ठंडा-ठंडा, कूल-कूल! भगवान विट्ठल को ठंडक देने के लिए यहां आया 400 किलो चंदन
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Vitthal Rukmini Puja: भगवान विट्ठल और माता रुक्मिणी की चंदन उटी पूजा पंढरपुर में चैत्र प्रतिपदा से मृग नक्षत्र तक होती है. इस वर्ष मैसूर से 400 किलो चंदन मंगवाया गया है. पूजा के लिए बुकिंग पूरी हो चुकी है.

हाइलाइट्स
- भगवान विट्ठल की चंदन उटी पूजा चैत्र प्रतिपदा से मृग नक्षत्र तक होती है.
- पूजा के लिए मैसूर से 400 किलो चंदन मंगवाया गया है.
- चंदन उटी पूजा की बुकिंग दो महीने पहले ही पूरी हो चुकी है.
सोलापुर:गर्मी के मौसम में पंढरपुर के भगवान विट्ठल और माता रुक्मिणी की विशेष चंदन उटी पूजा की जाती है. यह पूजा चैत्र प्रतिपदा से लेकर मृग नक्षत्र के शुरू होने तक रोज दोपहर को होती है. इस परंपरा के तहत भगवान को ठंडक देने के लिए विशेष महिसूरी चंदन का लेप किया जाता है. इस वर्ष पूजा के लिए मैसूर से उच्च गुणवत्ता वाला चंदन मंगवाया गया है.
चंदन उटी पूजा की परंपरा
गर्मी में जैसे आम लोगों और जानवरों को राहत की जरूरत होती है, वैसे ही भगवान विट्ठल को भी ठंडक देने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. भक्तों का विश्वास है कि चंदन उटी पूजा करने से भगवान को शीतलता मिलती है. संत तुकाराम महाराज ने भी अपने अभंगों में इस पूजा का उल्लेख किया है.
चैत्र प्रतिपदा से रोज दोपहर 4 बजे यह पूजा की जाती है. इस दौरान विट्ठल और रुक्मिणी माता की मूर्तियों पर चंदन का लेप लगाया जाता है. चंदन की सुगंध से पूरा मंदिर प्रांगण महक उठता है और वातावरण में ठंडक बनी रहती है. वर्तमान में रोज़ लगभग डेढ़ किलो चंदन घिसकर इसका लेप विट्ठल और रुक्मिणी माता पर किया जाता है.
चंदन उटी पूजा का विशेष प्रसाद
चंदन उटी पूजा के बाद भगवान को विशेष प्रसाद चढ़ाया जाता है, जिसमें शिरा, पोहा, मेवे, पन्हा (आम का शरबत) और ठंडा नींबू पानी शामिल होता है.
पूजा के लिए विशेष चंदन की व्यवस्था
श्री विट्ठल-रुक्मिणी मंदिर समिति ने इस पूजा के लिए कर्नाटक के बेंगलुरु और मैसूर से 400 किलो सुगंधित चंदन खरीदा है. इस चंदन को रोज मंदिर में घिसकर भगवान को अर्पित किया जाता है.
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पूजा के लिए बुकिंग पूरी
चंदन उटी पूजा के लिए भक्तों में जबरदस्त उत्साह रहता है. विट्ठल भगवान की चंदन उटी पूजा के लिए 21,000 रुपये और रुक्मिणी माता की पूजा के लिए 9,000 रुपये शुल्क निर्धारित है. यह बुकिंग दो महीने पहले ही पूरी हो चुकी है.
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