‘गंगा जी की अवमानना 2014 से ही शुरू हो गई। जब यहां के सांसद आए और उन्होंने कहा कि मुझे तो मां गंगा ने बुलाया है। लोगों ने सोचा कि यह तो बहुत बड़े गंगा भक्त हैं। गंगा जी ने तो उनको साक्षात बुला लिया। लेकिन उसके बाद से देखिए, काशी 16 नाले गिर रहे थे, अभी तक हमारी जानकारी में नहीं है कि कोई नाला बंद हो गया है।’ ‘आज 12 साल के बाद भी 16 नाले जैसे के तैसे गिर रहे हैं। जब राष्ट्राध्यक्ष को लेकर आए थे तो नालों के सामने होर्डिंग लगाकर उन्होंने छिपाया, ताकि, नाव से वह देख न लें कि नाला यहां गिर रहा है। यही नहीं अब यहां पर माई को कमाई का साधन बना लिया गया है।’ ये बातें शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत में कहीं। दो दिन पहले गंगा नदी में नाव पर बैठकर इफ्तार करने वाले मामले में उन्होंने कहा कि यहां पर अब माहौल बदल गया है। खुली नाव की जगह 40 कमरों वाले होटल तैर रहे हैं। यह सब उसी कड़ी का हिस्सा है। इसके पहले नव संवत्सर के अवसर काशी के शंकराचार्य घाट स्थित श्रीविद्यामठ में ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द ने सनातनी पंचांग का लोकार्पण किया। इस दौरान गंगा घाट पर एक साथ हजारों लोगों ने मां गंगा की आरती उतारी और पवित्रता का संकल्प लिया। शंकराचार्य ने कहा कि हमने संकल्प लिया है कि गौ माता की रक्षा के लिए जो आंदोलन शुरू हुआ है, उसे इस वर्ष परिणाम तक पहुंचाया जाएगा। पढ़िए उनसे बातचीत की प्रमुख बातें… सवाल- नवरात्रि और हिंदू नव वर्ष के शुभ अवसर पर आप क्या संदेश देना चाहेंगे? जवाब- आज का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण और शुभ है। रौद्र नाम के नए संवत्सर का आरंभ हुआ है। हमारी सनातन संस्कृति में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही नव वर्ष शुरू होता है। हमने काशी में शंकराचार्य घाट पर बैठकर प्रथम सूर्योदय को अर्घ्य दिया, पंचांग का श्रवण किया और पूरे वर्ष के लिए संकल्प लिए। सवाल- इस वर्ष के लिए आपने कौन से प्रमुख संकल्प लिए हैं? जवाब – हमने संकल्प लिया है कि गौ माता की रक्षा के लिए जो आंदोलन शुरू हुआ है, उसे इस वर्ष परिणाम तक पहुंचाया जाएगा। यह केवल एक अभियान नहीं, बल्कि धर्मयुद्ध है और इसका शंखनाद हो चुका है। सवाल- गोरखपुर से शुरू होने वाली यात्रा की क्या योजना है? जवाब- इसकी विस्तृत रूपरेखा नवरात्रि के बाद साझा करेंगे। नवरात्रि के दौरान पंचमी को “शंकराचार्य चतुरंगिणी सेना” के गठन की जानकारी देंगे और फिर नवरात्रि के अंत में आगे की रणनीति बताएंगे कि यह अभियान कैसे आगे बढ़ेगा। सवाल- काशी में गंगा में इफ्तार पार्टी और उस पर हुई कार्रवाई को आप कैसे देखते हैं? जवाब – गंगा जी की पवित्रता के साथ लगातार समझौता हो रहा है। वर्षों से नाले गिर रहे हैं, उन्हें रोका नहीं गया। अब गंगा को कमाई का साधन बना दिया गया है। तैरते होटल, व्यावसायिक गतिविधियां और प्रदूषण बढ़ रहा है। नाव वाले पहले खुली नाव रखते थे। अब धीरे-धीरे यहां पर तैरते हुए होटल गंगा जी में उतार दिए गए हैं। 40-40 कमरों के होटल। उन कमरों में लोग रह रहे हैं। उसी में मल-मूत्र का विर्सजन करते हैं। उसी में कमरा बंद करके न जाने क्या-क्या कर रहे हैं। विलासिता का वातावरण यहां पर सृजित कर दिया गया है। केवल इसलिए कि पैसे की कमाई हो। जब आपने माई को कमाई का साधन बना लिया तो फिर यह सब भी अब उसी की कड़ी है। हम समझते हैं कि ये अपराध की श्रेणी में आता है। गंगा और घाटों की जो पवित्रता थी, आज वह कहीं बाधित हो गई। आप कहते हैं कि हमने भीड़ इकट्ठा कर दी, लेकिन वह भीड़ धार्मिक कितनी है। वह भीड़ यहां के धार्मिक वातावरण को क्षति पहुंचा रही है। इस भीड़ ने काशी की पवित्रता को समाप्त कर दिया है। सवाल- लखनऊ में हुए आपके कार्यक्रम में भीड़ को लेकर सवाल उठाए गए। इस पर आपका क्या कहना है? जवाब – पहले से ही लोगों में डर और अनिश्चितता का माहौल बनाया गया था। एलआईयू और अन्य माध्यमों से लोगों पर नजर रखी जा रही थी, उन्हें रोका और भ्रमित किया गया। इसके बावजूद हजारों लोग कार्यक्रम में पहुंचे। साथ ही लाखों लोगों ने लाइव प्रसारण देखा और अपनी प्रतिक्रिया दी। इसलिए हम इसे एक बड़ी सफलता मानते हैं। सवाल- आपने कहा कि यह “धर्म युद्ध” शुरू हो चुका है, इसका क्या अर्थ है? जवाब- इसका अर्थ है कि समाज में जो धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा का संघर्ष है, वह अब सक्रिय रूप से शुरू हो गया है। लोग जहां-जहां थे, वहीं से जुड़े-शंखनाद किया और समर्थन दिया। यह आंदोलन अब व्यापक रूप ले चुका है। सवाल – अंत में, आप अपने अनुयायियों और देशवासियों से क्या अपील करना चाहेंगे? जवाब – सभी लोग अपने धर्म, संस्कृति और परंपराओं के प्रति सजग रहें। गौ माता की रक्षा और सनातन मूल्यों के संरक्षण के लिए आगे आएं। यह समय संकल्प का है और मिलकर ही हम अपने उद्देश्य को प्राप्त कर सकते हैं। ————————
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