी प्रति घंटे से ज़्यादा रफ़्तार से गेंदबाज़ी करने वाले कम से कम “दो या तीन गेंदबाज़” होने चाहिए।धनंजय डीसिल्वा चाहते हैं कि उनके पास चुनने के लिए ज़्यादा तेज़ गेंदबाज़ हों, और वह मौजूदा तेज़ गेंदबाज़ों से भी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद रखते हैं।

असिता फ़र्नांडो पिछले कुछ वर्षों में अपने बेहतर प्रदर्शन के कारण श्रीलंका के प्रमुख तेज़ गेंदबाज़ बन गए हैं। हालांकि वह 130 किमी प्रति घंटे के आसपास की रफ़्तार से लगातार सटीक लाइन-लेंथ और तीव्रता के साथ गेंदबाज़ी करते हैं। श्रीलंका आम तौर पर दूसरे छोर से अधिक रफ़्तार वाले गेंदबाज़ के ज़रिए बल्लेबाज़ों को परेशान करने की कोशिश करता है।

असिता के साथ यह भूमिका फ़िलहाल लहिरू कुमारा निभाते हैं, जिनके नाम 36 टेस्ट में 36.38 की औसत से 106 विकेट हैं। भारत के ख़िलाफ़ गॉल टेस्ट में उन्होंने 175 रन देकर सिर्फ़ दो विकेट लिए थे। इसके अलावा चोटों ने भी उनके करियर का बड़ा हिस्सा प्रभावित किया है।

दूसरे टेस्ट से पहले डीसिल्वा ने कहा, “हमने लहिरू कुमारा को चोट-मुक्त रखने के लिए बहुत मेहनत की है। फ़िलहाल हमारे संसाधनों को देखते हुए असिता के साथ खेलने के लिए वही सबसे उपयुक्त विकल्प हैं। असिता की लाइन और लेंथ बेहतरीन है और लहिरू कुमारा के पास रफ़्तार है। अभी हमारे पास यही सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी हैं।”

हालांकि डीसिल्वा चाहते हैं कि उनके पास ज़्यादा तेज़ गेंदबाज़ों के विकल्प हों। श्रीलंका के पास दुश्मंता चमीरा, दिलशान मदुशंका और मथीशा पथिराना जैसे गेंदबाज़ भी हैं। मदुशंका तो गॉल टेस्ट के लिए श्रीलंका की टेस्ट टीम का हिस्सा भी थे, लेकिन बाद में उन्हें घरेलू टी 20 खेलने के लिए रिलीज़ कर दिया गया और एसएससी टेस्ट के लिए भी टीम में जगह नहीं मिली।

चमीरा ने अपने करियर में 12 टेस्ट खेले हैं, लेकिन उनका आख़िरी टेस्ट 2021 में आया था। चोटों के इतिहास और सीमित ओवरों की टीम में उनकी अहमियत को देखते हुए श्रीलंका ने उन्हें सफ़ेद गेंद वाले क्रिकेट के लिए सुरक्षित रखा है।

चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन ने अभी तक बहु-दिवसीय क्रिकेट के लिए तेज़ गेंदबाज़ों का दायरा बढ़ाने की कोई गंभीर योजना नहीं बनाई है। डीसिल्वा ने कहा, “मैं यह भी चाहता हूं कि हमारे पास 140 किमी प्रति घंटे से ज़्यादा रफ़्तार वाले दो या तीन गेंदबाज़ हों, लेकिन दुर्भाग्य से टेस्ट सेटअप में अभी हमारे पास सिर्फ़ एक ही ऐसा गेंदबाज़ है। फ़िलहाल मुझे इस बारे में कोई बड़ी योजना नहीं बताई गई है कि टेस्ट टीम में किन खिलाड़ियों को लाया जा सकता है। उम्मीद है कि भविष्य में हम ऐसे और क्रिकेटर तैयार करेंगे।”

डीसिल्वा की कप्तानी में आक्रमण में दो तेज़ गेंदबाज़ खिलाना एक नियमित रणनीति रही है। पूर्व कोच क्रिस सिल्वरवुड और सनथ जयसूर्या भी तेज़ गेंदबाज़ी प्रतिभा को विकसित करने पर ज़ोर देते रहे हैं। 2010 के दशक के उत्तरार्ध में श्रीलंका घरेलू मैदानों पर स्पिन पर इतना निर्भर हो गया था कि वह अक्सर सिर्फ़ एक तेज़ गेंदबाज़ के साथ खेलता था।

