उत्तर मध्य रेलवे मुख्यालय में शुक्रवार को महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह की अध्यक्षता में क्षेत्रीय राजभाषा कार्यान्वयन समिति की बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में हिंदी के अधिकतम प्रयोग और द्विभाषीय व्यवस्था को सख्ती से लागू करने पर जोर दिया गया। महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए सभी विभागों को राजभाषा हिंदी के प्रयोग-प्रसार में पूरी जिम्मेदारी से कार्य करने का निर्देश दिया। उन्होंने गृह मंत्रालय और रेलवे बोर्ड से जारी निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं से जुड़ी सभी सूचनाएं हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में अनिवार्य रूप से प्रदर्शित की जाएं। साथ ही, निरीक्षण रिपोर्ट भी हर स्तर पर हिंदी में तैयार की जानी चाहिए। विभागीय पत्राचार, टिप्पणियों और डिक्टेशन में हिंदी अथवा द्विभाषीय प्रयोग की प्रगति बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए। महाप्रबंधक ने संरक्षा, परिचालन, यांत्रिक, सिग्नल और बिजली विभागों को निर्देशित किया कि रेल संचालन से जुड़े सभी परिपत्र, नियमावली और मैनुअल हिंदी-अंग्रेजी दोनों भाषाओं में जारी किए जाएं। प्रशिक्षण संस्थानों के पाठ्यक्रम भी सरल और सुगम हिंदी-अंग्रेजी में तैयार करने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में ‘रेल संगम’ त्रैमासिक पत्रिका के सामान्य प्रशासन एवं सतर्कता विशेषांक का विमोचन किया गया। इस दौरान राजभाषा में उत्कृष्ट कार्य करने वाले एक अधिकारी और तीन कर्मचारियों को रेलवे बोर्ड के नकद पुरस्कार के लिए प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। बैठक में सिथौली (ग्वालियर) स्थित रेल स्प्रिंग कारखाने के मुख्य कारखाना प्रबंधक शिवाजी कदम ने कारखाने की कार्यप्रणाली, उत्पादन, ऊर्जा एवं पर्यावरण प्रबंधन पर हिंदी में प्रस्तुति दी। महाप्रबंधक सहित सभी अधिकारियों ने इसकी सराहना की। मुख्य राजभाषा अधिकारी जे.सी.एस. बोरा ने स्वागत भाषण देते हुए बताया कि केंद्रीय सचिवालय हिंदी परिषद की अखिल भारतीय प्रतियोगिताओं में उत्तर मध्य रेलवे के कर्मचारियों ने प्रथम स्थान प्राप्त किया है। बैठक में सभी विभागाध्यक्ष, अपर मंडल रेल प्रबंधक, कारखाना प्रबंधक और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
