Guru Arjan Dev: कैसे मनाया जाता है गुरु अर्जन देव जी का शहीदी दिवस?

A portrait of Sri Guru Arjan Dev Ji, the fifth Guru of Sikhism

guru arjan dev ki shahadat: सिख इतिहास में गुरु अर्जन देव जी का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक है। वे केवल सिख धर्म के पांचवें गुरु ही नहीं थे, बल्कि सत्य, त्याग, सेवा और धर्म के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले पहले शहीद गुरु भी थे। उनकी शहादत मानव इतिहास में साहस और आध्यात्मिक दृढ़ता का अद्वितीय उदाहरण मानी जाती है।ALSO READ: गुरु अंगद देव जयंती, जानें सिख धर्मगुरु के बारे में 10 अनजानी बातें

हर वर्ष उनका शहीदी दिवस श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया जाता है, जिसमें उनके महान बलिदान और शिक्षाओं को याद किया जाता है। इस बार पांचवें सिख गुरु, श्री गुरु अर्जुन देव जी का शहीदी दिवस गुरुवार, 18 जून 2026 को मनाया जा रहा है। यह दिन मानवता के प्रति उनके समर्पण और सर्वोच्च बलिदानकी याद दिलाता है।

 

गुरु अर्जन देव जी का जीवन सिख धर्म के विकास और गुरु ग्रंथ साहिब के प्रारंभिक संकलन में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने समानता, भाईचारे और सेवा का संदेश दिया, जो आज भी लाखों लोगों के जीवन को प्रेरित करता है। उनका शहीदी दिवस केवल एक धार्मिक अवसर नहीं, बल्कि सिख इतिहास की उस अमर गाथा का स्मरण है, जिसमें सत्य और धर्म के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया गया।

 

1. छबील लगाना/ मीठे और ठंडे पानी का वितरण

2. अखंड पाठ और कीर्तन

3. 'तेग' और विशेष लंगर की सेवा

4. नगर कीर्तन और धार्मिक जुलूस

5. लाहौर स्थित 'गुरुद्वारा डेहरा साहिब' की यात्रा

गुरु जी का संदेश: 

 

यह दिन पूरी दुनिया में फैले सिख समुदाय और मानवता में विश्वास रखने वाले लोगों द्वारा बेहद शांत, गरिमामय और सेवा भाव के साथ मनाया जाता है। इसे मनाने के मुख्य तरीके निम्नलिखित हैं:

 

1. छबील लगाना/ मीठे और ठंडे पानी का वितरण

यह इस दिन की सबसे अनूठी और प्रमुख विशेषता है। गुरु अर्जन देव जी को ज्येष्ठ महीने की भीषण गर्मी में जलती हुई तवे पर बिठाया गया था और उनके शीश पर गर्म रेत डाली गई थी। इस असहनीय तपन के सामने उनके शांत रहने और ईश्वर की रज़ा को मानने की याद में:

 

सिख समुदाय द्वारा जगह-जगह (सड़कों, चौराहों और गुरुद्वारों के बाहर) 'छबील' लगाई जाती है। इसमें राहगीरों, यात्रियों और हर धर्म के लोगों को ठंडा, मीठा पानी या कच्चे दूध की लस्सी/ कच्ची लस्सी पिलाई जाती है। यह सेवा तपती गर्मी में लोगों को शीतलता प्रदान करने और गुरु जी के शांत स्वभाव को याद करने का प्रतीक है।

 

2. अखंड पाठ और कीर्तन

श्री गुरु ग्रंथ साहिब का पाठ: गुरुद्वारों में विशेष रूप से 'श्री अखंड पाठ साहिब' यानी बिना रुके लगातार पाठ रखा जाता है, जिसका भोग शहीदी दिवस वाले दिन पड़ता है।

 

वाणी का गायन: इस दिन गुरुद्वारों में विशेष दीवान/ धार्मिक सभाएं सजते हैं। रागी जत्थे गुरु अर्जन देव जी द्वारा रचित पवित्र वाणी, विशेषकर 'सुखमनी साहिब' का पाठ और वैराग्यमयी कीर्तन करते हैं। गुरु जी के जीवन, उनकी शहादत और उनकी शिक्षाओं पर कथा-विचार साझा किए जाते हैं।

 

3. लंगर सेवा

गुरुद्वारों में बड़े स्तर पर गुरु का लंगर तैयार किया जाता है, जहां बिना किसी भेदभाव के सभी को भोजन कराया जाता है। इस दिन कई जगहों पर सादा और सुपाच्य भोजन परोसा जाता है, जो नम्रता और सादगी का संदेश देता है।

 

4. नगर कीर्तन और धार्मिक जुलूस

कई शहरों में इस अवसर पर भव्य नगर कीर्तन या धार्मिक जुलूस निकाले जाते हैं।

 

इन जुलूसों में गुरु ग्रंथ साहिब जी की छत्रछाया और 'पंज प्यारों' की अगुवाई में पालकी साहिब चलती है। संगत शबद-कीर्तन करती हुई साथ चलती है और रास्ते में भी श्रद्धालु छबील और फल बांटते हैं।

 

5. लाहौर स्थित 'गुरुद्वारा डेहरा साहिब' की यात्रा

पाकिस्तान के लाहौर में स्थित गुरुद्वारा श्री डेहरा साहिब वह पवित्र स्थान है, जहां गुरु अर्जन देव जी को शहीद किया गया था और वे रावी नदी में विलीन हुए थे। हर साल भारत और दुनिया भर से सिख श्रद्धालुओं का एक विशेष जत्था इस दिन मत्था टेकने और गुरु जी को श्रद्धांजलि देने लाहौर जाता है।

 

गुरु जी का संदेश: गुरु अर्जन देव जी ने असहनीय यातनाएं सहते हुए भी ईश्वर की इच्छा को हंसते-हंसते स्वीकार किया और कहा था:

'तेरा कीआ मीठा लागै, हरि नामु पदारथु नानकु मांगै'

अर्थात: हे ईश्वर! आपका किया हुआ मुझे मीठा लगता है, नानक तो बस आपके नाम की दात मांगता है।)

 

यह दिन केवल शोक मनाने का नहीं, बल्कि अन्याय के सामने न झुकने, विपरीत परिस्थितियों में भी शांत रहने और मानवता की निस्वार्थ सेवा करने के संकल्प को दोहराने का दिन है।

 

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