डीसिल्वा ने कहा, “मेरी कप्तानी में खेले गए हर मैच में हमने दो तेज़ गेंदबाज़ खिलाए हैं, जबकि पहले सिर्फ़ एक गेंदबाज़ होता था। मेरा मानना है कि श्रीलंका में भी तेज़ गेंदबाज़ों की भूमिका है। अगर आपके तेज़ गेंदबाज़ यहां विकेट ले सकते हैं तो वे दुनिया में कहीं भी विकेट ले सकते हैं। यह बात हमें जल्दी सीखनी होगी।”

पिछले 15 वर्षों में श्रीलंका में सिर्फ़ एक श्रीलंकाई तेज़ गेंदबाज़ ने पांच विकेट लेने का कारनामा किया है। नुवान प्रदीप ने 2017 में भारत के ख़िलाफ़ 132 रन देकर छह विकेट लिए थे। इसी अवधि में 14 विदेशी तेज़ गेंदबाज़ों ने श्रीलंका में पांच विकेट लिए हैं। मिचेल स्टार्क और जुनैद ख़ान ने यह उपलब्धि तीन-तीन बार हासिल की है।

डीसिल्वा ने कहा, “उदाहरण के लिए गॉल में विदेशी तेज़ गेंदबाज़ पांच विकेट ले चुके हैं, लेकिन हाल के वर्षों में हमारे किसी सीमर ने गॉल या एसएससी में ऐसा नहीं किया है। हमारे तेज़ गेंदबाज़ों में उस तरह का आत्मविश्वास नहीं है। अगर वे अपने खेल में कुछ प्रतिशत भी सुधार कर लें तो हम एक टीम के रूप में कहीं बेहतर आगे बढ़ सकते हैं।”

दूसरे टेस्ट के पहले दिन गिरे 18 विकेट, स्टार्क के बाद शोरिफुल का जलवा

AUSvsBAN मैके में एक रोमांचक पहले दिन 18 विकेट गिरे। क्वींसलैंड के इस तटीय मैदान पर पहले टेस्ट के शुरुआती दिन बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ों ने छह-छह विकेट लेकर इसे पुराने ज़माने के गेंदबाज़ों का खेल बना दिया। डार्विन में मिली करारी हार के कुछ ही दिनों बाद, ऑस्ट्रेलिया ने ज़बरदस्त वापसी की। मिशेल स्टार्क के शानदार प्रदर्शन की बदौलत उन्होंने बंगलादेश को 64 रन पर ऑल-आउट कर दिया – जो उनका चौथा सबसे कम टेस्ट स्कोर है। हालांकि, बाद में ऑस्ट्रेलिया की पारी भी लड़खड़ाई, लेकिन दिन का खेल खत्म होने तक उन्होंने 101 रनों की अहम बढ़त बना ली।

पैट कमिंस ने टॉस जीता और बिना किसी हिचकिचाहट के बंगलादेश को पहले बल्लेबाज़ी के लिए बुलाया। इसके बाद स्टार्क ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने मैच की पहली ही गेंद पर शादमान इस्लाम को गली में कैच आउट करा दिया। विकेटों के गिरने का सिलसिला तेज़ी से चला; टॉप-6 बल्लेबाज़ों में से चार बिना खाता खोले आउट हो गए और बंगलादेश का स्कोर सात ओवर के अंदर 5 विकेट पर 12 रन हो गया।

नई गेंद के साथ स्टार्क की गति और स्विंग का बल्लेबाज़ों के पास कोई जवाब नहीं था। उन्होंने 22 गेंदों के अंदर पांच बल्लेबाज़ों को पवेलियन भेज दिया, लेकिन मुशफिकुर रहीम के डटकर खेलने की वजह से उन्हें हैट्रिक का मौका नहीं मिला। पारी के बीच में थोड़ी देर के लिए बंगलादेश की स्थिति संभली। मेहदी हसन मिराज और हसन महमूद ने पहला सेशन निकाला और ब्रेक तक बांग्लादेश का स्कोर 6 विकेट पर 35 रन तक पहुंचा, लेकिन यह राहत ज़्यादा देर नहीं रही। लंच के बाद कमिंस ने दो और विकेट लिए, जबकि जोश हेज़लवुड ने भी एक विकेट चटकाया।

