नाम पुकारने पर भी बच्चा न दे जवाब तो ऑटिज्म का खतरा
Kanpur News – भारतीय बाल रोग अकादमी ने विश्व ऑटिज्म दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया। डॉ. यशवंत राव ने बताया कि ऑटिज्म एक न्यूरो-विकास विकलांगता है, जो बच्चों की सामाजिक, संवाद और व्यवहार कौशल को प्रभावित करता है। 160…

भारतीय बाल रोग अकादमी ने पुष्पा मेमोरियल सेंटर आजाद नगर में विश्व ऑटिज्म दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया। यहां मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ यशवंत राव ने बताया कि ऑटिज्म न्यूरो- विकास से संबंधित एक विकलांगता है। यह बच्चे की सोशल, कम्युनिकेशन एवं बिहेवियर स्किल्स को कई तरह से प्रभावित करता है। उन्होंने बताया कि विश्व में 160 में से एक बच्चा ऑटिज्म से प्रभावित होता है। बच्चों में 2 से 3 वर्ष की आयु में ही ऑटिज्म के लक्षण दिखने लगते हैं। अपने में ही खोए रहना, आंखों में आंख डाल कर बात नहीं करना, नाम पुकारे जाने पर कोई प्रतिक्रिया न देना, बातचीत में कोई दिलचस्पी नहीं लेना, कोई नया बदलाव पसंद न करना, एक ही काम को बार-बार करते रहना प्रमुख लक्षण हैं। बाल रोग अकादमी अध्यक्ष डॉ रोली मोहन श्रीवास्तव ने बताया कि ऑटिज्म का कोई इलाज उपलब्ध नहीं है, लेकिन जल्दी पहचान एवं आधुनिक चिकित्सा से इसके असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है। डॉ अमितेश यादव ने बताया कि ऑटिज्म के संबंध में जागरूकता की भारी कमी है। यहां डॉ अनुराग भारती, डॉ अम्बरीष गुप्ता, डॉ निधिका पाण्डेय, डॉ गरिमा मौजूद रहे।