मार्केट कैप में भारत को लगा बड़ा झटका! राजेश एक्सपोर्ट्स में 15 लाख करोड़ का फर्जीवाड़ा; शेयर बाजार के लिए कैसा रहेगा अगला हफ्ता?

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Share Market Weekly Review : भारतीय शेयर बाजार के लिए जून का पहला हफ्ता कुछ खास नहीं रहा। 3 दिन बाजार लाल और 2 दिन हरे निशान में रहा। सेंसेक्स में इस हफ्ते 532 अंक की गिरावट रही, वहीं निफ्टी भी 181 अंक गिर गया। जानिए मार्केट ट्रेड और निवेशकों के लिए कैसा रहेगा आने वाला सप्ताह।

 

कैसी रही सेंसेक्स और निफ्टी की चाल

हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को सेंसेक्स 508 अंक की गिरावट के साथ 74267 पर और निफ्टी 165 अंक गिरकर 23382 पर बंद हुआ। मंगलवार को सेंसेक्स 383 अंक बढ़कर 74650 पर बंद हुआ तो निफ्टी 101 अंक चढ़कर 23484 पर जा पहुंचा। बुधवार सेंसेक्स में 304 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और यह 74316 पर बंद हुआ। निफ्टी भी 78 अंक गिरकर 23405 पर पहुंच गया।

 

गुरुवार को सेंसेक्स में मात्र 14 अंकों की बढ़कर 74,360 पर था तो निफ्टी 11 अंक की बढ़त के साथ 23417 पर जा पहुंचा। शुक्रवार को हफ्‍ते के आखिरी कारोबारी दिन सेंसेक्स 117 अंकों की गिरावट के साथ 74243 पर बंद, निफ्टी 50 अंक गिरकर 23,366 पर बंद हुआ।

 

इन फैक्टर्स से तय हुई बाजार की चाल

हार्मुज स्ट्रेट पर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव इस हफ्ते और बढ़ता नजर आ रहा है। हालांकि क्रूड की कीमतें अभी भी 100 डॉलर से नीचे ही है। इस हफ्ते बाजार में जमकर मुनाफावसूली हुई। निवेशकों में सरकारी बांड्स में विदेशी संस्थागत निवेश टैक्स फ्री होने से देश में विदेश निवेश बढ़ेगा। साथ ही विदेशी निवेश पर लगी 3 बाधाएं भी हटा दी गई है। इससे रुपए को स्थिर करने में मदद मिलेगी। रिजर्व बैंक के फैसलों से डॉलर के मुकाबले रुपए 56 पैसे मजबूत हुआ। आरबीआई के बड़े फैसले में निवेशकों को उत्साहित करने में विफल रहे और शुक्रवार को भी बाजार लाल निशान में बंद हुआ। ALSO READ: होम और कार लोन की EMI पर बड़ी राहत, RBI ने रेपो रेट को रखा स्थिर; जानें जीडीपी और महंगाई पर क्या कहा?

 

दक्षिण कोरिया ने भारत को पीछे छोड़ा

शेयर बाजार मूल्यांकन (मार्केट कैपिटलाइजेशन) के मामले में ताइवान के बाद दक्षिण कोरिया ने भी भारत को पीछे छोड़ दिया है। भारत अब दुनिया का छठा सबसे बड़ा इक्विटी बाजार बन गया है। ब्लूमबर्ग के अनुसार, दक्षिण कोरिया में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 5.04 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो भारत के लगभग 4.8 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से ज्यादा है।

 

राजेश एक्सपोर्ट्स पर सेबी का शिकंजा

सोने की रिफाइनिंग और जूलरी मेकिंग कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स पर भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के शिकंजे के बाद बवाल मच गया। बाजार नियामक सेबी की जांच में पता चला कि कंपनी ने अपना रेवेन्यू 99 फीसदी तक बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया था। कंपनी ने अपनी विदेशी कंपनियों के जरिए करीब 15.15 लाख करोड़ रुपए की फर्जी इनकम दिखाई।

राजेश एक्सपोर्ट्स पर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं, जांच के दौरान सहयोग न करने और कंपनी के रेवेन्यू को 97 से 99% तक बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने का आरोप है। सेबी ने अगले आदेश तक राजेश मेहता को कंपनी के शेयर खरीदने, बेचने या किसी भी तरह का लेन-देन करने से रोक दिया है। ALSO READ: SEBI का बड़ा एक्शन: 15 लाख करोड़ की फर्जी कमाई दिखाने के आरोप में राजेश एक्सपोर्ट्स पर शिकंजा, शेयर धड़ाम

 

कैसा रहेगा अगला हफ्ता

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध तेज होने का खतरा मंडरा रहा है। हार्मुज स्ट्रेट नहीं खुलने से सप्लाय संकट भी बरकरार है। रिजर्व बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति में रेपो रेट को स्थिर रखा है। जीडीपी अनुमान घटने से महंगाई बढ़ने का डर भी सता रहा है। ऐसे में निवेशक सतर्क दिखाई दे रहे हैं। पिछले कई हफ्‍तों से बाजार रेंज बाउंड बना हुआ है। अगले हफ्ते भी यही स्थिति बनी रहेगी। ALSO READ: सैम ऑल्टमैन की OpenAI को पछाड़ दुनिया की सबसे मूल्यवान AI कंपनी बनी एंथ्रोपिक; वैल्यूएशन सुन उड़ जाएंगे होश

 

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

बाजार विशेषज्ञ सागर अग्रवाल ने बताया कि बाजार पूरी तरह अनस्टेबल है। लोग पैसा लगाने से बच रहे हैं। शेयरों में ग्रोथ नहीं है। बाजार 1 हजार पाइंट में रेंज बाउंड है। जियो पोलिटिकल टेंशन का असर पर स्थानीय स्तर पर‍ दिखाई देने लगा है। कभी पेट्रोल महंगा होता है तो कभी डीजल, सीएनजी या रसोई गैस। तेल के मामले में भारत की डिपेंडेंसी है। महंगाई बढ़ रही है और इस वजह से पूरी चेन डिस्टर्ब होती नजर आ रही है।

उन्होंने कहा कि AI की वजह से जॉब मार्केट में भी खतरा बढ़ गया है। बाजार में स्थिरता आने तक यह स्थिति बनी रहेगी। फिलहाल स्थिति ठीक होने तक निवेशकों को वेट एंड वॉच की स्थिति में ही रहना चाहिए। 

 

अस्वीकरण : यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर लें।