इसके बाद स्टार्क ने वापसी की और बाकी बचे विकेट लेकर 10 ओवर में 12 रन देकर 6 विकेट का शानदार कारनामा पूरा किया। इस प्रदर्शन के साथ ही उन्होंने डेल स्टेन के 439 टेस्ट विकेटों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। बंगलादेश की टीम सिर्फ़ 34 ओवर में ऑल-आउट हो गई। दूसरे सेशन के एक घंटे से भी कम समय में उनकी पारी खत्म हो गई। निचले क्रम के बल्लेबाजों की हिम्मत भरी बल्लेबाजी की वजह से ही वे इस फ़ॉर्मेट में अपने अब तक के सबसे कम स्कोर (वेस्टइंडीज के खिलाफ़ 43 रन) से आगे निकल पाए।

वापसी कर रहे मैट रेनशॉ, ट्रैविस हेड और मार्नस लाबुशेन के नाकाम रहने के बावजूद, ऑस्ट्रेलिया की शुरुआत अच्छी रही। कुछ समय के लिए ऐसा लगा कि वे दिन का खेल पूरी तरह से दबदबे के साथ खत्म करेंगे। स्टीवन स्मिथ और कैमरन ग्रीन ने ऐसी पिच पर बल्लेबाजी को आसान बना दिया, जिसने सुबह से ही बल्लेबाजों को परेशान किया था। उन्होंने हल्के हाथों से गैप में शॉट खेले और छोटी या सीधी गेंदों का फायदा उठाकर स्कोरिंग रेट को पांच रन प्रति ओवर से ऊपर पहुंचाया। इस जोड़ी ने चौथे विकेट के लिए सिर्फ़ 108 गेंदों में 77 रन जोड़े।

फिर शोरिफुल इस्लाम की धीमी गेंद का कमाल दिखा। बांग्लादेश की पारी में सबसे ज़्यादा 14 रन बनाने और हेड व लाबुशेन का विकेट लेने के बाद, इस बाएं हाथ के गेंदबाज ने वही अनुशासन और लाइन-लेंथ दिखाई जिससे स्टार्क को दिन की शुरुआत में सफलता मिली थी। उन्होंने सबसे अहम विकेट लिया और आखिरी सेशन में ड्रिंक्स ब्रेक के ठीक समय पर स्मिथ को 42 रन पर पगबाधा आउट कर दिया।

यहीं से पारी का रुख बदल गया। ऑस्ट्रेलिया के लिए जो दिन अब तक आसान लग रहा था, वह अचानक मुश्किलों में घिर गया। एलेक्स कैरी आगे बढ़कर खेलने की कोशिश में लेंथ बॉल को ठीक से नहीं खेल पाए और मिड-ऑन पर कैच दे बैठे, जिससे ऑस्ट्रेलिया का स्कोर 5 विकेट पर 145 रन हो गया। इसके बाद उन्होंने 3 रन के अंदर 3 विकेट गंवा दिए; शोरिफुल ने ब्यू वेबस्टर और पैट कमिंस को शून्य पर आउट किया और फिर स्टार्क को भी बोल्ड कर दिया।

इन सबके बीच, एक खिलाड़ी अडिग रहा। कैमरन ग्रीन ने उसी स्पष्टता और शांति के साथ बल्लेबाजी की, जो उन्हें डार्विन में फॉर्म में वापसी वाली सेंचुरी के दौरान मिली थी। उनकी नाबाद 51 रनों की पारी वाकई शानदार थी, खासकर ऐसी पिच पर जिसने लगभग हर दूसरे बल्लेबाज को मुश्किल में डाला था। उनके डटे रहने की वजह से ऑस्ट्रेलिया दिन का खेल खत्म होने तक 101 रन आगे रहा। पहले दिन की उथल-पुथल को देखते हुए यह बढ़त काफी अहम साबित हो सकती है।

संक्षिप्त स्कोर: बांग्लादेश 64 (शोरिफुल इस्लाम 14; मिशेल स्टार्क 6-12, पैट कमिंस 3-25), ऑस्ट्रेलिया 165/8 (कैमरन ग्रीन 51*, स्टीव स्मिथ 42; शोरिफुल इस्लाम 6-35) से 101 रन पीछे।